
राजधानी लखनऊ की आउटर रिंग रोड (किसान पथ), अयोध्या रोड और सुलतानपुर रोड पर रोजाना सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों और श्रद्धालुओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अयोध्या और सुलतानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रैफिक के भारी दबाव को नियंत्रित करने के लिए तीन नए फोरलेन अंडरपास और किसान पथ के दोनों तरफ 22 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड बनाने का मेगा प्रोजेक्ट तैयार किया है। करीब ₹240 करोड़ की इस संशोधित परियोजना की तकनीकी फाइल अंतिम वित्तीय स्वीकृति के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय को भेज दी गई है। अफसरों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 के प्रथम सप्ताह तक इस बजट को हरी झंडी मिल जाएगी, जिसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू कर निर्माण कार्य को तेजी से धरातल पर उतारा जाएगा।
शुरुआत में जब एनएचएआई ने इस अंडरपास परियोजना का खाका तैयार किया था, तब इसकी कुल अनुमानित लागत लगभग ₹100 करोड़ तय की गई थी। हालांकि, पिछले डेढ़ साल में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम के दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों की भारी आमद के चलते इस पूरे रूट पर वाहनों का दबाव तेजी से बढ़ा है। एनएचएआई के इंजीनियरिंग विंग ने साइट सर्वे के बाद पाया कि केवल अंडरपास बना देने से जाम पूरी तरह खत्म नहीं होगा, बल्कि मुख्य मार्गों से वाहनों को सुगमता से मोड़ने के लिए दोनों तरफ चौड़ी एप्रोच रोड और तकनीकी इंटरसेक्शन का निर्माण भी जरूरी है। अंडरपास की संशोधित डिजाइन में एप्रोच रोड, सुरक्षित इंटरसेक्शन और 22 किलोमीटर लंबी चौड़ी सर्विस रोड को शामिल किए जाने के कारण इस परियोजना की लागत बढ़कर ₹240 करोड़ पहुंच गई है।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत कुल तीन फोरलेन अंडरपास बनाए जाएंगे। इनमें से दो अंडरपास अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रस्तावित हैं, जबकि एक अंडरपास सुलतानपुर रोड पर जलसा रिसॉर्ट और कार शोरूम के समीप बनाया जाएगा। प्रस्तावित अंडरपास लगभग 100 मीटर लंबे और आधुनिक फोरलेन क्षमता वाले होंगे। यह अंडरपास गोयल हाइट्स और उसके आसपास के प्रमुख चौराहों पर दोनों ओर से आने वाले ट्रैफिक को निर्बाध गति प्रदान करेंगे। सड़क के दोनों किनारों पर वैज्ञानिक तरीके से इंटरसेक्शन विकसित किए जाएंगे, जिससे मुख्य कैरिजवे पर तेज गति से चलने वाले वाहनों को अचानक ब्रेक लगाने या खतरनाक यू-टर्न लेने से बचाया जा सके।
लखनऊ आउटर रिंग रोड और किसान पथ इस समय पूरे उत्तर भारत के लॉजिस्टिक्स और यात्री आवागमन का मुख्य केंद्र बन चुके हैं। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे कॉरिडोर पर रोजाना 60 हजार से अधिक हल्के और भारी कमर्शियल वाहन गुजर रहे हैं। बख्शी का तालाब (BKT), सीतापुर रोड, हरदोई रोड और कानपुर रोड से आने वाले जो वाहन अयोध्या, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे या वाराणसी की तरफ जाते हैं, वे किसान पथ का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में बीकेटी की तरफ से आने वाले वाहनों को जब अयोध्या रोड या सुलतानपुर रोड की तरफ यू-टर्न लेना पड़ता है, तो लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है। 100 मीटर लंबे फोरलेन अंडरपास के बन जाने के बाद बीकेटी और सुलतानपुर की ओर से आने वाला ट्रैफिक बिना मुख्य सड़क को बाधित किए अंडरपास के नीचे से सुरक्षित यू-टर्न ले सकेगा।
इस ₹240 करोड़ की परियोजना का दूसरा सबसे अहम हिस्सा किसान पथ के किनारे बनने वाली 22 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड है। यह सर्विस रोड अयोध्या रोड से लेकर सुलतानपुर रोड के बीच 3.5 मीटर चौड़ाई में तैयार की जाएगी। एनएचएआई अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सर्विस रोड के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण पहले ही किया जा चुका है, इसलिए निर्माण कार्य में जमीन की कोई अड़चन नहीं आएगी। वर्तमान में किसान पथ से सटे दर्जनों ग्रामीण इलाकों और नई आवासीय कॉलोनियों के पास मुख्य हाईवे पर सुरक्षित रूप से चढ़ने-उतरने का कोई सीधा मार्ग नहीं था। इस 22 किमी लंबी सर्विस लेन के बन जाने से स्थानीय ग्रामीणों, किसानों, स्कूली बसों और दोपहिया वाहनों को हाईवे के तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा।
इस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका इंजीनियरिंग डिजाइन है। एनएचएआई ने अंडरपास और एप्रोच रोड का लेआउट इस तरह से तैयार किया है कि किसी भी निजी जमीन, आवासीय मकान, दुकान या बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान (कार शोरूम इत्यादि) को तोड़े जाने या नए सिरे से भारी भूमि अधिग्रहण करने की आवश्यकता नहीं होगी। उपलब्ध सरकारी भूमि और पहले से अधिग्रहीत राइट ऑफ वे (ROW) के भीतर ही पूरे स्ट्रक्चर को समायोजित किया गया है। इससे परियोजना किसी अदालती विवाद या मुआवजे के पचड़े में नहीं फंसेगी और काम बिना किसी कानूनी रुकावट के तय गति से आगे बढ़ सकेगा।
एनएचएआई ने इस मेगा प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए स्पष्ट और चरणबद्ध टाइमलाइन तय की है। परियोजना के अनुसार, किसान पथ के किनारे 22 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का निर्माण कार्य दिसंबर 2027 तक पूरी तरह संपन्न कर लिया जाएगा। वहीं, अयोध्या और सुलतानपुर रोड पर बनने वाले तीनों फोरलेन अंडरपास, उनकी एप्रोच रोड और कनेक्टिंग इंटरसेक्शंस का पूरा सिविल वर्क जून 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वित्त मंत्रालय से दशहरे से पहले हरी झंडी मिलते ही टेंडर आवंटित कर निर्माण एजेंसियों को साइट पर उतार दिया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद लखनऊ के प्रवेश और निकास द्वारों पर लगने वाले घंटों के जाम से जनता को स्थायी रूप से आजादी मिल जाएगी।
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