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टीवी के मशहूर स्टार विवेक दहिया ने बयां किया संघर्ष का कड़ा दौर: बार में किया काम

टेलीविजन इंडस्ट्री की दुनिया से एक बेहद प्रेरणादायक और चौंकाने वाली कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो सकती हैं। छोटे पर्दे के जाने-माने और चहेते अभिनेता विवेक दहिया, जो अपनी शानदार एक्टिंग और दमदार पर्सनैलिटी के लिए जाने जाते हैं, ने अपने शुरुआती जीवन और संघर्ष के दिनों का एक ऐसा पन्ना खोला है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। लोकप्रिय अभिनेत्री दिव्यांका त्रिपाठी के पति विवेक दहिया ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपने स्ट्रगल के उन काले दिनों को याद किया जब वे विदेश में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले और अपनी मेहनत के दम पर अभिनय की दुनिया में मुकाम हासिल करने वाले विवेक ने बताया कि सफलता की चमक के पीछे किस तरह के कड़े इम्तिहान, रात-दिन की मेहनत और मानसिक तनाव छिपे होते हैं। उन्होंने बिना किसी झिझक के स्वीकार किया कि उन्होंने अपना पेट पालने और अपने खर्चों को उठाने के लिए बार में काम करने से लेकर टॉयलेट पेपर फैक्ट्री में मजदूरी और लोगों के घरों तक सामान की डिलीवरी करने तक के छोटे-छोटे काम किए हैं। उनके इस खुलासे ने उनके फैंस के दिलों में उनके प्रति सम्मान और अधिक बढ़ा दिया है, क्योंकि यह कहानी उन तमाम युवाओं के लिए एक मिसाल है जो बिना शॉर्टकट के अपनी मेहनत के दम पर जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हैं।

विवेक दहिया के जीवन का यह कड़ा संघर्ष तब शुरू हुआ जब वे अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश गए थे। अमूमन लोगों को लगता है कि विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्र काफी संपन्न परिवारों से होते हैं और उन्हें कभी किसी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता, लेकिन विवेक की कहानी इससे बिल्कुल अलग थी। विदेश पहुंचने के बाद जब उन्हें वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा और घर से पैसे मिलने बंद हो गए, तो उनके सामने अस्तित्व की एक बड़ी लड़ाई खड़ी हो गई। अपने रहने का किराया चुकाने, कॉलेज की फीस भरने और अपने दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए उनके पास काम करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। उस दौर को याद करते हुए विवेक बताते हैं कि शुरुआती दिनों में उन्हें अंग्रेजी बोलने के लहजे और वहां के माहौल में ढलने में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। किसी भी काम को छोटा न समझने की सोच ने ही उन्हें विदेशी धरती पर टिके रहने की हिम्मत दी, क्योंकि उन्हें अच्छी तरह मालूम था कि यदि वे जीवित रहना चाहते हैं और अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं, तो उन्हें हर तरह की शारीरिक मेहनत करने के लिए तैयार रहना होगा।

जीविकोपार्जन के लिए विवेक दहिया ने जिन कामों को चुना, वे किसी भी फिल्मी कहानी से कम नहीं थे। उन्होंने एक बार में ग्लास साफ करने और वेटर के रूप में काम करने से लेकर एक इंडस्ट्रियल टॉयलेट पेपर फैक्ट्री में शिफ्टों के दौरान मजदूरी करने तक का काम किया। फैक्ट्री के उस दौर को याद करते हुए वे बताते हैं कि वहां काम का माहौल बेहद कठिन और शारीरिक रूप से थका देने वाला होता था, जहां मशीन की गड़गड़ाहट के बीच उन्हें घंटों खड़े रहकर काम करना पड़ता था। इसके अलावा, उन्होंने शहर की गलियों में सामान और पार्सल की डिलीवरी करने वाले डिलीवरी बॉय की भूमिका भी निभाई, ताकि वे शाम को कुछ पैसे कमा सकें जिससे उनके अगले दिन का चूल्हा जल सके। ठंड के मौसम में साइकिल या पैदल चलकर घर-घर सामान पहुंचाना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उनकी जिजीविषा और कुछ कर दिखाने के जज्बे ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। इन तमाम मुश्किलों और अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करते हुए भी उन्होंने कभी अपनी पढ़ाई और अपने अभिनय के सपने को मरने नहीं दिया, जो उनकी मजबूत इच्छाशक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण है।

इन तमाम कठिनाइयों और संघर्षों का सामना करने के बाद जब विवेक दहिया भारत लौटे और उन्होंने मॉडलिंग व एक्टिंग की दुनिया में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया, तो उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया। टेलीविजन के लोकप्रिय शो ‘ये है मोहब्बतें’ के सेट पर काम करने के दौरान उनकी मुलाकात प्रसिद्ध अभिनेत्री दिव्यांका त्रिपाठी से हुई, जो पहले से ही इंडस्ट्री का एक बड़ा नाम थीं। दोनों के बीच पहले दोस्ती हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया, जिसके बाद साल 2016 में दोनों ने शादी कर ली। कई लोग अक्सर यह मानते हैं कि दिव्यांका जैसी बड़ी स्टार से शादी करने के बाद विवेक को रातों-रात शोहरत मिल गई, लेकिन विवेक ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर ही अपना मुकाम बनाया है। दिव्यांका ने हमेशा उनके संघर्ष के दिनों की कद्र की और उनके हर फैसले में एक मजबूत जीवनसाथी की तरह उनका साथ दिया। आज विवेक दहिया टीवी इंडस्ट्री के एक स्थापित अभिनेता हैं और कई लोकप्रिय शोज़ व वेब सीरीज में अपनी अदायगी का लोहा मनवा चुके हैं, जिससे यह साबित होता है कि सच्ची मेहनत का फल हमेशा मिलता है।

आज के दौर में जब युवा जरा सी असफलता या परेशानी से घबराकर शॉर्टकट अपनाने की सोचते हैं, तब विवेक दहिया की यह जीवन यात्रा एक मजबूत प्रेरणा के रूप में सामने आती है। उनका यह सफर हमें यह सिखाता है कि जीवन में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि आपकी ईमानदारी और लगन ही आपके भविष्य की दिशा तय करती है। बार में काम करने से लेकर टॉयलेट पेपर फैक्ट्री के फर्श पर पसीना बहाने और डिलीवरी बॉय बनने तक के सफर ने विवेक को जमीन से जुड़े रहना सिखाया है। उनकी पत्नी दिव्यांका त्रिपाठी भी कई बार सार्वजनिक मंचों पर उनके इस कड़े संघर्ष की तारीफ कर चुकी हैं और गर्व महसूस करती हैं कि उनके पति ने अपनी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। विवेक की यह कहानी केवल एक सेलिब्रिटी का किस्सा नहीं है, बल्कि यह हर उस आम इंसान की दास्तान है जो अपने सपनों को सच करने के लिए विपरीत परिस्थितियों से लड़ रहा है और अंततः सफलता के शिखर को छूकर ही दम लेता है।