
देशभर में मानसून का रुख एक बार फिर आक्रामक होता दिख रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, कल यानी 8 सितंबर को देश के बीस से अधिक राज्यों में मानसूनी बादल जमकर बरसने वाले हैं। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र और मध्य भारत से गुजर रही मानसूनी ट्रफ लाइन के प्रभाव से पूर्वी, मध्य और उत्तरी भारत के कई इलाकों में मौसम अचानक करवट लेने जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगले चौबीस घंटों में कुछ राज्यों में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने और आकाशीय बिजली गिरने की गंभीर आशंका बनी हुई है।
पूर्वी भारत के मैदानी इलाकों में जहां लगातार बारिश से तापमान में चार से पांच डिग्री तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है, वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड का जोखिम बना हुआ है। बंगाल की खाड़ी से आ रही तीव्र नम हवाओं के चलते नदी घाटियों और तटीय इलाकों में जलस्तर तेजी से बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन इकाइयों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
उत्तर प्रदेश के मौसम में 8 सितंबर को बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के पूर्वी हिस्सों यानी पूर्वांचल में मानसूनी तंत्र पूरी ताकत से सक्रिय रहने वाला है। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, मऊ, बलिया, आजमगढ़, गाजीपुर, वाराणसी, जौनपुर और सोनभद्र जैसे जनपदों में मंगलवार को मूसलाधार बारिश के साथ 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य भाग के जिलों जैसे कानपुर, इटावा, लखनऊ, बाराबंकी, उन्नाव, अयोध्या और सुल्तानपुर में भी बादलों की घनी आवाजाही के साथ रुक-रुक कर बारिश होने के आसार हैं। राजधानी लखनऊ में कल अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को खुले खेतों में न जाने और पशुओं को पेड़ों के नीचे न बांधने की हिदायत दी है, क्योंकि आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
बिहार में बीते 24 घंटों की बारिश के बाद कल 8 सितंबर से मानसूनी गतिविधियां और अधिक उग्र रूप धारण कर सकती हैं। राज्य के उत्तरी और पूर्वी जिलों में बादलों की सघन जमावट हो रही है। मौसम केंद्र पटना के मुताबिक, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, शिवहर, समस्तीपुर, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार में मध्यम से भारी वर्षा का ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी किया गया है।
इन इलाकों में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवा चलने और कई स्थानों पर भारी वज्रपात होने का अंदेशा है। राजधानी पटना में अधिकतम तापमान लगभग 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है। नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही वर्षा के कारण कोसी, बागमती, गंडक और कमला बलान नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सतर्क रहने को कहा गया है।
बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र का सीधा और व्यापक असर ओडिशा और पश्चिम बंगाल पर पड़ने जा रहा है। ओडिशा के क्योंझर, मयूरभंज, बालासोर, भद्रक, सुंदरगढ़, ढेंकनाल, पुरी, कटक, संबलपुर, बलांगिर और राजधानी भुवनेश्वर में मध्यम से भारी बारिश का दौर मंगलवार को तेज हो सकता है। राज्य में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी और बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है। समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरों और तूफानी हवाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र तट से दूर रहने की सख्त सलाह दी है।
पश्चिम बंगाल के गंगीय मैदानी इलाकों—कोलकाता, हावड़ा, हुगली, उत्तर व दक्षिण 24 परगना, मेदिनीपुर और बांकुरा में 8 सितंबर से भारी वर्षा का नया दौर शुरू होने का अनुमान है। कोलकाता में दिन का पारा 32 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। वहीं झारखंड के रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम जिलों में घने बादलों के साथ तेज बौछारें पड़ने और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने की चेतावनी है। रांची में अधिकतम तापमान 29 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है।
मध्य भारत में मानसूनी परिसंचरण का असर बना रहेगा। मध्य प्रदेश के मध्य और पूर्वी संभागों—जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, दमोह, सतना, सीधी, छिंदवाड़ा और सिवनी में मूसलाधार बारिश का अनुमान है। इसके अलावा ग्वालियर-चंबल अंचल और इंदौर-उज्जैन संभाग के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। भोपाल में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने का अनुमान है।
पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में 8 सितंबर से बारिश की गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी आने की संभावना है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, महासमुंद, जांजगीर-चांपा, धमतरी, सूरजपुर और सरगुजा में आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश का अलर्ट है। इस दौरान हवा की रफ्तार 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। प्रशासन ने महानदी और शिवनाथ नदी बेसिन के जलस्तर की निरंतर निगरानी शुरू कर दी है।
उत्तरी मैदानी इलाकों की बात करें तो दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में 8 सितंबर को मानसूनी बारिश की तीव्रता में थोड़ी कमी आ सकती है। राजधानी दिल्ली में आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे, लेकिन व्यापक बारिश की संभावना कम है। दिल्ली में अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा सकता है। बारिश की कमी के कारण दिन के समय हल्की उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है।
राजस्थान के पूर्वी जिलों—अलवर, भरतपुर, दौसा, करौली, कोटा और बारां में स्थानीय स्तर पर बादलों की गर्जना के साथ हल्की से मध्यम वर्षा देखने को मिल सकती है, जबकि पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर, जोधपुर और बाड़मेर में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा। पंजाब और हरियाणा के अधिकांश हिस्सों में भी मौसम साफ या आंशिक बादलों वाला रहेगा, जहां दिन का तापमान 36 से 37 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है।
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों—देहरादून, नैनीताल, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत में 8 सितंबर को गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। भारी बारिश के कारण संवेदनशील पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन और बोल्डर गिरने का खतरा बना रहता है। चारधाम यात्रा मार्गों पर आवागमन करने वाले तीर्थयात्रियों को स्थानीय मौसम की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ने की सलाह दी गई है। देहरादून में कल अधिकतम तापमान 28 डिग्री और न्यूनतम 22 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
हिमाचल प्रदेश में शिमला, कुल्लू और कांगड़ा के आसपास छिटपुट बौछारें पड़ने की संभावना है, हालांकि राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत सामान्य रहेगा। जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में आंशिक बादल छाए रहेंगे और हल्की बूंदाबांदी दर्ज की जा सकती है।
मौसम विभाग द्वारा जारी भारी बारिश और आंधी की चेतावनियों को देखते हुए आम नागरिकों को कुछ बुनियादी सावधानियां बरतने की आवश्यकता है:
आंधी और बिजली कड़कने के दौरान किसी भी पेड़, टिन शेड, बिजली के खंभे या ट्रांसफॉर्मर के पास शरण न लें। घर के भीतर संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के स्विच बंद रखें।
सड़क यात्रा के दौरान जलभराव वाले रास्तों, अंडरपास और कमजोर पुलियों से वाहन निकालने का प्रयास न करें। आकाशीय बिजली चमकने के समय किसान खेतों से सुरक्षित पक्के मकानों में चले जाएं। तटीय राज्यों के नागरिक जिला प्रशासन के मौसम अलर्ट पर नजर बनाए रखें और अफवाहों से बचें।
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