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किशाऊ परियोजना से यूपी को सिंचाई के लिए मिलेगा बंपर पानी, बुंदेलखंड समेत इन जिलों की बदलेगी तस्वीर

उत्तर प्रदेश के करोड़ों किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है, जो राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर पूरी तरह बदलकर रख देगी। लंबे समय से कागजों और आपसी प्रशासनिक बैठकों में अटकी पड़ी बहुप्रतीक्षित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना (Kishau Dam Project) को अब आखिरकार अमलीजामा पहनाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की विशेष मौजूदगी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस महत्वाकांक्षी 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना के समझौता ज्ञापन (MoU) पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस ऐतिहासिक और सहयोगात्मक समझौते के बाद अब उत्तर प्रदेश को सिंचाई और पेयजल के लिए भारी मात्रा में पानी मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिससे राज्य के किसानों के चेहरे पर एक नई खुशी और चमक देखने को मिल रही है।

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदी ‘टौंस’ (Tons River) पर किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना का निर्माण किया जाना है। इस परियोजना के तहत टौंस नदी पर लगभग 232 से 236 मीटर ऊंचा एक विशाल कंक्रीट का गुरुत्व बांध बनाया जाएगा, जिसकी जल भंडारण क्षमता बहुत अधिक होगी। दशकों पुराने इस जल विवाद को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करते हुए इसकी 90 प्रतिशत लागत का वित्तीय भार खुद उठाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जबकि शेष 10 प्रतिशत खर्च आपसी सहमति से तय राज्यों द्वारा उठाया जाएगा। इस बांध के बनने से न केवल उत्तर भारत के राज्यों को पनबिजली का लाभ मिलेगा, बल्कि पानी की भयंकर किल्लत से जूझ रहे मैदानी इलाकों के लिए यह किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा।

जल बंटवारे के तय समझौते के अनुसार, उत्तर प्रदेश को इस वृहद परियोजना से सालाना लगभग 3.72 अरब घन मीटर (BCM) पानी आवंटित किया गया है। इस अपार जलराशि के मिलने से उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों के साथ-साथ कई अन्य जिलों की प्यास बुझेगी और खेतों को पर्याप्त सिंचाई मिल सकेगी। मुख्य रूप से सहारनपुर, मेरठ, शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आधा दर्जन से अधिक जिलों के किसानों को खेती के लिए भरपूर पानी मिलेगा। इसके साथ ही पानी की कमी का सामना करने वाले बुंदेलखंड और अन्य क्षेत्रों तक भी जल पहुंचाने के लिए इस योजना के माध्यम से सुगम रास्ते तैयार किए जा रहे हैं, जिससे बंजर और असिंचित जमीन भी लहलहा उठेंगी।

उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान जिलों में सिंचाई की सुविधा बेहतर होने से धान, गेहूं और अन्य फसलों के उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है। भारत एक कृषि प्रधान देश है जहां आज भी बड़े पैमाने पर खेती मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है, जिसके कारण कई बार सूखा पड़ने या समय पर बारिश न होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। किशाऊ परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद किसानों को न केवल बारह महीने सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, बल्कि भूजल स्तर (Groundwater Table) में भी तेजी से सुधार देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस समझौते पर खुशी जताते हुए कहा है कि यह कदम ‘विकसित उत्तर प्रदेश से विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में एक मील का पत्थर साबित होगा और इससे राज्य के अन्नदाताओं का भविष्य और अधिक सुरक्षित व समृद्ध बनेगा।

केवल सिंचाई और पीने का पानी ही नहीं, बल्कि किशाऊ बांध परियोजना पर्यावरण और सुरक्षा के लिहाज से भी उत्तर प्रदेश समेत पूरे यमुना बेसिन के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। मानसून के दिनों में पहाड़ों से आने वाले अत्यधिक पानी के कारण जो नदियां उफान पर होती हैं और उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में तबाही मचाती हैं, उन पर इस बांध के जरिए काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। इसके अलावा गर्मियों के महीनों में जब नदियां सूखने लगती हैं और यमुना नदी में पानी का स्तर बहुत कम हो जाता है, तब इस परियोजना से छोड़े जाने वाला अतिरिक्त जल पर्यावरण प्रवाह (Environmental Flow) को बनाए रखेगा। इससे आगे चलकर यमुना नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने के अभियान को भी अभूतपूर्व गति मिलेगी, जो अंततः प्रयागराज में गंगा नदी की स्वच्छता में भी अपना सकारात्मक योगदान देगा।