Windfall Tax Hike: वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच डीजल और हवाई ईंधन (ATF) के निर्यात पर बढ़ा विंडफॉल टैक्स; आज से नई दरें लागू

वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों (Higher Energy Prices) और लगातार बनी अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार ने देश के फ्यूल मार्केट को संतुलित रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने डीजल और एटीएफ (ATF – एविएशन टरबाइन फ्यूल/हवाई ईंधन) के निर्यात (Export) पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (Especial Excise Duty) में बढ़ोतरी कर दी है।

정부의 이번 नया फैसला आज यानी 16 जून 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गया है। इस बीच घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्कों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है और इसे पहले के स्तर पर ही बरकरार रखा है। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के तहत आने वाले राजस्व विभाग (Department of Revenue) की तरफ से जारी आधिकारिक अधिसूचना (Notification) के बाद इन नई दरों को देशभर में लागू कर दिया गया है।

डीजल और हवाई ईंधन (ATF) पर कितना बढ़ा टैक्स?

अंतरराष्ट्रीय बाजार के बदलते समीकरणों और क्रूड ऑयल की कीमतों को देखते हुए सरकार ने टैक्स स्ट्रक्चर में निम्नलिखित संशोधन किए हैं:

  • डीजल पर निर्यात शुल्क: डीजल के निर्यात पर लगने वाले चार्ज को 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर अब 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

  • ATF (हवाई ईंधन) पर निर्यात शुल्क: एटीएफ के निर्यात शुल्क में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की गई है। इस पर लगने वाले टैक्स को 9.5 रुपये प्रति लीटर से सीधे बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

  • पेट्रोल पर कोई बदलाव नहीं: पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला शुल्क बिना किसी बदलाव के 1.5 रुपये प्रति लीटर के पूर्व स्तर पर ही स्थिर बना हुआ है।

सेस (Cess) से राहत: अच्छी बात यह है कि टैक्स में किए गए इस नए बदलाव के तहत इन तीनों ही पेट्रोलियम उत्पादों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त ‘रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस’ (Road and Infrastructure Cess) नहीं लगाया गया है।

मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) संकट पर सरकार की पैनी नजर

वित्त मंत्रालय के अनुसार, विंडफॉल टैक्स की ये नई दरें 16 जून से शुरू होने वाले अगले दो हफ्तों के लिए प्रभावी रहेंगी। सरकार की तरफ से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव (Geo-Political Tension) के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

इस अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता से निपटने और देश के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) के तहत यह एक्सपोर्ट चार्ज बढ़ाया है। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू निजी रिफाइनरी कंपनियों द्वारा भारतीय बाजार को छोड़कर केवल मुनाफे के लिए विदेशों में तेल बेचने की होड़ पर लगाम लगाना है।

घरेलू बाजार में नियंत्रित रहेंगी ईंधन की कीमतें

टैक्स स्ट्रक्चर में की गई इस हालिया बढ़ोतरी से यह साफ है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर पूरी तरह सतर्क है। ऊंचे ग्लोबल प्राइसेज के लालच में आकर घरेलू निजी तेल रिफाइनरियां देश के भीतर ईंधन की सप्लाई कम न कर दें, इसी खतरे को रोकने के लिए सरकार ने यह चक्रव्यूह तैयार किया है।

निर्यात शुल्क (Export Tax) को बढ़ाकर सरकार विदेशी बिक्री के मुनाफे को कम आकर्षक बनाना चाहती है, ताकि तेल कंपनियां देश के घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रेरित हों। इस नीति के कारण भारतीय बाजार में डीजल, पेट्रोल और हवाई ईंधन की उपलब्धता प्रचुर मात्रा में बनी रहेगी, जिससे घरेलू स्तर पर ईंधन की खुदरा कीमतों को नियंत्रित रखने में बड़ी मदद मिलेगी।