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कॉरपोरेट नौकरी छोड़ी, बैग उठाया और दुनिया घूमने निकलीं: अब एक ट्रिप से कमाती हैं लाखों रुपये; 26 साल की लड़की ने ट्रैवल के शौक को बना डाला करोड़ों का बिजनेस

नई दिल्ली। आज के दौर में जहां लाखों युवा 9 से 5 की बंधी-बंधाई कॉरपोरेट नौकरी, भारी ट्रैफिक और ऑफिस के वर्क प्रेशर के बीच अपनी जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं, वहीं कुछ युवा ऐसे भी हैं जो लीक से हटकर अपने सपनों को हकीकत में बदलने का साहस दिखाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है 26 वर्षीय एक युवती की, जिसने एक अच्छी-खासी सैलरी वाली कॉर्पोरेट डेस्क जॉब से इस्तीफा देकर अपना बैग पैक किया और दुनिया की सैर पर निकल पड़ी। शुरुआती दिनों में परिवार और दोस्तों ने इसे एक जोखिम भरा और गैर-जिम्मेदाराना फैसला बताया, लेकिन अपनी मेहनत, रणनीतिक सोच और सोशल मीडिया की ताकत के दम पर इस युवा आंत्रप्रेन्योर ने अपने घूमने के शौक (Wanderlust) को ही एक फुल-टाइम और बेहद मुनाफेदार बिजनेस एंपायर में तब्दील कर दिया है। आज वह केवल एक ही इंटरनेशनल या डोमेस्टिक क्यूरेटेड ट्रिप से लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं।

जब अधिकांश लोग छुट्टियों के लिए महीनों तक अपनी छुट्टियों (Leaves) और बजट का हिसाब लगाते हैं, तब इस 26 वर्षीय युवती का पूरा जीवन ही एक खूबसूरत सफर बन चुका है। उन्होंने न केवल भारत के कोने-कोने—लद्दाख की बर्फीली वादियों से लेकर केरल के बैकवाटर्स तक—की यात्रा की, बल्कि वियतनाम, बाली, जॉर्जिया और यूरोप जैसे अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशंस पर भी भारतीय मुसाफिरों के लिए खास टूर पैकेज तैयार किए। आइए जानते हैं कि कैसे एक साधारण सोलो ट्रैवलर ने आधुनिक दौर में ट्रैवल इन्फ्लुएंसिंग और टूर क्यूरेशन का एक सफल सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल खड़ा कर दिया।

कॉलेज खत्म करने के बाद युवती ने एक मल्टीनेशनल कंपनी में बतौर डिजिटल मार्केटर अपने करियर की शुरुआत की थी। सैलरी अच्छी थी, लेकिन हर दिन स्क्रीन के सामने बैठकर वही रूटीन दोहराना उन्हें अंदर से खाली कर रहा था। उन्हें वीकेंड्स पर नई जगहों की खोज करने, स्थानीय लोगों से मिलने और अलग-अलग संस्कृतियों को कैमरे में कैद करने का गहरा शौक था।

सैलरी से कुछ पैसे बचाकर उन्होंने पहले कुछ घरेलू सोलो ट्रिप्स कीं। यात्राओं के दौरान उन्होंने देखा कि भारत में खासकर महिलाएं, युवा प्रोफेशनल्स और सोलो ट्रैवलर्स दुनिया घूमना तो चाहते हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षा, सटीक प्लानिंग और समान विचारधारा वाले सह-यात्रियों (Like-minded Travelers) की कमी खलती है। इसी गैप को उन्होंने एक बड़े व्यावसायिक अवसर के रूप में पहचाना। 24 साल की उम्र में उन्होंने अपनी नौकरी से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया और पूरी तरह से ट्रैवल इंडस्ट्री में कूदने का साहसिक फैसला लिया।

सिर्फ घूमना कोई बिजनेस नहीं होता; इसे कमाई में बदलने के लिए उन्होंने एक सुनियोजित मल्टी-स्ट्रीम रेवेन्यू मॉडल (Multi-stream Revenue Model) तैयार किया। उनकी मुख्य कमाई के चार मजबूत स्तंभ इस प्रकार हैं:

  1. क्यूरेटेड ग्रुप ट्रिप्स (Boutique & Community Trips): यह उनकी कमाई का सबसे बड़ा जरिया है। वह 10 से 15 लोगों के छोटे-छोटे ग्रुप्स के लिए ‘एक्सपीरियंसियल ट्रैवल’ डिजाइन करती हैं। इनमें आम टूरिस्ट पैकेज की तरह सिर्फ दर्शनीय स्थलों को देखना नहीं, बल्कि लोकल होमस्टे, ट्रेकिंग, लोकल फूड टेस्टिंग और फोटोग्राफी वर्कशॉप्स शामिल होती हैं। एक 7 से 10 दिन के इंटरनेशनल ट्रिप से सभी खर्चे निकालकर वह आसानी से ₹2 लाख से ₹4 लाख तक का नेट प्रॉफिट कमा लेती हैं।

  2. सोलो फीमेल ट्रैवल कम्युनिटी: उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं के लिए सुरक्षित और सशक्त बनाने वाले ऑल-विमेन ग्रुप टूर्स शुरू किए। इससे उन कामकाजी महिलाओं और कॉलेज छात्राओं का बड़ा भरोसा जीता, जो अकेले यात्रा करने से झिझकती थीं।

  3. ब्रांड कोलैबोरेशंस और स्पॉन्सरशिप्स: इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर उनके रियल और सिनेमैटिक ट्रैवल रील्स ने लाखों फॉलोअर्स बटोरे। आज नामी हॉस्पिटैलिटी चेन्स, लगेज ब्रांड्स, एक्शन कैमरा मेकर्स और एयरलाइंस अपने प्रचार के लिए उनके साथ पेड पार्टनरशिप करती हैं।

  4. डिजिटल ट्रैवल गाइड्स और कंसल्टेंसी: वह अपनी वेबसाइट पर कस्टमाइज्ड आइटिनरेरी (यात्रा कार्यक्रम) और ई-बुक्स बेचती हैं। इसके अलावा, जो लोग बिना टूर पैकेज के खुद यात्रा करना चाहते हैं, उन्हें वन-ऑन-वन ट्रैवल कंसल्टेशन देकर फीस चार्ज करती हैं।

इस मुकाम तक पहुंचना किसी के लिए भी आसान नहीं होता। युवती बताती हैं कि शुरुआती एक साल उनके लिए बेहद कठिन था:

  • वित्तीय अनिश्चितता: नौकरी छोड़ने के शुरुआती छह महीनों तक कोई नियमित आय नहीं थी और बचत का पैसा भी तेजी से खत्म हो रहा था।

  • क्लाइंट्स का अविश्वास: 24-25 साल की उम्र में किसी टूर ऑपरेटर के रूप में लोगों का भरोसा जीतना बहुत मुश्किल था। शुरुआत में उन्होंने नो-प्रॉफिट-नो-लॉस पर अपने दोस्तों और परिचितों को ले जाकर ट्रिप्स आयोजित कीं।

  • लॉजिस्टिक्स और आपातकालीन प्रबंधन: विदेश में फ्लाइट डिले, वीजा संबंधी जटिलताएं और स्वास्थ्य समस्याओं से निपटना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे उन्होंने ग्राउंड पार्टनर्स के साथ मजबूत टाइ-अप करके सुलझाया।

आज यह 26 वर्षीय युवा आंत्रप्रेन्योर न केवल आर्थिक रूप से पूरी तरह स्वतंत्र हैं, बल्कि उन्होंने कई लोकल टूर गाइड्स, ड्राइवरों और होमस्टे मालिकों को भी नियमित रोजगार उपलब्ध कराया है।

उनका मानना है कि आज का इंटरनेट और सोशल मीडिया युग हर उस व्यक्ति को अपना सपना पूरा करने का मंच देता है जिसके पास कोई अनूठा हुनर और दृढ़ इच्छाशक्ति है। उनका कहना है कि नौकरी छोड़ना कोई अंधाधुंध फैसला नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके लिए कम से कम 6 महीने का इमरजेंसी फंड और एक स्पष्ट बिजनेस प्लान पहले से तैयार होना चाहिए। उनकी यह कामयाबी साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो आपके पैर जहां-जहां पड़ेंगे, वहीं से आपकी सफलता की राह निकल पड़ेगी।