‘चंदा चोरी, पेपर लीक और E20 पेट्रोल से जनता को लूट रही सरकार…’ बदायूं में गरजे अखिलेश यादव, सेट किया यूपी चुनाव का असली एजेंडा

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट के बीच राजनीतिक पारा चढ़ने लगा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बदायूं में आयोजित एक जनसभा में सत्ताधारी सरकार पर अब तक का सबसे तीखा और सीधा हमला बोला है। अपने चिर-परिचित अंदाज में अखिलेश ने जनता की नब्ज पकड़ते हुए ‘चंदा चोरी’, ‘पेपर लीक’ और पेट्रोल में ‘E20’ की मिलावट जैसे ज्वलंत मुद्दों को उठाया। उनका यह बयान साफ तौर पर यह संकेत दे रहा है कि आगामी यूपी चुनावों में समाजवादी पार्टी किन असल मुद्दों को हथियार बनाकर चुनावी मैदान में उतरने वाली है।

युवाओं के भविष्य और ‘पेपर लीक’ पर सीधा प्रहार

रैली को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने सबसे ज्यादा फोकस उत्तर प्रदेश के युवाओं पर रखा। राज्य में लगातार हो रहे प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक को लेकर उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह सरकार युवाओं को रोजगार देने में पूरी तरह विफल रही है और पेपर लीक कोई हादसा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है ताकि नौजवानों को नौकरी न देनी पड़े। अखिलेश ने साफ कर दिया कि यूपी के युवाओं का छला गया भविष्य आगामी चुनाव में सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा।

E20 पेट्रोल और चंदा चोरी: आम आदमी की जेब पर डाका

अखिलेश यादव ने महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे को ‘E20 पेट्रोल’ और ‘चंदा चोरी’ से जोड़कर एक नया राजनीतिक नैरेटिव सेट कर दिया है। उन्होंने जनता को समझाते हुए कहा कि सरकार E20 (20% इथेनॉल मिलावट) पेट्रोल बेचकर आम आदमी की गाड़ियों का माइलेज कम कर रही है, जो सीधे तौर पर जनता की जेब पर एक छिपा हुआ डाका है। इसके साथ ही, उन्होंने चुनावी चंदे में हुई कथित धांधली को ‘चंदा चोरी’ करार देते हुए सत्ता पक्ष की ईमानदारी और पारदर्शिता के दावों पर कड़ा प्रहार किया।

यूपी चुनाव में क्या होगा समाजवादी पार्टी का मुख्य मुद्दा?

बदायूं की इस हुंकार से अखिलेश ने अपना चुनावी विजन एकदम स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने ऐलान किया कि आने वाले यूपी चुनाव में कोई भी भटकाऊ या ध्रुवीकरण वाला मुद्दा नहीं चलेगा। समाजवादी पार्टी केवल और केवल किसान, नौजवान, रोजगार, महंगाई और भ्रष्टाचार (पेपर लीक और चंदा चोरी) के असल मुद्दों पर जनता के बीच जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि अखिलेश की यह रणनीति सीधे तौर पर आम जनता के रोजमर्रा के दर्द को छू रही है, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है।