News India Live, Digital Desk: नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देश की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। भले ही हाल के घटनाक्रमों के बाद लोकसभा में महिला आरक्षण बिल की राह में कुछ तकनीकी अड़चनें दिख रही हों, लेकिन सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है कि साल 2029 के आम चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलना लगभग तय है। सरकार एक विशेष रणनीति के तहत इस दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे विपक्ष के चक्रव्यूह के बावजूद ‘आधी आबादी’ को उनका हक मिलना संभव हो जाएगा।
लोकसभा की बाधा के बावजूद कैसे लागू होगा आरक्षण?
संसदीय गलियारों में चर्चा है कि अगर बिल को लेकर सदन में सहमति बनाने में देरी होती है, तो भी सरकार के पास कुछ ऐसे संवैधानिक रास्ते मौजूद हैं जिससे 2029 की समय सीमा को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। जानकारों का मानना है कि जनगणना (Census) और परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया को तेज करके सरकार इस कानून को जमीन पर उतारने की तैयारी में है। सरकार का तर्क है कि नारी शक्ति की भागीदारी के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा है, इसलिए इसे मिशन मोड में लिया गया है।
2029 के चुनाव में बदलेगा संसद का चेहरा
अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो 2029 के लोकसभा चुनाव ऐतिहासिक होंगे। वर्तमान में लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या काफी कम है, लेकिन आरक्षण लागू होते ही यह आंकड़ा सीधे 181 के पार पहुँच सकता है। इससे न केवल नीति निर्धारण में महिलाओं की भूमिका बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की राजनीति में एक बड़ा सामाजिक बदलाव भी देखने को मिलेगा। परिसीमन आयोग के गठन की सुगबुगाहट ने इस संभावना को और बल दे दिया है।
क्या है परिसीमन और जनगणना का पेच?
महिला आरक्षण बिल के क्रियान्वयन के लिए ‘जनगणना’ और ‘सीटों का पुनर्निर्धारण’ दो सबसे बड़ी शर्तें हैं। विपक्षी दल लगातार मांग कर रहे हैं कि आरक्षण तुरंत लागू किया जाए, जबकि सरकार का कहना है कि डेटा के बिना यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार जल्द ही नई जनगणना के आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है, जिसके तुरंत बाद परिसीमन आयोग सीटों का कोटा तय करेगा। यही वह ‘प्लान-B’ है जो 2029 तक हर हाल में आरक्षण सुनिश्चित करेगा।
राजनीतिक दलों में मची हलचल, टिकटों का बदलेगा समीकरण
इस खबर के बाहर आते ही सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बदलनी शुरू कर दी है। यदि 2029 में 33% सीटें आरक्षित होती हैं, तो कई दिग्गज नेताओं को अपनी सुरक्षित सीटों से हाथ धोना पड़ सकता है। यही वजह है कि अब पार्टियाँ महिला चेहरों को संगठन में आगे लाने और उन्हें चुनावी मैदान के लिए तैयार करने में जुट गई हैं। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कुछ और बड़े नीतिगत ऐलान कर सकती है।
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