Saturday , October 10 2026

तो क्या आज एक विकेट गिराएंगे सम्राट! बीजेपी के बागी नेताओं को नामांकन वापस लेने की चेतावनी

बिहार की राजनीति में विधान परिषद (MLC) चुनावों की सरगर्मी जैसे-जैसे परवान चढ़ रही है, वैसे-वैसे सत्ता के गलियारों से बड़े और कड़े फैसले सामने आने लगे हैं। राजधानी पटना से लेकर जिलों तक सियासी पारा इस समय अपने चरम पर है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एनडीए (NDA) नेतृत्व ने अनुशासनहीनता के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी प्रदेश के बड़े नेताओं में शुमार सम्राट चौधरी ने पार्टी के उन तमाम बागी और असंतुष्ट नेताओं को एक बेहद कड़ी और अंतिम चेतावनी जारी कर दी है जिन्होंने आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ जाकर अपने नामांकन दाखिल कर दिए हैं। पार्टी नेतृत्व ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि यदि बागी तेवर अपनाए बैठे नेताओं ने तय समय सीमा के भीतर अपने नाम वापस नहीं लिए, तो उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए सीधे उनकी प्राथमिक सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी और उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। इस अल्टीमेटम के बाद से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या आज सम्राट चौधरी वाकई किसी बड़े बागी नेता का विकेट गिराने जा रहे हैं।

बिहार विधान परिषद की रिक्त हो रही स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के लिए होने वाले चुनावों को लेकर इस बार एनडीए के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कई सीटों पर गठबंधन के दलों के बीच सीटों के तालमेल के बाद भी स्थानीय स्तर के मजबूत नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बगावत का झंडा उठा लिया है। कई जिलों में भाजपा और जदयू के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने ही पार्टी के ही पुराने और कद्दावर नेताओं ने निर्दलीय या विरोधी खेमे के समर्थन से अपने नामांकन पत्र दाखिल कर दिए हैं, जिससे पार्टी की आधिकारिक रणनीति को करारा झटका लगा है। विपक्षी दलों और नए राजनीतिक समीकरणों के बीच इन आंतरिक विवादों को सुलझाने के लिए पिछले कई दिनों से बैठकों का दौर चल रहा था, लेकिन जब बातचीत से बात नहीं बनी, तो अब पार्टी ने सख्ती दिखाने का कठोर निर्णय ले लिया है।

मामले की गंभीरता को भांपते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मीडिया और पार्टी मंचों से स्पष्ट संदेश दे दिया है कि पार्टी के भीतर अनुशासन सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल या अन्य दलों से मुकाबला करने से पहले पार्टी को अपने घर के भीतर अनुशासनहीनता से निपटना होगा। जो नेता पार्टी के टिकट वितरण और उच्च नेतृत्व के फैसलों को दरकिनार करके अपनी ही पार्टी की नैया डुबाने में लगे हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सूत्रों के हवाले से यह भी खबर सामने आ रही है कि प्रदेश अध्यक्ष और संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों ने ऐसे सभी बागियों की एक लंबी फेहरिस्त तैयार कर ली है और उन्हें अंतिम बार सोचने तथा अपना पर्चा वापस लेने का स्पष्ट निर्देश दे दिया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एमएलसी चुनावों के इस रण में आज का दिन बेहद निर्णायक साबित होने वाला है। यदि बागी नेता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के इस अल्टीमेटम को नजरअंदाज करते हुए मैदान में डटे रहते हैं, तो भाजपा और एनडीए नेतृत्व तुरंत एक्शन लेते हुए न सिर्फ उन्हें पार्टी से निष्कासित कर सकता है, बल्कि उनके भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को भी तगड़ा झटका दे सकता है। दूसरी तरफ, बागी नेताओं का एक धड़ा अभी भी अपनी जिद पर अड़ा हुआ है और उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करके फैसले थोपे गए हैं, जिसके कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। बहरहाल, सम्राट चौधरी के इस तेवर ने साफ कर दिया है कि इस बार बिहार की राजनीति में नरमी के दिन लद चुके हैं और संगठन की ताकत ही सर्वोपरि रहने वाली है।