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गुजरात से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर जमुई पहुंची नाबालिग प्रेमिका और फिल्मी अंदाज में रचाई शादी

प्यार की कोई सरहद नहीं होती और न ही उम्र या दूरी इसके आड़े आती है, इस बात को साबित करती हुई एक बेहद चौंकाने वाली और फिल्मी कहानी इन दिनों बिहार के जमुई जिले से सामने आई है। इस प्रेम प्रसंग की शुरुआत देश के पश्चिमी छोर पर स्थित गुजरात की धरती से हुई, जहां एक नाबालिग लड़की का दिल जमुई जिले के रहने वाले एक युवक पर आ गया। दोनों के बीच फोन पर हुई बातचीत धीरे-धीरे गहरे प्यार में बदल गई और मिलने-मिलाने का सिलसिला शुरू हो गया। जब परिजनों और समाज के पहरे ने उनके इस रिश्ते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, तो उस नाबालिग प्रेमिका ने अपने प्यार को पाने के लिए एक बहुत बड़ा और साहसिक कदम उठाने का फैसला किया। उसने घर की चारदीवारी और तमाम दूरियों की परवाह न करते हुए गुजरात से हजारों किलोमीटर लंबा सफर अकेले ही तय किया और सीधे बिहार के जमुई जा पहुंची। जमुई पहुंचने पर उसके प्रेमी ने उसका बाहें फैलाकर स्वागत किया और स्थानीय स्तर पर मंदिर या अन्य रीति-रिवाजों के अनुसार उसके साथ धूमधाम से शादी रचा ली। उस समय दोनों की प्रेम कहानी किसी परीकथा की तरह लग रही थी, जहां हर बाधा को पार करके दो प्रेमी हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो चुके थे, और उनकी इन खुशियों को देखकर ऐसा लग रहा था कि उनकी दुनिया अब पूरी तरह से आबाद हो चुकी है।

शादी के जश्न के सात दिन भी पूरे नहीं हुए थे कि खुशियों पर लग गया कानून और समाज का भारी ‘ग्रहण’

लेकिन कहते हैं कि हकीकत अक्सर सपनों की दुनिया से बहुत अलग और कठोर होती है, और इस प्रेम कहानी के साथ भी कुछ ऐसा ही दर्दनाक अंत सामने आया। जिस लड़की ने अपनी जिंदगी के सबसे हसीन सपने सजाए थे और सात जन्म तक साथ निभाने की कसमें खाई थीं, उसकी यह नई नवेली खुशियां महज सात दिनों के भीतर ही एक काले ‘ग्रहण’ की तरह बिखर गईं। जैसे ही गुजरात पुलिस और स्थानीय प्रशासन को इस बात की भनक लगी कि एक नाबालिग लड़की अपने घर से भागकर बिहार के जमुई में छिपी हुई है और उसने वहां शादी कर ली है, तो प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। लड़की के परिजनों द्वारा लिखाई गई गुमशुदगी और बहला-फुसलाकर भगा ले जाने की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस एक्शन मोड में आ गई। जमुई स्थानीय पुलिस के सहयोग से बाहर से आई पुलिस टीम ने उस ठिकाने पर छापा मारा जहां यह नया जोड़ा अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने की उम्मीद में रह रहा था। पुलिस की गाड़ी और खाकी वर्दी को देखते ही दोनों के पैरों तले जमीन खिसक गई और वह सात दिन की सुहागिन पल भर में बेबस होकर रोने बिलखने लगी। इस अचानक हुई कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि कानूनी रूप से नाबालिग होने के कारण उस प्रेम प्रसंग की कोई भी मान्यता नहीं थी, और कानून अपनी सख्त प्रक्रिया के तहत अपना काम करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध था।

बाल विवाह और कानूनी पेचीदगियों के बीच उलझकर रह गई प्रेम कहानी, अब आगे क्या होगा?

इस संपूर्ण घटनाक्रम ने एक बार फिर से समाज के सामने बाल विवाह, कानूनी उम्र सीमा और प्रेम प्रसंग से जुड़े कई गंभीर और संवेदनशील सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय कानून के अनुसार जब तक लड़की की उम्र 18 वर्ष पूरी नहीं हो जाती, तब तक उसकी मर्जी से की गई शादी या इस तरह के कदम को कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता, भले ही वे दोनों एक-दूसरे से कितना भी प्रेम क्यों न करते हों। पुलिस ने नाबालिग लड़की को अपने कब्जे में ले लिया है और उसे मेडिकल जांच तथा बयान दर्ज कराने के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके बाद उसे उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, जिस प्रेमी युवक ने सात दिन पहले अपनी महबूबा को अपनी दुल्हन बनाकर घर लाया था, वह अब कानूनी शिकंजे और अपहरण तथा पोक्सो एक्ट जैसी गंभीर धाराओं के कानूनी मामलों में उलझता हुआ नजर आ रहा है। जमुई और गुजरात दोनों ही जगहों पर इस अनोखी और दुखद प्रेम कहानी की चर्चा हर चौराहे पर हो रही है, जहां लोग इस बात पर विचार कर रहे हैं किशोरावस्था में लिए गए बिना सोचे-समझे फैसले किस तरह से पूरी जिंदगी को एक झटके में तबाह कर सकते हैं। यह मामला उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है जो कानून की सीमाओं को लांघकर इस तरह के कदम उठाते हैं, क्योंकि अंततः कानून और सच्चाई की ही जीत होती है और भावनाओं के आगे नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।