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चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: CJP प्रदर्शनों के बीच फॉर्म 7 के नियमों में बदलाव

भारतीय चुनावी प्रणाली और राजनीतिक गलियारों में उस वक्त एक नया भूचाल आ गया जब चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने मतदाता सूची से नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले बेहद महत्वपूर्ण ‘फॉर्म 7’ (Form 7) के नियमों में अचानक बड़ा संशोधन कर दिया। देश भर में चल रहे सीजेपी (CJP – Citizens for Justice and Peace) और विभिन्न नागरिक संगठनों के प्रदर्शनों के बीच आयोग का यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और किसी भी तरह के फर्जीवाड़े या राजनीतिक दुरुपयोग को रोकने के लिए अब यह तय कर दिया है कि कोई भी व्यक्ति या आवेदक एक तय सीमा यानी अधिकतम 10 बार ही फॉर्म 7 भर सकेगा। इस नए नियम के लागू होने के बाद से राजनीतिक दलों और चुनावी विश्लेषकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है, क्योंकि आलोचकों का मानना है कि इससे मतदाताओं के अधिकारों और शिकायतों पर असर पड़ सकता है, वहीं आयोग का कहना है कि यह चुनावी शुचिता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी था।

क्या है फॉर्म 7 और क्यों मचा है इसको लेकर राजनीतिक घमासान?

भारतीय निर्वाचन आयोग की नियमावली के अनुसार, फॉर्म 7 वह आधिकारिक आवेदन पत्र है जिसका उपयोग मतदाता सूची (Electoral Roll) से किसी व्यक्ति का नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराने या किसी मृत/स्थानांतरित मतदाता का नाम सूची से बाहर करने के वास्ते किया जाता है। हाल के दिनों में कई राज्यों से ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ राजनीतिक दलों, निहित स्वार्थ वाले समूहों या शरारती तत्वों द्वारा बड़े पैमाने पर थोक में फॉर्म 7 भरकर वैध मतदाताओं के नाम सूची से कटवाने की साजिश रची जा रही है। इस अवैध और सुनियोजित तरीके से नाम कटवाने की प्रथा के खिलाफ विभिन्न मानवाधिकार संगठनों, नागरिक समूहों और सीजेपी जैसे मंचों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि इस फर्जीवाड़े के जरिए गरीब, अल्पसंख्यक और वंचित वर्गों के मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित करने की गहरी साजिश रची जा रही है, जिसके बाद चुनाव आयोग को इस पर कड़ा संज्ञान लेना पड़ा।

चुनाव आयोग द्वारा नियमों में बदलाव: अब अधिकतम 10 बार ही भरने की होगी अनुमति

बढ़ते विवाद और शिकायतों के मध्यनजर चुनाव आयोग ने तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए फॉर्म 7 के ऑनलाइन और ऑफलाइन पोर्टल पर सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं। नए नियमों के मुताबिक, अब एक ही आईडी, मोबाइल नंबर या आवेदक द्वारा एक निश्चित समय सीमा के भीतर केवल अधिकतम 10 बार ही फॉर्म 7 जमा करने की अनुमति दी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस तय सीमा से अधिक बार आवेदन करने की कोशिश करेगी, तो सिस्टम स्वतः ही उस आवेदन को ब्लॉक कर देगा और उसकी गहन जांच के आदेश जारी हो जाएंगे। आयोग का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से कोई भी व्यक्ति बल्क (थोक) में फर्जी आपत्तियां दर्ज नहीं करा पाएगा और मतदाताओं के अधिकारों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

CJP और नागरिक संगठनों के विरोध का असर और चुनावी पारदर्शिता पर बहस

नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठन सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) और अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के इस कदम को आंशिक राहत के रूप में देखा है, हालांकि उनका यह भी कहना है कि चुनावी फर्जी H2 को रोकने के लिए नियमों को और अधिक पारदर्शी बनाना होगा। हालिया प्रदर्शनों के दौरान यह बात खुलकर सामने आई थी कि कैसे तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। चुनाव आयोग के इस कड़े नियम से यह संदेश साफ हो गया है कि आयोग किसी भी कीमत पर मतदाता सूची की पवित्रता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि इन बदलावों से न केवल फर्जी शिकायतों पर लगाम लगेगी, बल्कि चुनावी मशीनरी पर जनता का भरोसा भी और अधिक मजबूत होगा।

आगामी चुनावों पर क्या होगा असर और भविष्य की चुनावी तैयारियां

जैसे-जैसे देश में आगामी विधानसभा और अन्य स्थानीय चुनाव नजदीक आ रहे हैं, चुनाव आयोग की यह सख्ती एक बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है। राजनीतिक दलों के लिए अब यह जरूरी हो गया है कि वे मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी तरीकों का पालन करें। निर्वाचन आयोग ने अपने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को भी निर्देश दे दिया है कि फॉर्म 7 के तहत आने वाले प्रत्येक आवेदन की भौतिक और जमीनी स्तर पर निष्पक्ष जांच की जाए, ताकि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम गलती से भी न कटे। यह नया संशोधन भारतीय चुनावी लोकतंत्र को अधिक सुरक्षित, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और मील का पत्थर साबित होने वाला है।