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गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे अपडेट: 8 गांवों में 34 हेक्टेयर जमीन का होगा नया अधिग्रहण, किसानों के खातों में आएगा मुआवजा

उत्तर प्रदेश में पूरब से पश्चिम को सीधा जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने एक्सप्रेसवे के मुख्य मार्ग, ओवरब्रिज (ROB), सर्विस लेन और टोल प्लाजा जैसी सहायक संरचनाओं के निर्माण के लिए अतिरिक्त जमीन जुटाने की तैयारी तेज कर दी है। इस क्रम में सिद्धार्थनगर जिले के 8 चिन्हित गांवों में 34.1015 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। एनएचएआई ने जिला प्रशासन को आधिकारिक पत्र भेजकर जमीन के स्थलीय सत्यापन और सर्वे की कार्रवाई तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया है। इस कदम से जहां एक तरफ परियोजना को गति मिलेगी, वहीं प्रभावित किसानों को तय सरकारी नियमों के तहत उचित मुआवजा मिलने का रास्ता भी साफ हो गया है।

एनएचएआई की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण का पूरा खाका सिद्धार्थनगर जिले की बांसी तहसील के अंतर्गत तैयार किया गया है। एक्सप्रेसवे पर वाहनों के तेज और सुरक्षित आवागमन के लिए टोल प्लाजा, सर्विस रोड और रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के पास अतिरिक्त बफर जोन व तकनीकी स्पेस की दरकार थी। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए बांसी तहसील के आठ प्रमुख गांवों को चिन्हित किया गया है। इन गांवों में महोखवा, बहादुरपुर, भटौली, सोरवामाफी, सुहईकनपुरवा, अक्लोही, परसा और सिरसिया शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि इन गांवों में कुल 34.1015 हेक्टेयर जमीन को अधिग्रहीत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

भूमि अधिग्रहण को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और किसी भी किसान के अधिकारों का हनन न होने देने के लिए विशेष भूमि अध्याप्ति विभाग, संबंधित तहसीलों के लेखपाल और एनएचएआई के तकनीकी अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाई गई है। यह टीम गांव-गांव जाकर गजट में दर्ज गाटा संख्याओं के आधार पर मौके पर पैमाइश और खतौनी का मिलान करेगी। इस स्थलीय वेरिफिकेशन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक भू-स्वामियों (काश्तकारों) की सही पहचान हो सके, ताकि मुआवजे की राशि सीधे उनके बैंक खातों में बिना किसी विवाद या बिचौलियों के ट्रांसफर की जा सके। प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि नापजोख के दौरान किसानों की उपस्थिति और सहमति का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

इस अधिग्रहण से किसानों को दोहरा फायदा मिलने जा रहा है। पहला यह कि भूमि अधिग्रहण कानून के तहत किसानों को ग्रामीण सर्किल रेट के आधार पर तय फार्मूले से कई गुना मुआवजा मिलेगा, जिससे उनके हाथ में बड़ी पूंजी आएगी। दूसरा और सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित बची हुई कृषि भूमि की बाजारू कीमतें कई गुना बढ़ जाएंगी। जिन इलाकों में पहले रास्ते की कमी के चलते जमीनों के दाम कम थे, वहां एक्सप्रेसवे के इंटरचेंज और सर्विस रोड बनते ही ढाबे, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क, पेट्रोल पंप और कॉमर्शियल दुकानें खुलने लगेंगी। इससे किसानों के परिवार के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और नए कारोबार के रास्ते खुलेंगे।

गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे का निर्माण सिद्धार्थनगर जिले में दो चरणों में किया जाना प्रस्तावित है। जिले की सीमा के भीतर इस हाईस्पीड कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 62.25 किलोमीटर होगी। पहले चरण की योजना में बांसी तहसील के 20 गांव, डुमरियागंज तहसील के 28 गांव और इटवा तहसील के 15 गांव शामिल किए गए थे। अब बांसी के इन 8 अतिरिक्त गांवों में जमीन लिए जाने से प्रोजेक्ट का इंफ्रास्ट्रक्चर और अधिक मजबूत होगा। 3-ए (Section 3A) का प्रारंभिक नोटिफिकेशन पहले ही जारी किया जा चुका था, और अब स्थलीय सत्यापन के बाद अवार्ड घोषित करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

प्रस्तावित गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे लगभग 700 से 750 किलोमीटर लंबा 6-लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे है, जो भविष्य में 8 लेन तक विस्तार करने योग्य होगा। यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के करीब 22 जिलों को आपस में सीधे जोड़ेगा। इसके बन जाने के बाद गोरखपुर, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा और श्रावस्ती जैसे तराई व पूर्वांचल के जिले सीधे मुरादाबाद, बरेली, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली और दिल्ली-एनसीआर-हरियाणा सीमा से जुड़ जाएंगे। वर्तमान में गोरखपुर से शामली या पश्चिमी यूपी जाने में 12 से 15 घंटे का लंबा समय लगता है, जो इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद घटकर मात्र 7 से 8 घंटे रह जाएगा।

एक्सप्रेसवे बनने से सबसे बड़ा आर्थिक लाभ तराई क्षेत्र के किसानों और छोटे व्यापारियों को मिलेगा। पूर्वांचल का काला नमक चावल, मौसमी सब्जियां और फल अब कुछ ही घंटों में दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की बड़ी मंडियों तक आसानी से पहुंचाए जा सकेंगे। माल ढुलाई की लागत में कमी आने से स्थानीय कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार भाव मिलेगा। साथ ही, औद्योगिक गलियारे के रूप में विकसित होने के कारण इस पूरे रूट पर नई फैक्ट्रियां और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित होने की प्रबल संभावना है। एनएचएआई का लक्ष्य है कि तय समयसीमा के भीतर भूमि अधिग्रहण की सभी औपचारिकताएं पूरी कर निर्माण कार्य को धरातल पर उतारा जाए।