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झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जेपीएससी और जेएसएससी की 20 से अधिक भर्ती परीक्षाएं रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और पहले से चयनित कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसके तहत झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विभिन्न परीक्षाओं को रद्द किया गया था। अदालत के इस अहम फैसले से उन हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जिन्होंने कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल की थी और अब अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता में डूबे हुए थे।

प्राकृतिक न्याय का हवाला और याचिकाकर्ताओं की दलीलें

अदालत में दायर की गई याचिकाओं में मुख्य रूप से यह दलील दी गई थी कि राज्य सरकार ने बिना किसी व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिए और बिना कोई स्पष्ट कारण बताए एकतरफा तरीके से पूरी भर्ती प्रक्रिया और नियुक्तियों को रद्द कर दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत’ (Principles of Natural Justice) का हवाला देते हुए कहा गया कि यदि जांच के दौरान किसी विशिष्ट अभ्यर्थी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो केवल उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

लेकिन, बिना किसी व्यक्तिगत जांच या सुनवाई के सभी सफल अभ्यर्थियों को एक साथ सेवा से बाहर करना पूरी तरह से अनुचित है। अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्होंने पूरी ईमानदारी और निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत परीक्षाएं दी थीं, मेरिट लिस्ट में अपना स्थान बनाया था और उसके बाद कानूनी रूप से सरकारी पदों पर नियुक्त हुए थे।

JSSC-CGL परीक्षा और CID जांच का मामला

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सीआईडी (CID) और एसआईटी (SIT) की जांच में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर झारखंड सरकार ने एक साथ 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया था।

इसके अलावा, JSSC-CGL मामले में भी याचिकाकर्ताओं ने अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था कि परीक्षा के परिणाम पहले ही हाईकोर्ट के पुराने आदेशों के पूर्ण अनुपालन में घोषित किए गए थे। ऐसे में सरकार द्वारा पूरी परीक्षा को अचानक रद्द करने के फैसले की कानूनी वैधता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। अब हाईकोर्ट के इस ताजा और सख्त आदेश के बाद, उन तमाम सफल अभ्यर्थियों को बड़ी कानूनी राहत मिल गई है जो अपनी नियुक्तियों को लेकर असमंजस में थे।