
दुनिया भर में मंडरा रहे युद्ध के बादलों और अमेरिका-ईरान के बीच चरम पर पहुंचे खतरनाक सैन्य तनाव के बीच एक बेहद डराने वाली और बड़ी खबर सामने आई है। वाशिंगटन स्थित अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के सबसे सुरक्षित मुख्यालय ‘पेंटागन’ (Pentagon) के भीतर गुरुवार को अचानक एक बड़ा सुरक्षा अलर्ट (Security Alert) जारी होने से चारों तरफ भारी अफरा-तफरी और हड़कंप मच गया। एक संभावित और अज्ञात खतरे को भांपते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत एक्शन मोड में आते हुए इस विशाल इमारत की कई संवेदनशील मंजिलों (फ्लोर्स) को पूरी तरह सील कर दिया और वहां काम कर रहे सैकड़ों अधिकारियों और सैन्य कर्मचारियों को आनन-फानन में बाहर सुरक्षित निकाला। सीएनएन (CNN) और वरिष्ठ अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, पेंटागन के सबसे हाई-टेक आंतरिक सुरक्षा और निगरानी प्रणालियों ने अचानक एक बड़ी तकनीकी समस्या को पकड़ा था, जिसके बाद बिना एक पल गंवाए यह आपातकालीन कदम उठाया गया।
हवा में जहर घुलने का लगा डर, पेंटागन में आनन-फानन में लागू करना पड़ा ‘शेल्टर इन प्लेस’ प्रोटोकॉल
इस बेहद संवेदनशील घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने वैश्विक मीडिया को बताया कि मुख्यालय की आंतरिक निगरानी प्रणालियों ने अचानक एक ऐसी संदिग्ध समस्या का संकेत दिया था, जिसके लिए तुरंत और बेहद कड़े एहतियाती कदम उठाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी था। सुरक्षा बलों ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से ‘शेल्टर इन प्लेस’ (उसी स्थान पर सुरक्षित रहने) समेत सभी शीर्ष मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल को लागू कर दिया। पेंटागन की सुरक्षा टीम द्वारा कर्मचारियों को भेजे गए एक अत्यंत गोपनीय और आपातकालीन संदेश में साफ तौर पर बताया गया कि इमारत के भीतर अचानक वायु गुणवत्ता (एयर क्वालिटी) में किसी खतरनाक समस्या या संदिग्ध पदार्थ का पता चला है, जिसकी सघन जांच की जा रही है। इस खतरनाक रासायनिक या जैविक हमले की आशंका के चलते खतरनाक पदार्थों से निपटने वाली (Hazmat) विशेष रेस्क्यू टीमें और कई बड़ी सुरक्षा एजेंसियों के बचावकर्मी पेंटागन के केंद्रीय प्रांगण में तैनात कर दिए गए। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने कर्मचारियों को शांत रखने के लिए इसे एक सामान्य सुरक्षा अभ्यास मानने का भी अनुरोध किया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को ‘आज रात’ महा-हमले की सख्त चेतावनी से हिला मिडिल ईस्ट
पेंटागन के भीतर यह खौफनाक सुरक्षा अलर्ट ठीक उस समय आया है, जब दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच का सैन्य गतिरोध अपने इतिहास के सबसे खतरनाक और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना से ठीक कुछ समय पहले दुनिया के सामने एक बेहद आक्रामक बयान देते हुए खुली चेतावनी दी थी कि अमेरिकी सेना ‘आज रात’ ही ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा और भीषण सैन्य हमला करने जा रही है। ट्रंप ने साफ लहजे में कहा था कि इस महा-हमले का मुख्य उद्देश्य निकट भविष्य में ईरान के पूरे तेल और गैस उद्योगों को तबाह करना और रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले ‘खार्ग द्वीप’ पर अमेरिकी सेना का पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना है। राष्ट्रपति के इस परमाणु युद्ध जैसे बयान के तुरंत बाद ही पेंटागन की सुरक्षा व्यवस्था का अचानक ठप होना कई बड़े अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रों की तरफ इशारा कर रहा है।
खाड़ी देशों में लगातार दूसरे दिन भीषण गोलाबारी, अमेरिका और ईरान के बीच आर-पार की जंग शुरू
वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस सप्ताह मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में लगातार तीसरे दिन हुए भयानक जवाबी हमलों ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को हिलाकर रख दिया है। खाड़ी क्षेत्र में पहले शुरू हुआ ईरान और इजराइल का खूनी संघर्ष अब पूरी तरह से अमेरिका बनाम ईरान के सीधे युद्ध में तब्दील हो चुका है। दोनों महाशक्तियों के बीच लगातार दूसरे दिन मिसाइलों और रॉकेटों का भीषण वार-पलटवार जारी है। ईरान समर्थित ताकतों और ईरानी सेना ने मिडिल ईस्ट के उन सभी खाड़ी देशों को सीधे तौर पर निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जहां-जहां अमेरिका के बड़े और रणनीतिक सैन्य अड्डे मौजूद हैं। इस चौतरफा गोलाबारी के बीच पेंटागन में अचानक एयर क्वालिटी और सुरक्षा अलर्ट का आना किसी बड़े साइबर या रासायनिक हमले का हिस्सा हो सकता है, जिसकी जांच में अमेरिका की तमाम खुफिया एजेंसियां जुटी हुई हैं।
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