अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस

बिहार की सियासत में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर बाहुबली नेता अनंत सिंह और उनके परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जनता दल यूनाइटेड (JDU) और सत्तारूढ़ गठबंधन ने अनंत सिंह के राजनीतिक साम्राज्य पर एक और बड़ा प्रहार किया है। बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने अनंत सिंह की पत्नी और मोकामा से विधायक नीलम देवी को उनका पटना स्थित पटना हाइकोर्ट के पास वाला आलीशान सरकारी बंगला तुरंत खाली करने का आधिकारिक नोटिस थमा दिया है। हाल ही में नीलम देवी से बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का पद और राज्यमंत्री का दर्जा छीने जाने के बाद, JDU नीत सरकार का यह लगातार तीसरा बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक एक्शन माना जा रहा है। सरकार के इस सख्त फैसले से बिहार के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है, जबकि मोकामा से लेकर पटना तक अनंत सिंह के समर्थकों में गहरा सन्नाटा और मायूसी का माहौल देखा जा रहा है।

पटना के पॉश इलाके में स्थित यह वीआईपी सरकारी बंगला नीलम देवी को उनके राजनीतिक कद और तत्कालीन संवैधानिक जिम्मेदारियों के तहत आवंटित किया गया था। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में जेडीयू शीर्ष नेतृत्व और अनंत सिंह के कुनबे के बीच बढ़ी राजनीतिक दूरियों और सत्ता समीकरणों में आए बदलाव के बाद सरकार का रुख सख्त हो गया है। भवन निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जारी इस नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि नीलम देवी अब उस निर्धारित श्रेणी की हकदार नहीं हैं जिसके तहत उन्हें यह श्रेणी-A का वीआईपी आवास आवंटित किया गया था। नियमानुसार, नोटिस की मियाद पूरी होते ही उन्हें बंगला खाली करके चाबी विभाग को सौंपनी होगी। यदि ऐसा नहीं होता है, तो प्रशासन द्वारा कानूनी प्रक्रिया के तहत बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।

बिहार की राजनीति में यह कोई पहली बार नहीं है जब सत्ताधारी दल ने अपने ही पुराने सहयोगियों पर इस तरह का कड़ा शिकंजा कसा हो। कुछ ही समय पहले सरकार ने नीलम देवी को दिए गए राज्यमंत्री के दर्जे को निरस्त कर दिया था और उसके बाद उनसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी वापस ले ली थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोकामा और आसपास के इलाकों में स्थानीय निकाय चुनावों, आगामी संगठनात्मक फैसलों और पार्टी लाइन से हटकर दिए गए कुछ बयानों के कारण जेडीयू आलाकमान अनंत सिंह परिवार से काफी नाराज चल रहा था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी रणनीतिकारों ने साफ संदेश दे दिया है कि पार्टी में अनुशासनहीनता और अपनी समानांतर सत्ता चलाने की कोशिश करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उनका राजनीतिक वजूद कितना भी बड़ा क्यों न हो।

सरकारी बंगला खाली कराने के इस नोटिस के बाद बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और अन्य विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम करने का आरोप लगाया है। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि जब तक कोई नेता सरकार की हां में हां मिलाता है, तब तक उसे तमाम सुख-सुविधाएं दी जाती हैं, लेकिन जैसे ही वह अपने अधिकार और जनता की आवाज उठाता है, तो उसके खिलाफ प्रशासनिक तंत्र को लगा दिया जाता है। दूसरी ओर, जेडीयू के प्रवक्ताओं ने विपक्ष के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। सरकारी नियमों के तहत जो सुविधाएं पद से जुड़ी होती हैं, पद न रहने पर उन्हें वापस लेना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसमें कोई राजनीतिक द्वेष नहीं है।

एक समय बिहार की राजनीति में निर्दलीय लड़कर भी प्रचंड जीत दर्ज करने वाले अनंत सिंह के लिए यह दौर काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ जहाँ वे कानूनी दांव-पेचों से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जेडीयू के इस हैट्रिक एक्शन ने उनके राजनीतिक आधार को बड़ा झटका दिया है। सरकारी बंगला खाली करने के नोटिस के बाद अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि नीलम देवी और अनंत सिंह का अगला राजनीतिक कदम क्या होता है। क्या वे सरकार के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देंगे या फिर आगामी चुनावों से पहले किसी नए राजनीतिक दल का दामन थामकर जेडीयू को खुली चुनौती देंगे? पटना के सियासी गलियारों में इस बात को लेकर कयासबाजी का दौर शुरू हो गया है और आने वाले दिनों में यह विवाद और ज्यादा तूल पकड़ सकता है।