कॉर्पोरेट शोषण का खौफनाक वीडियो: ₹13,000 के वादे पर लड़के को दी सिर्फ ₹3,800 सैलरी, हक मांगने पर महिला HR ने ऑफिस से निकाला!

सोशल मीडिया पर इन दिनों देश की राजधानी दिल्ली की एक कंपनी का एक ऐसा वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर किसी भी संवेदनशील इंसान का खून खौल जाएगा. एक सीधे-साधे और मध्यमवर्गीय कर्मचारी को महीने भर कोल्हू के बैल की तरह खटाने के बाद जब उसकी सैलरी देने की बारी आई, तो कंपनी ने उसके साथ बहुत बड़ा और अमानवीय धोखा कर दिया. लड़के से जॉइनिंग के वक्त ₹13,000 की मंथली सैलरी का लिखित व मौखिक वादा किया गया था, लेकिन जब उसके बैंक अकाउंट में पैसे क्रेडिट होने का मैसेज आया तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई.

उसे पूरे महीने की हाड़-तोड़ मेहनत के बदले केवल ₹3,800 थमा दिए गए थे. इसके बाद जब उस बेबस लड़के ने हिम्मत जुटाई और कंपनी की महिला एचआर (HR) और मैनेजमेंट के सामने खड़े होकर अपने हक के पैसे मांगे, तो वहां मौजूद कॉर्पोरेट अधिकारियों का अहंकार और असंवेदनशील बर्ताव पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो गया.

सोशल मीडिया पर ‘काली करतूत’ का वीडियो वायरल: दफ्तर के अंदर जब गूंजी हक की आवाज

इंटरनेट पर तहलका मचा रहे इस वीडियो में दिल्ली की एक प्राइवेट फर्म की काली करतूत साफ देखी जा सकती है. इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर किसी ने चुपके से रिकॉर्ड कर शेयर किया है. वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि पीड़ित लड़का कंपनी के दफ्तर के अंदर बेहद लाचार लेकिन गुस्से में खड़ा है. वह सीधे मैनेजमेंट के केबिन के बाहर अपनी कटी हुई सैलरी को लेकर तीखे सवाल कर रहा है. लड़के के चेहरे पर पूरे महीने की थकान और अपने हक के पैसे छिन जाने का गहरा दर्द और बेबसी साफ दिखाई दे रही है, जो किसी को भी भावुक कर दे.

वादे से मुकरी कंपनी: मेहनत की कमाई पर चलाया कैंची, मिले सिर्फ 3,800 रुपये

पीड़ित कर्मचारी का आरोप है कि जब उसने कंपनी जॉइन की थी, तब एचआर डिपार्टमेंट ने उसे आश्वस्त किया था कि उसे हर महीने ₹13,000 इन-हैंड सैलरी दी जाएगी. इस भरोसे के बाद उसने पूरे महीने बिना किसी छुट्टी के ईमानदारी से दफ्तर का सारा काम निपटाया. लेकिन महीने के अंत में जब सैलरी ट्रांसफर हुई, तो उसके होश उड़ गए.

उसके खाते में कुल रकम का आधा हिस्सा भी नहीं, बल्कि सिर्फ ₹3,800 ट्रांसफर किए गए थे. इतनी कम रकम देखकर लड़का बिना डरे सीधा कंपनी के बड़े अधिकारियों और एचआर के केबिन के पास पहुंच गया और उनसे अपनी बची हुई पूरी सैलरी रिलीज करने की मांग करने लगा.

महिला HR का शर्मनाक रवैया: जवाब देने के बजाय कर्मचारी को दी दफ्तर से धक्के मारने की धमकी

वीडियो में सबसे ज्यादा हैरान और विचलित करने वाली बात कंपनी के सीनियर मैनेजमेंट और वहां कुर्सी पर बैठी महिला एचआर का अड़ियल रवैया है. जब लड़का लगातार शांति से अपनी कटी हुई सैलरी का वैध कारण और सैलरी स्लिप मांग रहा था, तो वहां बैठी महिला एचआर उसकी बात का सीधा जवाब देने के बजाय फोन में व्यस्त होने का नाटक करते हुए उसे टालने की कोशिश कर रही थी.

वीडियो में लड़का बार-बार कहता सुनाई दे रहा है कि ‘मैडम, मेरी पूरी सैलरी क्यों नहीं आई? मैंने क्या काम नहीं किया?’ लेकिन सामने से उसे कोई नियम या हिसाब नहीं बताया जाता, बल्कि कंपनी के अन्य पुरुष कर्मचारी उस पर ही उल्टा चिल्लाने लगते हैं, उसे तमीज सिखाने की बात करते हैं और उसे तुरंत ऑफिस परिसर से बाहर चले जाने के लिए कहते हैं.

‘पैसे नहीं मारने दूंगा…’ बेबस कर्मचारी ने दफ्तर के अंदर ही लगा दी मैनेजमेंट की क्लास

सैलरी कटने से नाराज और आर्थिक संकट से घिरे कर्मचारी ने कॉर्पोरेट के इस तानाशाही रवैये के आगे हार नहीं मानी. उसने दफ्तर के सन्नाटे को चीरते हुए पूरे मैनेजमेंट की क्लास लगा दी. उसने वहां मौजूद सभी कर्मचारियों के सामने तेज आवाज में कहा कि उसने पूरे महीने खून-पसीना एक किया है और कोई भी कंपनी इस तरह उसकी गाढ़ी कमाई के पैसे नहीं मार सकती.

लड़के ने रोआंसे होकर साफ कहा, “इतनी कम सैलरी में दिल्ली जैसे शहर में मेरा गुजारा कैसे होगा? मैं मकान मालिक को किराया कहां से दूंगा?” वह बार-बार कंपनी के लोगों से लिखित हिसाब मांग रहा था कि आखिर किस आधार पर उसकी सैलरी से ₹9,000 से ज्यादा की कटौती की गई है.

इंटरनेट पर भड़का यूज़र्स का गुस्सा: श्रम विभाग से कंपनी का लाइसेंस रद्द करने की मांग

यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. लोग इस वीडियो को ‘कॉर्पोरेट मजदूरी और शोषण’ का सबसे बड़ा उदाहरण बताते हुए जमकर रीपोस्ट कर रहे हैं और दिल्ली पुलिस व श्रम मंत्रालय (Ministry of Labour) से इस कंपनी के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई और एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग कर रहे हैं.

हजारों यूजर्स ने कमेंट करते हुए लिखा कि यह सीधे तौर पर छोटे और मासूम कर्मचारियों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न है. वहीं, कई लोगों ने कहा कि ऐसी फर्जी कंपनियों का लाइसेंस तुरंत रद्द होना चाहिए और लेबर डिपार्टमेंट को औचक निरीक्षण करना चाहिए ताकि भविष्य में किसी और गरीब कर्मचारी के पेट पर लात न मारी जा सके.