
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। धान की पैदावार बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से जिले में ‘उत्तर प्रदेश एग्री’ (UP AGRI) योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। इस योजना के तहत न केवल उन्नत बीजों का वितरण किया जाएगा, बल्कि आधुनिक खेती की तकनीकों से भी किसानों को लैस किया जाएगा।
क्या है ‘उत्तर प्रदेश एग्री’ योजना?
यह राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसे विश्व बैंक (World Bank) की सहायता से चलाया जा रहा है। इसका मुख्य लक्ष्य कृषि उत्पादकता में सुधार करना और बाजार की जरूरतों के अनुसार फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना है। गोरखपुर में इस योजना के जरिए धान की उन किस्मों पर जोर दिया जा रहा है, जो कम पानी में अधिक पैदावार देती हैं और बीमारियों के प्रति सहनशील हैं।
योजना के मुख्य आकर्षण और लाभ
सरकार इस योजना के माध्यम से किसानों को कई स्तरों पर सहायता प्रदान कर रही है:
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उन्नत बीज और खाद: किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले धान के बीज और उर्वरकों पर भारी सब्सिडी दी जा रही है।
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तकनीकी प्रशिक्षण: कृषि विभाग के विशेषज्ञ गांवों में जाकर किसानों को ‘सीधी बुवाई’ (DSR) और श्री विधि (SRI) जैसी तकनीकों के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
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मशीनीकरण को बढ़ावा: खेती की लागत कम करने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटरों के जरिए आधुनिक कृषि यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
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मार्केट लिंकेज: किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए स्थानीय मंडियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है।
गोरखपुर के किसानों के लिए सुनहरा मौका
गोरखपुर जिला अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण धान की खेती के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। ‘यूपी एग्री’ योजना के आने से यहां के किसानों को पारंपरिक खेती के बजाय वैज्ञानिक खेती की ओर मुड़ने का मौका मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि इस योजना के पूर्ण क्रियान्वयन से धान की प्रति हेक्टेयर पैदावार में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
ऐसे उठाएं योजना का लाभ
इस योजना से जुड़ने के लिए किसानों को कृषि विभाग के पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य है। पंजीकरण के बाद, पात्रता के आधार पर किसानों को लाभ सीधे उनके बैंक खातों (DBT) के माध्यम से हस्तांतरित किया जाएगा। स्थानीय कृषि रक्षा इकाइयों और विकास खंड कार्यालयों पर जाकर भी इसकी विस्तृत जानकारी ली जा सकती है।
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