काशी में गंगा भक्ति में लीन हुए एयर चीफ मार्शल एपी सिंह: दशाश्वमेध घाट पर पत्नी संग की दिव्य महाआरती

भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह अपनी वाराणसी यात्रा के दौरान काशी के आध्यात्मिक रंगों में पूरी तरह रंगे नजर आए। रविवार की शाम उन्होंने अपनी धर्मपत्नी और भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के दल के साथ मोक्षदायिनी मां गंगा के पावन तट पर पहुंचकर विश्व प्रसिद्ध भव्य गंगा आरती में सहभागिता की। काशी की प्राचीन धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक छटा के बीच जब वैदिक ऋचाओं के सस्वर पाठ और शंखनाद के साथ गंगा आरती का शुभारंभ हुआ, तब वायुसेना प्रमुख हाथ जोड़कर पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से मां भागीरथी की वंदना करते दिखाई दिए। देश की सुरक्षा व्यवस्था के शीर्ष सेनापति को इस पावन अवसर पर एक सामान्य श्रद्धालु की भांति हाथ में पूजा की थाल लिए और मां गंगा की आराधना में लीन देखकर घाट पर मौजूद हजारों श्रद्धालु और पर्यटक भी अभिभूत हो गए। दशाश्वमेध घाट वाराणसी Click to open side panel for more informationपर मुख्य आरती से पूर्व वायुसेना प्रमुख और उनकी धर्मपत्नी ने पवित्र गंगा जल का आचमन किया और वैदिक ब्राह्मणों के निर्देशन में संपूर्ण शास्त्रीय विधि-विधान के साथ मां गंगा का षोडशोपचार पूजन व अभिषेक संपन्न किया। इस दौरान विद्वान पुरोहितों द्वारा उच्चारित स्वास्तिवाचन, शांति पाठ और देवी गंगा के स्तोत्रों से संपूर्ण गंगा तट गूंज उठा। पूजन उपरांत दशाश्वमेध घाट पर भव्य आरती का नियमित आयोजन करने वाली संस्था गंगा सेवा निधि के पदाधिकारियों द्वारा एयर चीफ मार्शल का गर्मजोशी से स्वागत व अभिनंदन किया गया। संस्था की ओर से उन्हें पारंपरिक बनारसी रेशमी अंगवस्त्र, प्रसाद और स्मृति चिह्न के रूप में मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया गया। वायुसेना प्रमुख ने इस आतिथ्य सत्कार के लिए आयोजकों का आभार जताया।

मां गंगा की अलौकिक महाआरती के साक्षी बनने के बाद एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपने इस पावन अनुभव को शब्दों में पिरोया। गंगा सेवा निधि की आधिकारिक विजिटर बुक में अपने अनुभव दर्ज करते हुए उन्होंने लिखा कि मां गंगा के इस दिव्य तट पर आकर इस अलौकिक और अद्भुत पल का साक्षी बनना जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव है। उन्होंने इस पावन परंपरा को अनवरत और इतने अनुशासित ढंग से आगे बढ़ाने के लिए आयोजकों, ब्राह्मणों और सेवा निधि के सभी कार्यकर्ताओं को हृदय से साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि काशी की यह पवित्र भूमि और मां गंगा का तट मानसिक शांति और असीम सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जो राष्ट्र सेवा में समर्पित प्रत्येक नागरिक और सैनिक को नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने की आध्यात्मिक प्रेरणा देता है।

दशाश्वमेध घाट पर लगभग एक घंटे तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान सुरक्षा के बेहद कड़े और चाक-चौबंद प्रबंध किए गए थे। वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस, जल पुलिस और स्थानीय प्रशासन के आला अफसर सुरक्षा घेरे में मुस्तैद रहे। घाट की सीढ़ियों से लेकर नदी में खड़ी नौकाओं तक उपस्थित हजारों देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने भी भारत माता की जय और हर-हर महादेव के गगनभेदी जयघोष के साथ वायुसेना प्रमुख की उपस्थिति का अभिनंदन किया।

संध्या कालीन गंगा आरती से पूर्व रविवार की अलसुबह एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने काशी की विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक सुबह का प्रत्यक्ष अनुभव किया। वे भोर की पहली किरण के साथ वाराणसी के दक्षिणी छोर पर स्थित सांस्कृतिक केंद्र पहुंचे।

अस्सी घाट वाराणसी Click to open side panel for more informationपर प्रतिदिन आयोजित होने वाले ऐतिहासिक ‘सुबह-ए-बनारस’ कार्यक्रम में शामिल होकर उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा और सुरों की सरिता का भरपूर आनंद उठाया। गंगा की लहरों से आती शीतल बयार के बीच जब प्रख्यात कलाकारों ने वाद्य वृंद की सम्मिलित प्रस्तुति दी, तो वायुसेना प्रमुख सहित उपस्थित सभी संगीत प्रेमी मंत्रमुग्ध हो गए।

इस प्रातःकालीन सांस्कृतिक सभा में काशी के शीर्ष संगीत साधकों ने अपने सुरों से समां बांध दिया। तबले पर पंडित किशोर मिश्र की थाप, सितार पर बुधादित्य प्रधान के मधुर तारों की झंकार, सारंगी पर अनीश मिश्र के शास्त्रीय सुर और बांसुरी पर नीष ग्यावली के सम्मोहक रागों ने मिलकर एक दिव्य संगीत का ताना-बाना बुना। कलाकारों की इस जुगलबंदी ने सुबह के वातावरण में आध्यात्मिक चेतना का संचार कर दिया। इस प्रतिष्ठित संगीत सभा का कुशल और गरिमामय मंच संचालन प्रसिद्ध उद्घोषक डॉ. प्रीतेश आचार्य द्वारा किया गया। वायुसेना प्रमुख ने कार्यक्रम के समापन पर सभी संगीत साधकों की कला की मुक्तकंठ से सराहना की और कहा कि काशी की सुबह का संगीत भारत की आत्मा और उसकी अमर सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।