केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का बड़ा खुलासा: कौन हैं असल में ‘दिमागी नक्सली’? जानें पीएम मोदी के बयान की पूरी सच्चाई और 3 मुख्य पहचान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण के बाद देश की सियासत में भूचाल सा आ गया है, जहां विपक्ष लगातार कई तरह के सवाल उठा रहा था। इसी बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सामने आकर तमाम अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया है और स्थिति को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह साफ किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऐतिहासिक स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान देश के किसी भी विपक्षी नेता को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था, बल्कि उनके इस बयान का मकसद कुछ और था जिसे विपक्ष के एक धड़े द्वारा गलत तरीके से पेश किया जा रहा था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम और अन्य विपक्षी दिग्गजों की तीखी प्रतिक्रियाओं के बाद सरकार की तरफ से यह आधिकारिक और स्पष्ट सफाई आई है, जिससे यह साफ हो गया है कि इस वैचारिक बहस की असली जड़ें कहां तक फैली हुई हैं। देश की आंतरिक सुरक्षा और वैचारिक एकता से जुड़े इस अहम मुद्दे पर सरकार ने दो टूक शब्दों में अपनी स्थिति देश के सामने रख दी है, जिससे राजनीति के गलियारों में हलचल और ज्यादा तेज हो गई है।

पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण के बाद क्यों गरमाई सियासत

देश ने जब अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश की आंतरिक सुरक्षा में आई ऐतिहासिक सफलताओं का जिक्र किया था। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने उन तमाम वीर सुरक्षाकर्मियों के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धापूर्वक याद किया जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर देश से उग्रवाद और आतंकवाद को मिटाने का काम किया है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से हथियारबंद नक्सलियों के सफल खात्मे पर देश की जनता को बधाई दी और यह विश्वास दिलाया कि सरकार देश की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हालांकि, इसी भाषण के दौरान उन्होंने देशवासियों को एक बहुत गहरी चेतावनी भी दी थी कि भले ही जंगलों में बंदूक उठाकर हिंसा फैलाने वाले नक्सली अब लगभग समाप्त हो चुके हैं, लेकिन वैचारिक रूप से सक्रिय ‘दिमागी नक्सल’ अभी भी चुपचाप मौके की तलाश में बैठे हुए हैं। प्रधानमंत्री का यह बयान आते ही राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर बहस छिड़ गई कि आखिर इस वैचारिक श्रेणी में कौन-कौन लोग शामिल हैं, जिसके बाद विपक्ष के कई नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं और सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ किए भ्रम, बताई ‘दिमागी नक्सलियों’ की तीन बड़ी पहचान

विपक्ष के लगातार हमलों और बयानों के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मोर्चा संभाला और सोशल मीडिया के माध्यम से विस्तार से यह समझाया कि प्रधानमंत्री के बयान का वास्तविक अर्थ क्या था। रिजिजू ने अपने पोस्ट में उन तीन स्पष्ट बिंदुओं का जिक्र किया जिनसे यह साफ होता है कि ‘दिमागी नक्सली’ वास्तव में कौन लोग हैं। सबसे पहली श्रेणी में वे लोग आते हैं जो खुले तौर पर खूंखार माओवादियों का समर्थन करते हैं और देश के सर्वोच्च कानून यानी भारतीय संविधान को पूरी तरह से अस्वीकार करते हैं। दूसरी श्रेणी के तहत वे तत्व आते हैं जो देश विरोधी अलगाववादियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं और जम्मू-कश्मीर से हटाए जा चुके अनुच्छेद 370 का आज भी समर्थन करते हैं। इसके अलावा तीसरी और सबसे खतरनाक श्रेणी में वे लोग शामिल हैं जो भारत के सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील उत्तर-पूर्व हिस्से को देश के बाकी राज्यों से हमेशा के लिए अलग करने की साजिश रचते हैं और ‘चिकन्स नेक’ यानी मुर्गे की गर्दन को काटने जैसी देश विरोधी बातें करते हैं। किरेन रिजिजू के इस बेबाक बयान ने यह साफ कर दिया है कि सरकार की नजर उन तमाम वैचारिक और छिपे हुए खतरों पर पूरी तरह से बनी हुई है जो देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।