
विशेष स्वास्थ्य एवं मेडिकल रिपोर्टर: महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में ओवेरियन कैंसर (Ovarian Cancer) यानी अंडाशय का कैंसर एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील विषय है। भारत सहित दुनिया भर में महिलाओं में होने वाले कैंसरों में यह पांचवां सबसे आम और घातक कैंसर माना जाता है। चिकित्सा जगत में ओवेरियन कैंसर को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ (Silent Killer) की संज्ञा दी जाती है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य और साधारण होते हैं कि अधिकांश महिलाएं इन्हें गैस, एसिडिटी, अपच, वजन बढ़ने या उम्र के सामान्य बदलाव मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। नतीजतन, लगभग 70 से 80 प्रतिशत मामलों में इस बीमारी का पता तीसरी या चौथी स्टेज में जाकर चलता है, जब कैंसर अंडाशय से निकलकर शरीर के अन्य अंगों में फैल चुका होता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और कैंसर रोग विशेषज्ञों (Oncologists) का मानना है कि यदि महिलाएं अपने शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों के प्रति जागरूक रहें और शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लें, तो ओवेरियन कैंसर का इलाज और मरीज की जीवन प्रत्याशा (Survival Rate) काफी हद तक बढ़ सकती है। आइए जानते हैं उन 5 आम दिखने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जो असल में अंडाशय के कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
1. लगातार पेट का फूलना और ब्लोटिंग (Persistent Abdominal Bloating)
खान-पान में गड़बड़ी के कारण कभी-कभी पेट फूलना या गैस बनना सामान्य बात है। लेकिन अगर आपको लगातार पेट में भारीपन, सूजन या ब्लोटिंग की शिकायत बनी रहती है और यह समस्या 2 से 3 हफ्तों तक ठीक नहीं हो रही है, तो इसे हल्के में न लें। ओवेरियन कैंसर के शुरुआती दौर में पेट के भीतर तरल पदार्थ जमा होने लगता है (जिसे एसाइटिस कहा जाता है) या ट्यूमर के बढ़ने से पेट के अंदर दबाव बनता है, जिससे पेट फूला हुआ और सख्त महसूस होता है।
2. थोड़ा सा खाते ही पेट भर जाना या भूख में कमी (Feeling Full Quickly or Loss of Appetite)
यदि आपको अचानक ऐसा महसूस होने लगे कि थोड़ा सा भोजन करते ही आपका पेट पूरी तरह भर गया है या आपको खाने की इच्छा ही नहीं हो रही है, तो यह अंडाशय के कैंसर का एक प्रमुख लक्षण हो सकता है। जब अंडाशय में ट्यूमर का आकार बढ़ता है, तो वह पेट और पाचन तंत्र की नसों पर दबाव डालता है। इसके कारण पेट में जगह कम होने जैसा महसूस होता है और महिला को थोड़ा सा खाना खाने के बाद भी बहुत ज्यादा पेट भरा हुआ महसूस होने लगता है।
3. पेल्विक और पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द (Persistent Pelvic or Abdominal Pain)
महिलाओं में मासिक धर्म (Periods) या कमर दर्द के दौरान पेट के निचले हिस्से में ऐंठन होना आम है। हालांकि, अगर आपको पेल्विक क्षेत्र (नाभि के नीचे का हिस्सा), पेट के निचले हिस्से या कमर में लगातार ऐसा दर्द बना हुआ है जो पीरियड खत्म होने के बाद भी ठीक नहीं होता, तो यह चिंता का विषय है। यह दर्द ऐंठन, भारीपन या दबाव जैसा महसूस हो सकता है और समय के साथ बढ़ता चला जाता है।
4. बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होना (Frequent Urination and Urgency)
बिना अधिक पानी पिए या बिना किसी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) के अगर आपको दिन भर में बार-बार पेशाब जाने की तीव्र इच्छा होती है या यूरिन रोकने में कठिनाई महसूस होती है, तो यह ओवेरियन ट्यूमर का संकेत हो सकता है। महिला के शरीर में अंडाशय मूत्राशय (Bladder) के बेहद करीब स्थित होता है। जब अंडाशय में कोई सिस्ट या कैंसर ग्रस्त गांठ विकसित होती है, तो वह मूत्राशय पर दबाव डालती है, जिससे महिला को बार-बार वॉशरूम जाना पड़ता है।
5. आंतों की आदतों में बदलाव और अत्यधिक थकान (Changes in Bowel Habits & Fatigue)
बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक कब्ज (Constipation) होना, दस्त की समस्या रहना या आंतों की सामान्य कार्यप्रणाली में बदलाव आना भी ओवेरियन कैंसर से जुड़ा हो सकता है। इसके अलावा, अगर आप पूरी नींद लेने और संतुलित आहार के बावजूद दिन भर अत्यधिक शारीरिक व मानसिक थकान महसूस करती हैं और वजन अचानक बिना किसी कोशिश के कम या ज्यादा हो रहा है, तो यह शरीर के भीतर चल रही किसी बड़ी गड़बड़ी का इशारा है।
क्यों ओवेरियन कैंसर के लक्षणों को पहचानना है मुश्किल? जानिए किन मेडिकल टेस्ट्स और जीवनशैली में बदलाव से हो सकता है समय पर बचाव!
इन लक्षणों को इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) या एसिडिटी न समझें
ओवेरियन कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण काफी हद तक इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS), एसिडिटी, गैस्ट्राइटिस या यूटीआई से मिलते-जुलते हैं। अधिकांश महिलाएं महीनों तक गैस की दवाइयां या पाचक सिरप लेती रहती हैं, जिससे सही डायग्नोसिस में देरी हो जाती है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, यदि ऊपर बताए गए 5 लक्षणों में से कोई भी लक्षण एक महीने में 12 से अधिक बार उभरे या लगातार 2-3 सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो महिला को तुरंत किसी विशेषज्ञ गाइनकोलॉजिस्ट या ऑन्कोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए।
किन महिलाओं को होता है अधिक खतरा? (Risk Factors)
ओवेरियन कैंसर किसी भी उम्र की महिला को हो सकता है, लेकिन कुछ विशेष स्थितियों में इसका जोखिम काफी बढ़ जाता है:
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उम्र: 50 वर्ष से अधिक उम्र की और मेनोपॉज (मासिक धर्म बंद होने) के दौर से गुजर रही महिलाओं में इसका खतरा अधिक होता है।
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पारिवारिक इतिहास (Family History): यदि परिवार में मां, बहन या मौसी को स्तन कैंसर (Breast Cancer) या ओवेरियन कैंसर रहा हो।
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जेनेटिक म्यूटेशन: शरीर में BRCA1 या BRCA2 जैसे जींस में म्यूटेशन होना।
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एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis): इस बीमारी से पीड़ित महिलाओं में भी अंडाशय के कैंसर का जोखिम तुलनात्मक रूप से ज्यादा देखा गया है।
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मातृत्व और स्तनपान: जिन महिलाओं ने कभी गर्भधारण नहीं किया हो या देर से मां बनी हों, उनमें जोखिम थोड़ा अधिक होता है।
निदान और जांच के मुख्य तरीके (Diagnosis Methods)
यदि डॉक्टर को ओवेरियन कैंसर का संदेह होता है, तो वे निम्नलिखित जांच कराने की सलाह देते हैं:
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ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड (TVUS): इसके जरिए अंडाशय में किसी भी प्रकार की गांठ, सिस्ट या ट्यूमर के आकार और बनावट का स्पष्ट पता लगाया जाता है।
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CA-125 ब्लड टेस्ट: यह एक कैंसर मार्कर ब्लड टेस्ट है। शरीर में ओवेरियन कैंसर होने पर रक्त में CA-125 प्रोटीन का स्तर बढ़ जाता है।
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सीटी स्कैन या एमआरआई (CT Scan/MRI): कैंसर के फैलाव और सटीक स्थिति को समझने के लिए पेल्विक और एब्डोमिनल स्कैन किया जाता है।
निष्कर्ष:
अंडाशय का कैंसर बेशक एक गंभीर बीमारी है, लेकिन सतर्कता और जागरूकता ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी हथियार है। महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले मामूली बदलावों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वर्ष में कम से कम एक बार नियमित गायनेकोलॉजिकल चेकअप (Routine Health Checkup) करवाएं और कोई भी लक्षण लंबे समय तक टिके रहने पर बिना संकोच के डॉक्टर की सलाह लें।
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