
आजकल छोटे बच्चों को खाना खिलाना माता-पिता के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता। अक्सर देखा जाता है कि बच्चे को आसानी से और जल्दी खाना खिलाने के लिए माता-पिता या परिजन उनके हाथ में स्मार्टफोन थमा देते हैं या टीवी पर कार्टून चला देते हैं। बच्चा स्क्रीन में इतना खो जाता है कि बिना किसी नखरे के चुपचाप खाना खा लेता है। पहली नजर में यह तरीका भले ही सुविधाजनक और आसान लगे, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञों (पीडियाट्रिशियंस) का मानना है कि यह आदत बच्चे की सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। भोजन करते समय स्क्रीन देखने की यह लत बच्चों में केवल मानसिक प्रभाव ही नहीं डालती, बल्कि उनके पाचन तंत्र को भी बुरी तरह प्रभावित करती है, जिसके कारण उन्हें पुरानी कब्ज (क्रोनिक कॉन्स्टिपेशन) की समस्या हो सकती है।
स्क्रीन टाइम और पाचन का सीधा संबंध: कैसे होती है कब्ज की शुरुआत?
जब बच्चा स्क्रीन देखते हुए खाना खाता है, तो उसका पूरा ध्यान मोबाइल या टीवी के विजुअल्स पर होता है, न कि भोजन के स्वाद, बनावट और खुशबू पर। पाचन क्रिया केवल पेट से शुरू नहीं होती, बल्कि इसकी शुरुआत हमारे दिमाग से होती है। जब हम खाने को देखते हैं और उसकी खुशबू महसूस करते हैं, तो हमारा दिमाग लार (सलाइवा) और पाचन एंजाइम्स को स्रावित करने का संकेत देता है। लेकिन जब बच्चा स्क्रीन पर केंद्रित होता है, तो दिमाग यह संकेत सही तरीके से नहीं भेज पाता, जिससे पाचन एंजाइम्स का उत्पादन कम हो जाता है।
इसके अलावा, स्क्रीन में व्यस्त रहने के कारण बच्चा बिना चबाए जल्दी-जल्दी खाना निगलने लगता है। भोजन को सही तरीके से न चबाने के कारण आंतों पर उसे पचाने का अतिरिक्त दबाव पड़ता है। जब अधपचा भोजन आंतों में पहुंचता है, तो आंतों की स्वाभाविक गतिशीलता (पेरिस्टल्सिस) धीमी पड़ जाती है। इसके परिणामस्वरूप, भोजन आंतों में लंबे समय तक अटका रहता है, जिससे उसका पानी सूख जाता है और मल सख्त हो जाता है। यही स्थिति आगे चलकर बच्चों में गंभीर कब्ज का रूप ले लेती है।
माइंडफुल ईटिंग की कमी और भूख के संकेतों की अनदेखी
मोबाइल देखकर खाना खाने से बच्चे में ‘माइंडफुल ईटिंग’ यानी ध्यानपूर्वक खाने की आदत पूरी तरह खत्म हो जाती है। बच्चे के शरीर का एक प्राकृतिक तंत्र होता है, जो पेट भरने पर दिमाग को ‘सैटाइटी सिग्नल’ (तृप्ति का संकेत) भेजता है। जब बच्चा स्क्रीन में मग्न रहता है, तो उसे यह अहसास ही नहीं होता कि उसका पेट कब भर चुका है। इसके कारण या तो बच्चा जरूरत से ज्यादा खाना (ओवरईटिंग) खा लेता है या फिर पर्याप्त मात्रा में पोषण नहीं ले पाता।
अत्यधिक मात्रा में बिना चबाया गया खाना पेट में जाने से एसिडिटी, ब्लोटिंग (पेट फूलना) और अपच जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं। बार-बार कब्ज होने के कारण बच्चों को मलत्याग करते समय तेज दर्द का सामना करना पड़ता है। इस दर्द के डर से कई बार बच्चे मल को रोकने (स्टूल विथहोल्डिंग) लगते हैं, जिससे कब्ज की समस्या और भी ज्यादा विकराल रूप धारण कर लेती है। इसके साथ ही, शारीरिक गतिविधियों की कमी और स्क्रीन के सामने घंटों बैठे रहने से भी आंतों की कार्यप्रणाली सुस्त पड़ जाती है।
बच्चों को स्क्रीन-फ्री खाना खिलाने और कब्ज से बचाने के उपाय
यदि आप अपने बच्चे को कब्ज की समस्या से बचाना चाहते हैं, तो सबसे पहले भोजन के समय स्क्रीन को पूरी तरह बैन (प्रतिबंधित) करें। शुरुआत में बच्चा जिद्द कर सकता है या रो सकता है, लेकिन धैर्य बनाए रखें। पूरे परिवार के साथ एक साथ बैठकर खाना खाएं, ताकि बच्चा बड़ों को देखकर चबा-चबाकर खाने की आदत सीख सके। खाने की मेज पर बच्चे से उसकी पसंदीदा चीजों के बारे में बात करें और उसे भोजन के रंग व स्वाद का आनंद लेने दें।
बच्चे की डाइट में फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे ताजे फल, सब्जियां, दलिया, ओट्स और बीन्स शामिल करें। बच्चे को दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ पिलाएं ताकि आंतों में नमी बनी रहे। इसके अलावा, बच्चे के शारीरिक खेल-कूद को बढ़ावा दें, क्योंकि शारीरिक रूप से सक्रिय रहने से पाचन क्रिया मजबूत होती है। यदि बच्चा कब्ज की समस्या से ज्यादा परेशान रहता है, तो बिना देरी किए किसी अच्छे बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
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