
विशेष रिपोर्टर, अमरोहा/बिजनौर: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच धार्मिक पर्यटन, व्यापार और आवागमन को एक नई और सुपरफास्ट रफ्तार देने के लिए प्रस्तावित ‘अमरोहा-हरिद्वार एक्सप्रेसवे’ (Amroha-Haridwar Expressway) परियोजना ने अपनी गति पकड़ ली है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और जिला प्रशासन द्वारा भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अमरोहा जिले के 52 गांवों के लगभग 800 किसानों की जमीनों के गाटा (भूमि खसरा संख्या) राजस्व रिकॉर्ड में ‘लॉक’ (Freeze) कर दिए गए हैं। इसके साथ ही, प्रभावित किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे का सटीक आकलन (Compensation Valuation) करने के लिए जिला प्रशासन और एनएचएआई की संयुक्त टीमों ने धरातल पर सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
गाटा संख्या लॉक होने का सीधा मतलब यह है कि अब इन चिन्हित जमीनों की खरीद-फरोख्त (बैनामा), रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज या स्वरूप परिवर्तन (कृषि से व्यावसायिक) पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इस प्रशासनिक कदम से जहां एक्सप्रेसवे के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है, वहीं प्रभावित किसानों के दिलों की धड़कनें भी तेज हो गई हैं कि उन्हें अपनी जमीन का कितना मुआवजा मिलेगा।
क्या है अमरोहा-हरिद्वार एक्सप्रेसवे परियोजना? एक नज़र में समझें
अमरोहा-हरिद्वार एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र को सीधे देवभूमि उत्तराखंड के पवित्र धार्मिक स्थल हरिद्वार से जोड़ने वाला एक महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड/ब्राउनफील्ड फोरलेन एक्सप्रेसवे कॉरिडोर है।
| मुख्य बिंदु | विस्तृत विवरण |
| परियोजना का नाम | अमरोहा-हरिद्वार फोरलेन एक्सप्रेसवे |
| लाभान्वित राज्य | उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड |
| मुख्य जिले | अमरोहा, बिजनौर और हरिद्वार |
| प्रभावित गांव (अमरोहा) | 52 गांव |
| प्रभावित किसान (अमरोहा) | लगभग 800 से अधिक भूस्वामी |
| वर्तमान स्थिति | गाटा लॉकिंग पूरी, मुआवजा सर्वे और मूल्यांकन जारी |
52 गांवों की जमीनों के गाटा क्यों किए गए लॉक? प्रशासनिक प्रक्रिया समझें
राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जब भी किसी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट (जैसे हाईवे या एक्सप्रेसवे) के लिए भूमि अधिग्रहण की गजट अधिसूचना (3A व 3D) जारी होती है, तो भू-माफियाओं और बिचौलियों द्वारा जमीनों के दाम कृत्रिम रूप से बढ़ाने या गलत तरीके से मुआवजा ऐंठने की कोशिश की जाती है।
इसे रोकने के लिए तहसील और निबंधन कार्यालय (Registry Office) के सॉफ्टवेयर में चिन्हित 52 गांवों के 800 किसानों की गाटा संख्याओं को ब्लॉक/लॉक कर दिया गया है।
गाटा लॉक होने से क्या प्रभाव पड़ेगा?
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इन चिन्हित खसरा संख्याओं पर अब कोई भी व्यक्ति खरीद-बिक्री या रजिस्ट्री नहीं कर सकेगा।
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जमीन पर किसी भी प्रकार का नया निर्माण (मकान, बाउंड्री वॉल या दुकान) करने पर मुआवजा नहीं मिलेगा।
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बैंक से इन जमीनों पर नया केसीसी (KCC) या बंधक लोन जारी नहीं होगा।
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केवल वही किसान मुआवजे के हकदार होंगे जिनका नाम गाटा लॉकिंग के समय सरकारी खतौनी में दर्ज है।
मुआवजे के लिए सर्वे शुरू: किस आधार पर तय होगी जमीन की कीमत?
गाटा लॉक होने के तुरंत बाद एनएचएआई (NHAI), राजस्व विभाग (तहसीलदार व लेखपाल) और पीडब्ल्यूडी (PWD) की संयुक्त टीमों ने खेतों में जाकर पैमाइश और परिसंपत्तियों का सर्वे शुरू कर दिया है।
सर्वे के दौरान किन-किन चीजों का मूल्यांकन किया जा रहा है?
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जमीन का रकबा (Area): किसान के स्वामित्व वाली कुल कृषि भूमि में से एक्सप्रेसवे में अधिग्रहित होने वाली जमीन का सटीक क्षेत्रफल।
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सड़क किनारे की स्थिति (Circle Rate): जमीन नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे, लिंक रोड या गांव के अंदरूनी हिस्से में स्थित है या नहीं, इसके आधार पर सर्किल रेट तय होगा।
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पेड़ और फसलें (Trees & Crops): खेत में खड़े फलदार (आम, लिचिया, अमरूद आदि) व गैर-फलदार (सागौन, पॉपलर, यूकेलिप्टस आदि) पेड़ों की गिनती की जा रही है।
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बोरवेल और इंफ्रास्ट्रक्चर: खेत में लगे ट्यूबवेल, समरसेबल, बाउंड्री वॉल, पक्के निर्माण या मकानों का अलग से मूल्यांकन करके मुआवजा राशि जोड़ी जाएगी।
मुआवजे का नियम: ‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013’ (LARR Act 2013) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में अधिग्रहित जमीनों के सर्किल रेट का 4 गुना (या 2 से 4 गुना सोलेशियम सहित) तक मुआवजा देने का प्रावधान है। शहरी या अर्द्ध-शहरी सीमा में आने वाली जमीनों पर सर्किल रेट का दोगुना मुआवजा दिया जाएगा।
अमरोहा से हरिद्वार का सफर होगा आसान: क्या होंगे बड़े फायदे?
वर्तमान में अमरोहा से गजरौला, धनौरा, बिजनौर और नजीबाबाद होते हुए हरिद्वार जाने में श्रद्धालुओं और यात्रियों को संकरी सड़कों, रेलवे क्रॉसिंग और शहर के ट्रैफिक जाम के कारण 4 से 5 घंटे का समय लग जाता है।
एक्सप्रेसवे बनने के बाद मिलने वाले 4 बड़े लाभ:
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समय की भारी बचत: नया एक्सप्रेसवे बनने के बाद अमरोहा से हरिद्वार का सफर महज 1.5 से 2 घंटे में पूरा हो जाएगा।
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कांवर यात्रा और श्रद्धालुओं को सुगमता: सावन के महीने में हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटने वाले लाखों शिवभक्तों और कांवड़ियों को एक सुरक्षित और समर्पित मार्ग मिलेगा, जिससे पुराने दिल्ली-लखनऊ और बिजनौर-मेरठ हाईवे पर ट्रैफिक जाम नहीं लगेगा।
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किसानों और कृषि व्यापार को बढ़ावा: अमरोहा और बिजनौर के गन्ना, आम, सब्जी और डेयरी उत्पादक किसान अपने उत्पादों को उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर की बड़ी मंडियों तक आसानी से पहुंचा सकेंगे।
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औद्योगिक विकास: एक्सप्रेसवे के किनारे नए लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस और सर्विस स्टेशन स्थापित होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
आगे का रोडमैप: कब तक मिलेगा किसानों को मुआवजा?
जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, सर्वे और परिसंपत्तियों के मूल्यांकन का काम अगले 30 से 45 दिनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद एनएचएआई द्वारा मुआवजा राशि (Compensation Award) घोषित की जाएगी।
किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे मुआवजा राशि भेजी जाएगी। मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित भूमि का कब्ज़ा एनएचएआई को सौंप दिया जाएगा और सड़क निर्माण का कार्य धरातल पर शुरू हो जाएगा।
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे सर्वे टीमों का सहयोग करें और अपने भूमि संबंधी मूल दस्तावेज (खतौनी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक और पैन कार्ड) तैयार रखें ताकि मुआवजा मिलने में कोई अड़चन न आए।
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