White Poison: सावधान! थाली में परोसा जा रहा यह ‘सफेद जहर’ धीरे-धीरे गला रहा है आपकी हड्डियां, WHO की नई गाइडलाइन ने बढ़ाई डॉक्टरों की चिंता

लखनऊ। हमारे देश में चटपटा और मसालेदार खाने के शौकीनों की कोई कमी नहीं है, लेकिन स्वाद का यही शौक अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट में बदलता जा रहा है। टीवी9 हिंदी की रिपोर्ट में खाने में अत्यधिक नमक (Salt Side Effects) के इस्तेमाल को लेकर जो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, उसने चिकित्सा जगत और डॉक्टरों को ‘रेड अलर्ट’ पर ला दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताजा गाइडलाइन के मुताबिक, दैनिक आहार में शामिल यह नमक अब केवल हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) की वजह नहीं रहा, बल्कि यह एक ‘व्हाइट पॉइज़न’ (सफेद जहर) की तरह काम कर रहा है, जो इंसानी हड्डियों को अंदर से खोखला और किडनियों को पूरी तरह डैमेज कर रहा है।

दोगुना नमक खा रहे हैं भारतीय, साइलेंट किलर बना ‘हिडन साल्ट’

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, WHO ने एक स्वस्थ वयस्क के लिए दिनभर में अधिकतम 5 ग्राम (एक छोटा चम्मच) नमक खाने की सीमा तय की है। लेकिन एक हालिया सर्वे में सामने आया है कि भारतीय अपने भोजन में रोजाना औसतन 10 से 12 ग्राम नमक का सेवन कर रहे हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि समस्या केवल रसोई में इस्तेमाल होने वाले साधारण नमक की नहीं है, बल्कि बाजार में मिलने वाले पैकेटबंद फूड्स (Processed Foods) जैसे—चिप्स, नमकीन, सॉस, डिब्बाबंद सूप, फ्रीज किए हुए स्नैक्स और यहां तक कि रोज खाए जाने वाले बिस्कुट में भारी मात्रा में ‘छिपा हुआ नमक’ (Hidden Salt) होता है। प्रिजर्वेशन के नाम पर डाला जाने वाला यह सोडियम सीधे हमारे यूरिनरी और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर हमला करता है।

हड्डियों को अंदर से गला रहा है सोडियम, ऑस्टियोपोरोसिस का बढ़ा खतरा

लखनऊ के वरिष्ठ डायटिशियन और डॉक्टरों ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि अत्यधिक नमक का सीधा असर शरीर के कैल्शियम संतुलन पर पड़ता है। जब शरीर में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है, तो किडनियां उसे बाहर निकालने के लिए ज्यादा सक्रिय होती हैं।

इस प्रक्रिया में सोडियम के साथ-साथ शरीर का आवश्यक कैल्शियम भी पेशाब के रास्ते बाहर बह जाता है। नतीजतन, हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी कैल्शियम नहीं मिल पाता और हड्डियां अंदर से भुरभुरी व कमजोर होने लगती हैं। इसे मेडिकल भाषा में ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) कहा जाता है। आज के युवाओं में समय से पहले जोड़ों का दर्द, पीठ दर्द और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ने के पीछे यह एक मुख्य साइलेंट कारण है।

किडनी और दिल को बचाने के लिए डॉक्टरों की 3 बड़ी चेतावनियां:

  1. सेंधा नमक भी जादुई इलाज नहीं: कई लोग साधारण आयोडीन नमक छोड़कर पूरी तरह सेंधा नमक या पिंक साल्ट का इस्तेमाल करने लगते हैं। डॉक्टरों ने साफ किया है कि सेंधा नमक में भी सोडियम होता है, इसलिए इसकी मात्रा को भी 5 ग्राम के दायरे में ही रखना होगा।

  2. वॉटर रिटेंशन को न करें नजरअंदाज: अगर सुबह उठने पर चेहरे, आंखों के नीचे या पैरों में असामान्य सूजन (Bloating) दिखती है, तो यह शरीर में सोडियम की अधिकता और वॉटर रिटेंशन का सीधा संकेत है।

  3. नेचुरल फ्लेवर्स को अपनाएं: खाने में नमक की मात्रा घटाने के लिए नींबू, अमचूर, काली मिर्च, लहसुन और हर्ब्स का उपयोग बढ़ाएं ताकि स्वाद से समझौता किए बिना दिल और फेफड़ों को सुरक्षित रखा जा सके।