उद्धव ठाकरे की बैठक से 3 सांसद अचानक गायब, महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की आहट से मातोश्री में खलबली

महाराष्ट्र के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। मुंबई स्थित शिवसेना (UBT) के मुख्यालय में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक से पार्टी के 3 नवनिर्वाचित लोकसभा सांसद अचानक नदारद रहे। राज्य में विधानसभा चुनावों की नजदीकी और महायुति खेमे में चल रही अंदरूनी हलचल के बीच सांसदों की इस रहस्यमयी गैरहाजिरी ने मातोश्री (उद्धव ठाकरे के आवास) की धड़कनें तेज कर दी हैं। सियासी पंडितों का मानना है कि इस घटनाक्रम के पीछे महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर किसी बड़े खेल यानी ‘ऑपरेशन टाइगर’ की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है।

एन वक्त पर सांसदों के फोन बंद होने से गहराया सस्पेंस

सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने आगामी राजनीतिक रणनीति, सीट शेयरिंग और जमीनी तैयारियों की समीक्षा के लिए अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की यह इमरजेंसी बैठक बुलाई थी। बैठक शुरू होने से ऐन पहले जब अनुपस्थित सांसदों से संपर्क साधने की कोशिश की गई, तो उनके फोन नॉट रीचेबल या बंद पाए गए। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि इन सांसदों ने खराब मौसम या पूर्व निर्धारित घरेलू कार्यक्रमों की वजह से अनुपस्थित रहने की अग्रिम सूचना दी थी, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस दलील को आसानी से पचाया नहीं जा रहा है।

क्या ‘ऑपरेशन टाइगर’ के जाल में फंस रहे हैं उद्धव के सिपहसालार

महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ सालों में हुए बड़े दलबदल को देखते हुए शिवसेना (UBT) का खेमा बेहद सतर्क और डरा हुआ है। कयास लगाए जा रहे हैं कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन (बीजेपी, एकनाथ शिंदे गुट और अजीत पवार गुट) के रणनीतिकारों ने विपक्ष को कमजोर करने के लिए बैकस्टेज ‘ऑपरेशन टाइगर’ एक्टिव कर दिया है। इसके तहत विपक्षी सांसदों और कद्दावर नेताओं को पाला बदलने या निष्पक्ष रहने के लिए मनाने की कोशिशें की जा रही हैं। यदि ये 3 सांसद कोई बड़ा फैसला लेते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए लोकसभा चुनाव के बाद मिलने वाले बूस्ट के बाद एक बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है।

संजय राउत डैमेज कंट्रोल में जुटे, मातोश्री में बैठकों का दौर शुरू

सांसदों के गायब होने की खबर फैलते ही शिवसेना (UBT) के संकटमोचक और राज्यसभा सांसद संजय राउत तुरंत डैमेज कंट्रोल मोड में आ गए हैं। उन्होंने मीडिया के सामने आकर किसी भी तरह की नाराजगी या बगावत की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। संजय राउत ने दावा किया कि पार्टी के सभी सांसद और विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में मजबूती से खड़े हैं। इस बीच, मातोश्री के अंदर पार्टी के बचे हुए वरिष्ठ नेताओं और कानूनी सलाहकारों की एक सीक्रेट मीटिंग शुरू हो गई है ताकि किसी भी तरह की आपातकालीन राजनीतिक स्थिति से निपटा जा सके।

दिल्ली से मुंबई तक तेज हुई गठबंधन की सियासी घेराबंदी

इस घटनाक्रम का असर सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है। महाविकास अघाड़ी (MVA) के घटक दलों, कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी (SP) ने भी इस पूरे मामले पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं। विपक्ष को डर है कि आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले अगर सांसदों के पाला बदलने की खबरें सच साबित होती हैं, तो इसका सीधा असर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ेगा। बहरहाल, अगले 24 से 48 घंटे महाराष्ट्र की भावी राजनीति की दिशा तय करने के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।