घर में टूटे-फूट पुराने जूते-चप्पल रखना बन सकता है कंगाली और वास्तु दोष की बड़ी वजह

भागदौड़ भरी इस आधुनिक जीवनशैली में अक्सर हम कई ऐसी छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं जिनका हमारे मानसिक और भौतिक जीवन पर बहुत गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अक्सर लोग अपने घरों के स्टोर रूम, बालकनी या मुख्य दरवाजे के आसपास पुराने, फटे हुए और इस्तेमाल न किए जाने वाले जूते-चप्पलों का ढेर लगाकर छोड़ देते हैं। वास्तु शास्त्र और सनातन ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, घर में बेकार और खराब जूते-चप्पल रखना केवल गंदगी का कारण ही नहीं बनता, बल्कि यह कई गंभीर वास्तु दोषों को जन्म देता है जिसके कारण घर की सुख-शांति और बरकत पर सीधा बुरा असर पड़ता है। यदि आपके घर में भी बिना काम के पुराने जूतों का कबाड़ इकट्ठा रहता है, तो समय रहते इस आदत को बदल लेना ही आपके और आपके परिवार के भविष्य के लिए बेहद हितकारी साबित हो सकता है।

सनातन वास्तु विज्ञान और ज्योतिष में हमारे शरीर के हर अंग और उपयोग की जाने वाली हर वस्तु का संबंध किसी न किसी ग्रह से जरूर जोड़ा गया है। पैरों को शनि ग्रह का प्रतिनिधित्व करने वाला अंग माना जाता है, क्योंकि पैर हमारे चलने-फिरने, कर्म करने और आगे बढ़ने का माध्यम हैं। यही कारण है कि पैरों में पहने जाने वाले जूते और चप्पलों का सीधा संबंध न्याय के देवता शनि महाराज और छाया ग्रह राहु से होता है। जब कोई व्यक्ति अपने घर में फटे-पुराने, गंदे और उपयोगहीन जूते-चप्पलों को संभालकर या यूं ही बेतरतीब ढंग से फैलाकर रखता है, तो इससे कुंडली में शनि और राहु के अशुभ प्रभाव सक्रिय हो जाते हैं। ज्योतिष आचार्यों का मानना है कि ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में अनावश्यक संघर्ष, आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और बनते हुए कार्यों में बाधाएं आने लगती हैं।

वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार, हमारे घर का मुख्य दरवाजा (Main Entrance) केवल आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि यहीं से सकारात्मक ऊर्जा, मां अन्नपूर्णा और धन की देवी मां लक्ष्मी का प्रवेश होता है। कई घरों के बाहर मुख्य दरवाजे के ठीक सामने या ठीक बगल में लोग अपने गंदे जूते और चप्पलों का ढेर लगा देते हैं। वास्तु जानकारों का कहना है कि मुख्य द्वार पर बिखरे हुए और गंदे जूते-चप्पल नकारात्मक ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित करते हैं और घर में आने वाली सकारात्मक ऊर्जा के मार्ग को रोक देते हैं। जिस घर के मुख्य द्वार पर साफ-सफाई और पवित्रता का ध्यान नहीं रखा जाता, वहां से माता लक्ष्मी नाराज होकर चली जाती हैं और उस घर में हमेशा धन का अभाव तथा कलह का वातावरण बना रहता है।

हर घर में जूते-चप्पल लंबे समय तक इस्तेमाल करने के बाद घिस जाते हैं या फट जाते हैं, लेकिन कई लोगों की आदत होती है कि वे पुरानी यादों या कंजूसी के चक्कर में उन्हें फेंकने के बजाय घर के किसी कोने में छुपाकर रख देते हैं। वास्तु के अनुसार, ऐसे जूते जिनके सोल (तलवे) उखड़ चुके हों, जो पूरी तरह से फट चुके हों, या जिनका इस्तेमाल पिछले कई महीनों से बिल्कुल नहीं किया गया हो, उन्हें घर में एक पल भी नहीं रखना चाहिए। इसके अलावा मृत व्यक्ति के जूते या ऐसे जूते जो किसी दुर्घटना में पहने गए हों, उन्हें घर में रखना अत्यंत अशुभ माना जाता है। इस प्रकार की वस्तुएं घर की ऊर्जा को दूषित करती हैं और परिवार के सदस्यों की तरक्की में रुकावट पैदा करती हैं।

वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत बड़ा महत्व है और यदि गलत दिशा में जूते-चप्पल रखे जाएं तो इसके परिणाम बहुत घातक हो सकते हैं। वास्तु के अनुसार, घर की उत्तर और पूर्व दिशा को देवताओं की दिशा, कुबेर की दिशा और जल तत्व का स्थान माना जाता है। इन पवित्र दिशाओं में कभी भी जूते-चप्पलों की रैक या गंदे जूते नहीं रखने चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से धन के देवता कुबेर कुपित हो जाते हैं और घर में कंगाली छाने लगती है। जूते-चप्पलों को रखने के लिए हमेशा घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा को ही सबसे उचित और अनुकूल माना गया है। इसके अलावा बेडरूम के अंदर पलंग के नीचे कभी भी जूते-चप्पल उतारकर नहीं रखने चाहिए, क्योंकि इससे दांपत्य जीवन में तनाव और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानियां पैदा होने लगती हैं।

यदि आपके घर में भी लंबे समय से पुराने और फटे जूते-चप्पलों का कबाड़ इकट्ठा है और आपको लगता है कि इसके कारण नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, तो बिना किसी देरी के शनिवार के दिन इन सभी बेकार चीजों को घर से बाहर निकालकर किसी कचरे के डिब्बे में फेंक दें या किसी जरूरतमंद को दान कर दें (यदि वे पहनने योग्य हों)। इसके बाद अपने घर के मुख्य द्वार की नियमित रूप से साफ-सफाई करें और रोजाना शाम के समय मुख्य दरवाजे पर एक शुद्ध घी का दीपक जलाएं। घर के पोछे के पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक (Rock Salt) मिलाकर पोंछा लगाने से घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं। इन छोटे-छोटे लेकिन बेहद प्रभावी वास्तु नियमों का पालन करके आप अपने घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मकता और आर्थिक खुशहाली का स्थायी वास सुनिश्चित कर सकते हैं।