Wife के साथ मिलकर पोस्ट ऑफिस की MIS स्कीम में लगाएं पैसा, हर महीने सीधे खाते में आएंगे ₹9,250; समझें कैलकुलेशन

बढ़ती महंगाई और अनिश्चित बाजार के दौर में हर परिवार एक ऐसे सुरक्षित निवेश विकल्प की तलाश में रहता है, जिससे हर महीने एक तय और बंधी-बंधाई आमदनी घर आती रहे। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या इक्विटी में जहां पूंजी डूबने का जोखिम बना रहता है, वहीं भारतीय डाकघर की मासिक आय योजना (Post Office Monthly Income Scheme – POMIS) सुरक्षित और नियमित रिटर्न की मिसाल बनकर उभरी है। केंद्र सरकार के संचार मंत्रालय के अंतर्गत संचालित इस योजना पर भारत सरकार की सॉवरेन गारंटी (Sovereign Guarantee) मिलती है, यानी जमा की गई पूंजी और ब्याज का एक-एक पैसा पूरी तरह सुरक्षित है। लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर से लेकर देश भर के किसी भी नजदीकी डाकघर में जाकर पति-पत्नी एक साथ मिलकर जॉइंट अकाउंट खोल सकते हैं और बिना किसी मानसिक तनाव के हर महीने अपने बचत खाते में एक फिक्स्ड पेंशन जैसी इनकम हासिल कर सकते हैं। यह योजना उन दंपतियों के लिए विशेष रूप से वरदान साबित हो रही है जो घर के मासिक राशन, बच्चों की फीस या बिजली-पानी जैसे घरेलू खर्चों के लिए एक परमानेंट कैशफ्लो चाहते हैं।

डाकघर की मंथली इनकम स्कीम में मिलने वाला रिटर्न सीधे तौर पर सरकार द्वारा तय ब्याज दर पर निर्भर करता है। मौजूदा समय में केंद्र सरकार इस योजना पर 7.4 प्रतिशत प्रति वर्ष की आकर्षक और स्थिर ब्याज दर दे रही है। नियमों के तहत एकल (Single) खाते में अधिकतम ₹9 लाख तक जमा किए जा सकते हैं, जबकि पति-पत्नी मिलकर जॉइंट अकाउंट में अधिकतम ₹15 लाख का एकमुश्त निवेश कर सकते हैं।

  • सालाना ब्याज का हिसाब: यदि पति-पत्नी मिलकर संयुक्त खाते में अधिकतम सीमा यानी पूरे ₹15,00,000 जमा करते हैं, तो 7.4% की दर से 1 साल का कुल ब्याज ₹1,11,000 (15,00,000 × 0.074) बनता है।

  • हर महीने मिलने वाली पेंशन राशि: इस पूरे वार्षिक ब्याज को 12 बराबर महीनों में बांटकर खाताधारकों को दिया जाता है (1,11,000 ÷ 12)। इस प्रकार हर महीने ठीक तारीख पर आपके खाते में पूरे ₹9,250 की रकम क्रेडिट कर दी जाती है।

  • 5 साल में कुल ब्याज की कमाई: यह योजना 5 साल (60 महीने) की लॉक-इन अवधि के साथ आती है। इन 5 वर्षों के दौरान निवेशक दंपत्ति को कुल मिलाकर ₹5,55,000 (₹9,250 × 60) का शुद्ध ब्याज प्राप्त होता है।

  • परिपक्वता पर मूलधन की पूर्ण वापसी: 5 वर्ष की परिपक्वता (Maturity) पूरी होने के बाद आपके द्वारा जमा किए गए मूलधन के पूरे ₹15,00,000 सुरक्षित आपके खाते में वापस लौटा दिए जाते हैं। यानी पूंजी जस की तस बनी रहती है और 5 साल तक ₹9,250 प्रति माह का ब्याज अलग से मिलता रहता है।

पोस्ट ऑफिस एमआईएस खाता खोलने की प्रक्रिया बहुत आसान और पारदर्शी है। कोई भी वयस्क भारतीय नागरिक अपने नाम से या किसी अन्य वयस्क के साथ मिलकर यह खाता खोल सकता है। जॉइंट अकाउंट दो या तीन व्यक्ति मिलकर खोल सकते हैं, जिसमें सभी खाताधारकों की हिस्सेदारी बराबर मानी जाती है। 10 वर्ष से अधिक उम्र का नाबालिग भी अपने नाम से खाता संचालित कर सकता है, जबकि उससे छोटे बच्चों के लिए माता-पिता या अभिभावक खाता खोल सकते हैं। योजना में न्यूनतम ₹1,000 की मामूली राशि से खाता शुरू किया जा सकता है और इसके बाद ₹1,000 के गुणकों में निवेश बढ़ाया जा सकता है। खाता खोलने के लिए पति और पत्नी दोनों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, पते का प्रमाण, पासपोर्ट साइज फोटो और संयुक्त आवेदन पत्र की आवश्यकता होती है। यह ब्याज राशि सीधे डाकघर के सेविंग्स अकाउंट या निवेशक के बैंक खाते (जैसे SBI, PNB आदि) में ईसीएस (ECS) के जरिए ऑटो-क्रेडिट हो जाती है।

आमतौर पर यह योजना 5 साल के लिए होती है, लेकिन किसी आपात स्थिति में खाताधारक को तय अवधि से पहले भी पैसे निकालने की सुविधा मिलती है। हालांकि, सरकार ने इसके लिए कुछ स्पष्ट नियम तय किए हैं:

  • 1 साल से पहले: खाता खुलने की तारीख से 1 साल पूरा होने से पहले जमा पूंजी में से कोई भी पैसा नहीं निकाला जा सकता।

  • 1 से 3 साल के भीतर: यदि आप 1 साल पूरा होने के बाद और 3 साल से पहले खाता बंद करते हैं, तो कुल जमा मूलधन से 2 प्रतिशत की कटौती की जाती है और शेष रकम वापस कर दी जाती है।

  • 3 से 5 साल के बीच: यदि खाता 3 साल पूरे होने के बाद और 5 साल से पहले बंद कराया जाता है, तो मूलधन से 1 प्रतिशत की कटौती की जाती है। 5 साल की अवधि पूरी होने पर खाताधारक चाहें तो अपनी पूरी जमा पूंजी वापस ले सकते हैं या फिर नए नियमों के तहत दोबारा 5 साल के लिए नया एमआईएस खाता खोलकर इस मासिक आय को आगे भी जारी रख सकते हैं।

डाकघर मासिक आय योजना पर मिलने वाले ब्याज को लेकर टैक्स नियमों की जानकारी होना आवश्यक है। इस योजना में जमा की जाने वाली रकम पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत कोई टैक्स छूट नहीं मिलती है। इसके अलावा, हर महीने मिलने वाला ₹9,250 का ब्याज भी पूरी तरह कर योग्य (Taxable) होता है और यह खाताधारक की वार्षिक कुल आय में जोड़ा जाता है। निवेशक जिस भी टैक्स स्लैब में आते हैं, उन्हें उसी हिसाब से टैक्स देना होता है। हालांकि, सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि डाकघर द्वारा इस ब्याज भुगतान पर स्रोत पर कर कटौती यानी टीडीएस (TDS) नहीं काटा जाता। यदि आपकी कुल वार्षिक आय बेसिक छूट सीमा के दायरे में आती है, तो आपको इस ब्याज पर कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा। सरकारी सुरक्षा, बिना जोखिम के निश्चित मासिक आमदनी और आसान संचालन के कारण आज भी यह स्कीम उन सभी परिवारों की पहली पसंद बनी हुई है जो घर बैठे एक पक्की आमदनी चाहते हैं।