News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसके परिणाम केवल तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि दुनिया के सामने खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
संकट की मुख्य वजह: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की नाकेबंदी
28 फरवरी को इजरायल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ लगभग ठप हो गया है। इसके प्रभाव कुछ इस प्रकार हैं:
एनर्जी प्राइस में उछाल: तेल की सप्लाई बाधित होने से शिपिंग कॉस्ट और ईंधन की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी हुई है।
फर्टिलाइजर (उर्वरक) संकट: यह रास्ता खाद के परिवहन के लिए जीवनरेखा है। खाद की डिलीवरी रुकने से सीधे तौर पर फसलों के उत्पादन पर असर पड़ेगा, जिससे अनाज और अन्य खाद्य सामग्रियां महंगी होंगी।
किसे होगा सबसे ज्यादा नुकसान?
IMF के स्ट्रैटेजी डायरेक्टर क्रिश्चियन मुम्सेन ने बताया कि महंगाई की मार सबसे ज्यादा गरीब और विकासशील देशों पर पड़ेगी क्योंकि उनका खर्च का बड़ा हिस्सा भोजन पर होता है:
| देश की श्रेणी | खाने-पीने पर खर्च (कुल आय का %) |
|---|---|
| कम आय वाले देश | 36% |
| उभरती अर्थव्यवस्थाएं | 20% |
| विकसित देश | 9% |
IMF की वित्तीय सहायता और सुझाव
जॉर्जीवा ने वाशिंगटन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए राहत और आर्थिक स्थिरता के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए:
नई मदद की दरकार: आने वाले समय में वित्तीय सहायता की मांग 20 अरब से 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। वर्तमान में IMF के 39 प्रोग्राम चल रहे हैं और एक दर्जन नए देश मदद की कतार में हैं।
केंद्रीय बैंकों को सलाह: ब्याज दरों में जल्दबाजी में बदलाव करने के बजाय ‘वेट एंड वॉच’ (देखो और इंतजार करो) की नीति अपनाएं।
सरकारों को चेतावनी: महंगाई कम करने के नाम पर निर्यात पर पाबंदी (Export Ban) या टैक्स में कटौती जैसे लोकलुभावन कदम न उठाएं, क्योंकि इससे बाजार का संतुलन बिगड़ सकता है।
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