किडनी या ब्रेन अनशन या लंबी भूख से सबसे पहले कौन सा अंग होता है खराब? जानिए शरीर पर इसका खतरनाक असर

जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक अन्न-जल त्याग देता है या आम भाषा में कहें तो अनशन पर बैठ जाता है, तो उसके शरीर के भीतर एक बहुत ही जटिल जैविक जंग छिड़ जाती है। सोशल मीडिया से लेकर आम चर्चाओं में अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि लगातार भूखे रहने या अनशन करने की स्थिति में शरीर के कौन से महत्वपूर्ण अंगों पर सबसे पहले और सबसे घातक असर पड़ता है। क्या अनशन के दौरान इंसान का दिमाग यानी ब्रेन सबसे पहले जवाब देता है या फिर खून को साफ करने वाली किडनी पर सबसे बड़ा संकट मंडराता है? यदि आप भी यह वैज्ञानिक और मेडिकल सच जानना चाहते हैं कि लंबी भूख या उपवास का हमारे शरीर और अंगों पर क्या असर पड़ता है, तो इस पूरी रिपोर्ट को विस्तार से समझिए।

अनशन के शुरुआती दिनों में शरीर कैसे संभालता है खुद को

जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक कुछ नहीं खाता है, तो हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म जीवित रहने के लिए एक अनोखी आपातकालीन प्रक्रिया शुरू कर देता है। शुरुआत के 24 से 48 घंटों तक शरीर लिवर में पहले से जमा ग्लाइकोजन को तोड़कर ऊर्जा हासिल करता है। इस दौरान ब्लड शुगर का स्तर गिरने लगता है और कमजोरी महसूस होने लगती है। लेकिन असली संकट तब शुरू होता है जब शरीर का यह आंतरिक रिजर्व पूरी तरह खत्म हो जाता है और वह ऊर्जा के लिए मांसपेशियों और फैट को तोड़ना शुरू करता है। इस पूरी प्रक्रिया में शरीर के तमाम अंगों को सुचारू रूप से चलाने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ने लगता है।

किडनी और ब्रेन में से सबसे पहले कौन सा अंग होता है प्रभावित

मेडिकल साइंस और नेफ्रोलॉजिस्ट्स के अनुसार, लंबी भूख या अनशन के दौरान सबसे गंभीर और तेज असर हमारी किडनी पर पड़ता है। जब शरीर में पानी और फ्लूइड की भारी कमी हो जाती है, तो ब्लड प्रेशर तेजी से गिरने लगता है और किडनी तक खून का संचार पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता। खून की कमी के कारण किडनी धीरे-धीरे काम करना बंद कर सकती है, जिसे मेडिकल भाषा में एक्यूट किडनी इंजरी कहा जाता है। इसके साथ ही, चूंकि हमारे ब्रेन यानी मस्तिष्क को सुचारू रूप से काम करने के लिए ग्लूकोज और ऑक्सीजन की निरंतर आपूर्ति की आवश्यकता होती है, इसलिए डिहाइड्रेशन और ग्लूकोज की कमी के कारण ब्रेन फंक्शन भी गंभीर रूप से प्रभावित होने लगता है, जिससे व्यक्ति को चक्कर आना, भ्रम होना या बेहोशी छा सकती है।

लंबे समय तक भूखा रहना शरीर के लिए क्यों है जानलेवा

अनशन या लंबी भूख का असर केवल किसी एक अंग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह धीरे-धीरे पूरे मल्टी-ऑर्गन सिस्टम को फेल करने की ताकत रखता है। जब शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, तो वह अपनी बुनियादी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने ही ऊतकों को खाने लगता है, जिससे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और दिल की धड़कनें अनियमित हो जाती हैं। डॉक्टरों का यह स्पष्ट मानना है कि लंबे समय तक उपवास या अनशन करना शरीर की सहनशक्ति की अंतिम सीमा को पार कर देता है, जिससे स्वास्थ्य को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ हमेशा यही सलाह देते हैं कि बिना किसी चिकित्सकीय देखरेख के लंबे उपवास या अनशन जैसे कदम उठाना जान के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।