
बिहार की सियासत में इन दिनों नेताओं के केवल भाषण और बयानबाजी ही नहीं, बल्कि उनका अंदाज-ए-बयां और पहनावा भी सोशल मीडिया पर चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। राज्य के राजनीतिक गलियारों में इस समय एक अजीब सी और दिलचस्प बहस छिड़ी हुई है कि क्या बिहार के आधुनिक युवा नेता अस्सी के दशक की उस पुरानी खुमारी और रेट्रो संस्कृति से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। चाहे वह लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान हों या फिर राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पुत्री और तेजतर्रार नेत्री रोहिणी आचार्य, इन सभी दिग्गजों की हालिया सामने आई कुछ खास तस्वीरें इस बात की गवाही दे रही हैं कि वे आज के हाई-टेक दौर में भी पुरानी यादों और विंटेज दौर के फैशन या तौर-तरीकों को बेहद पसंद करते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रही इन तस्वीरों ने आम जनता से लेकर राजनीतिक विश्लेषकों तक का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, जिसमें इन युवा नेताओं का एक अलग ही और अनदेखा रूप देखने को मिल रहा है।
#बिहार की आधुनिक राजनीति में विंटेज लुक और पुरानी यादों का अनोखा क्रेज
अस्सी का दशक भारतीय सिनेमा, संगीत और फैशन के लिहाज से एक ऐसा स्वर्णिम काल माना जाता है जिसकी छाप आज भी लोगों के दिलों पर गहरी है, और ऐसा लगता है कि बिहार के युवा राजनीतिक चेहरे भी इस जादू से अछूते नहीं हैं। जब हम चिराग पासवान के स्टाइल को देखते हैं, तो उनके पहनावे में एक तरफ जहां आधुनिकता और शालीनता का मेल दिखता है, वहीं दूसरी तरफ उनके कई अंदाज और तौर-तरीके पुराने दौर के एवरग्रीन सुपरस्टार्स की याद दिला देते हैं। दूसरी ओर, रोहिणी आचार्य भी सोशल मीडिया पर अपनी पुरानी यादों से जुड़ी तस्वीरें और पारिवारिक पलों को साझा करते हुए अक्सर उस दौर की सादगी और पारिवारिक मूल्यों को प्राथमिकता देती नजर आती हैं। राजनीति के इस आधुनिक और तेज रफ्तार युग में, जहां हर नेता अपनी पीआर इमेज को चमकाने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाता है, वहीं इन युवा नेताओं का इस तरह से अपनी जड़ों और पुरानी संस्कृति से जुड़ाव दिखाना एक अलग ही संदेश देता है। यह इस बात का प्रमाण है कि भले ही ये नेता आज की जनरेशन-जी या सहस्राब्दी के दौर की राजनीति कर रहे हों, लेकिन इनके संस्कारों और पसंद में अतीत की वो पुरानी खुशबू आज भी जिंदा है जो इन्हें आम जनता के और अधिक करीब ले आती है।
#सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों ने मचाई हलचल, फैंस दे रहे हैं मजेदार प्रतिक्रियाएं
इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में किसी भी राजनेता की कोई भी तस्वीर पलभर में वायरल हो सकती है और इन युवा नेताओं की तस्वीरों ने तो मानों डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तहलका ही मचा दिया है। ट्विटर यानी एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर इन नेताओं के समर्थकों द्वारा लगातार ऐसी तस्वीरें शेयर की जा रही हैं जिनमें वे किसी पुरानी धुन या विंटेज फ्रेम में कैद नजर आ रहे हैं। कोई यूजर चिराग पासवान की उस अदा की तुलना बॉलीवुड के क्लासिक हीरोज से कर रहा है, तो कोई रोहिणी आचार्य के पोस्ट पर अस्सी के दशक के उन पारिवारिक और संघर्ष भरे दिनों को याद कर रहा है। इन तस्वीरों पर आ रहे हजारों लाइक्स और कमेंट्स इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि बिहार की जनता केवल चुनावी मुद्दों पर ही बात नहीं करती, बल्कि अपने चहेते नेताओं की पर्सनल लाइफ और उनके इस तरह के अनूठे अंदाज को भी उतनी ही शिद्दत से पसंद करती है। राजनीतिक दलों के आईटी सेल भी इस ट्रेंड को भुनाने में पीछे नहीं हैं और लगातार ऐसी गैलरी तैयार कर रहे हैं जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहे और डिजिटल एंगेजमेंट को तेजी से बढ़ा सके।
#राजनीति से परे नेताओं का यह मानवीय और सांस्कृतिक पहलू जनता को क्यों आ रहा है पसंद
आम तौर पर जनता राजनेताओं को कड़े तेवर, रैलियों में नारेबाजी और एक-दूसरे पर राजनीतिक छींटाकशी करते हुए देखने की आदी हो चुकी है, ऐसे में जब उनका कोई अलग और मानवीय रूप सामने आता है, तो वह लोगों के दिलों को आसानी से छू लेता है। चिराग पासवान और रोहिणी आचार्य जैसे युवा नेता जब अपनी इन विंटेज और अनौपचारिक तस्वीरों के जरिए सामने आते हैं, तो वे यह साबित करते हैं कि राजनीति की इस चकाचौंध के पीछे वे भी आम इंसानों की तरह ही अपनी पुरानी यादों, संस्कृति और जीवन के छोटे-छोटे पलों का आनंद लेना जानते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की छवियां राजनीतिज्ञों को जनता के बीच और अधिक स्वीकार्य और सुलभ बनाती हैं, क्योंकि वोटर किसी भी नेता में सिर्फ एक राजनेता नहीं बल्कि अपने जैसे ही किसी इंसान की छवि तलाशता है। आने वाले समय में जैसे-जैसे राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ेगी, इन नेताओं की ये स्टाइल और पुरानी यादों से जुड़े किस्से निश्चित रूप से चुनावी बयार में एक हल्के-फुल्के मनोरंजन और गहरे जुड़ाव का काम करते रहेंगे, जिससे यह साबित होता है कि राजनीति और संस्कृति का यह मेल हमेशा प्रासंगिक बना रहेगा।
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