जसपाल राणा का निधन: उत्तरकाशी के लाल ने दुनिया में लहराया था भारत का परचम, जानें उपलब्धियां

भारतीय निशानेबाज जगत से शुक्रवार को बेहद दुखद खबर सामने आई। देश के दिग्गज निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का निधन हो गया। उनके निधन से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई बड़ी हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

उत्तरकाशी में जन्मे थे शूटर जसपाल राणा

28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के चिलामू गांव में जन्मे जसपाल राणा ने बेहद कम उम्र में निशानेबाजी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली थी। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना शुरू कर दिया था। उनके पिता नारायण सिंह राणा ITBP अधिकारी रहे और उत्तराखंड के पहले खेल मंत्री भी बने। परिवार से मिले खेल संस्कारों ने जसपाल राणा को विश्व मंच तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

1994 में आया था करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट

साल 1994 उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। इटली के मिलान में आयोजित विश्व जूनियर शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। इसी वर्ष हिरोशिमा एशियाई खेलों में 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया। वहीं विक्टोरिया राष्ट्रमंडल खेलों में दो स्वर्ण और एक रजत पदक अपने नाम किया।

पदकों से भरा रहा शानदार करियर

जसपाल राणा ने अपने करियर में एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत को दर्जनों पदक दिलाए। साल 1998 के राष्ट्रमंडल खेलों में दो स्वर्ण और दो रजत पदक जीते। 2002 मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में चार स्वर्ण और एक रजत पदक हासिल कर इतिहास रचा। वहीं 2006 दोहा एशियाई खेलों में तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर एक बार फिर दुनिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

अर्जुन पुरस्कार से पद्मश्री तक का सफर

निशानेबाजी में शानदार उपलब्धियों के लिए उन्हें 1994 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बाद भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा। वर्ष 2020 में उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार भी मिला।

कोच बनकर तैयार की नई पीढ़ी

खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने भारत की नई पीढ़ी के कई स्टार निशानेबाजों को तराशा। ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर और युवा शूटर सौरभ चौधरी समेत कई खिलाड़ियों को उन्होंने प्रशिक्षण दिया।जसपाल राणा हमेशा उत्तराखंड से जुड़े रहे। उन्होंने प्रदेश के युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनके योगदान के कारण उत्तराखंड में निशानेबाजी को नई पहचान मिली। जसपाल राणा का जाना केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय खेल जगत के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई करना बेहद मुश्किल होगा।