खराब पाचन बिगाड़ सकता है आपका मूड और इम्युनिटी: एक्सपर्ट्स से जानें गट हेल्थ कैसे करती है काम और इसे दुरुस्त रखने के आसान उपाय

अक्सर कहा जाता है कि हमारी सेहत की असली चाबी हमारे पेट में छिपी होती है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, जंक फूड का अत्यधिक सेवन, देर रात तक जागना और तनाव के कारण अधिकांश लोग पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी ‘गट हेल्थ’ यानी पेट और आंतों का स्वास्थ्य केवल भोजन पचाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर हमारी इम्युनिटी, मानसिक स्वास्थ्य और ऊर्जा के स्तर पर भी पड़ता है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट्स के अनुसार, यदि हमारी गट सेहतमंद है, तो हमारा पूरा शरीर सुचारू रूप से कार्य करता है। आइए एक्सपर्ट्स से विस्तार से समझते हैं कि हमारी गट हेल्थ वास्तव में कैसे काम करती है और इसे पूरी तरह स्वस्थ रखने के लिए हमें किन जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

क्या होती है गट हेल्थ और यह शरीर में कैसे काम करती है?

सरल शब्दों में समझें तो ‘गट’ का तात्पर्य हमारी पूरी पाचन नली से है, जो मुंह से शुरू होकर पेट और आंतों तक फैली होती है। हमारी आंतों में ट्रिलियन्स (खरबों) की संख्या में सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं, जिन्हें ‘गट माइक्रोबायोम’ कहा जाता है। इनमें गुड बैक्टीरिया (अच्छे जीवाणु) और बैड बैक्टीरिया (बुरे जीवाणु) दोनों शामिल होते हैं। एक स्वस्थ शरीर के लिए इन दोनों प्रकार के बैक्टीरिया के बीच संतुलन बना रहना बेहद आवश्यक है। जब गुड बैक्टीरिया की संख्या अधिक होती है, तो वे भोजन को आसानी से तोड़ते हैं, पोषक तत्वों (न्यूट्रिएंट्स) को अवशोषित करते हैं और शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं।

इसके साथ ही, हमारी गट हेल्थ का सीधा संबंध हमारे दिमाग से होता है, जिसे ‘गट-ब्रेन एक्सिस’ कहा जाता है। शरीर में हैप्पी हार्मोन कहे जाने वाले ‘सेरोटोनिन’ का लगभग 90 प्रतिशत निर्माण हमारी आंतों में ही होता है। यही कारण है कि जब आपका पेट खराब होता है, तो आपका मूड भी चिड़चिड़ा या खराब महसूस होने लगता है। इसके अलावा, हमारे शरीर की लगभग 70 प्रतिशत रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) भी आंतों में मौजूद कोशिकाओं से ही नियंत्रित होती है।

अस्वस्थ गट के लक्षण और इसके पीछे की मुख्य वजहें

जब हमारी आंतों में गुड और बैड बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ने लगता है, तो शरीर कई तरह के संकेत देना शुरू कर देता है। पेट में लगातार गैस बनना, ब्लोटिंग (पेट फूलना), एसिडिटी, कब्ज, दस्त, अत्यधिक थकान महसूस होना और त्वचा पर मुहासे या रैशेज निकलना अस्वस्थ गट के प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा, अचानक वजन बढ़ना या घटना और बिना किसी कारण के मीठा खाने की तीव्र इच्छा होना भी यह दर्शाता है कि आपकी आंतों का स्वास्थ्य ठीक नहीं है।

गट हेल्थ खराब होने के पीछे आज की आधुनिक जीवनशैली सबसे बड़ी जिम्मेदार है। अत्यधिक प्रोसेस्ड और डिब्बाबंद खाना, चीनी का अधिक सेवन, एंटीबायोटिक्स दवाइयों का बार-बार इस्तेमाल, पानी कम पीना, धूम्रपान और अत्यधिक मानसिक तनाव आंतों के गुड बैक्टीरिया को तेजी से नष्ट कर देते हैं। इससे पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है और शरीर बीमारियों का शिकार होने लगता है।

गट हेल्थ को मजबूत बनाने के लिए एक्सपर्ट्स के खास टिप्स

गट हेल्थ को दुरुस्त रखने के लिए अपनी डाइट में प्रीबायोटिक और प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों को प्रमुखता से शामिल करना चाहिए। प्रोबायोटिक्स में दही, छाछ, कांजी और किण्वित (फर्मेंटेड) भोजन जैसे इडली व डोसा शामिल हैं, जो आंतों में सीधे गुड बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं। वहीं, प्रीबायोटिक्स जैसे लहसुन, प्याज, केला, ओट्स और सेब इन बैक्टीरिया को पोषण प्रदान करते हैं। अपने आहार में प्रचुर मात्रा में फाइबर युक्त फल और हरी सब्जियां शामिल करें, ताकि मलत्याग की प्रक्रिया आसान बनी रहे।

इसके साथ ही, दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते रहें। खाना हमेशा चबा-चबाकर और शांत माहौल में खाएं। रात को 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लें और तनाव को कम करने के लिए योग या मेडिटेशन का सहारा लें। यदि आप नियमित रूप से हल्की वॉक या एक्सरसाइज करते हैं, तो इससे आंतों की मांसपेशियों की गतिशीलता बेहतर होती है और पाचन संबंधी समस्याएं हमेशा दूर रहती हैं।