
हमारे शरीर को सुचारू रूप से चलाने में विटामिन्स और मिनरल्स की भूमिका सबसे अहम होती है। अक्सर लोग विटामिन A, B, C, D और E के बारे में तो खूब चर्चा करते हैं, लेकिन विटामिन बी12 (Vitamin B12) को लगभग नजरअंदाज कर देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस विटामिन को शरीर का ‘पावरहाउस’ कहते हैं, क्योंकि यह हमारे शरीर में दिनभर एनर्जी के लेवल को बनाए रखने का जिम्मा संभालता है। अगर शरीर में इसकी कमी हो जाए, तो लगातार थकान बने रहना और दिमाग में धुंधलापन यानी ब्रेन फॉग जैसी कई परेशानियां घेर लेती हैं।
हाल ही में एक डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म द्वारा किए गए अध्ययन में बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इस स्टडी के मुताबिक, भारत में दफ्तरों में काम करने वाले लगभग 57% पुरुष कॉर्पोरेट कर्मचारी विटामिन बी12 की कमी से जूझ रहे हैं। यही नहीं, कामकाजी महिलाओं में भी यह आंकड़ा 50% के करीब है। इसका सीधा मतलब यह है कि हमारी आधी से ज्यादा कामकाजी आबादी अनजाने में एक बड़ी शारीरिक समस्या की तरफ बढ़ रही है। लंबे समय तक इस जरूरी पोषक तत्व की कमी शरीर को कई गंभीर और लाइलाज बीमारियों के दलदल में धकेल सकती है।
दिमाग और रीढ़ की हड्डी को कमजोर कर देती है इसकी कमी
विटामिन बी12 की कमी हमारे नर्वस सिस्टम को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाती है। नई दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के मनोचिकित्सक और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. लोकेश सिंह शेखावत बताते हैं कि इस विटामिन की कमी के कारण ‘न्यूरॉनल डिजनरेशन’ शुरू हो जाता है। इसका सीधा असर हमारे दिमाग और रीढ़ की हड्डी के कामकाज पर पड़ता है। शरीर में विटामिन B12 और फोलेट की भारी कमी होने से इंसान डिमेंशिया जैसी गंभीर स्थिति का शिकार हो सकता है।
डिमेंशिया असल में एक ऐसी दिमागी बीमारी है जिसमें व्यक्ति धीरे-धीरे अपनी याददाश्त खोने लगता है और रोजमर्रा की चीजें भी भूल जाता है। डॉक्टर शेखावत के अनुसार, विटामिन B12 की कमी से होने वाले डिमेंशिया को ‘रिवर्सिबल डिमेंशिया’ कहा जाता है। राहत की बात यह है कि अगर सही समय पर इस कमी को पहचान लिया जाए, तो मरीज को विटामिन बी12 देकर उसकी खोई हुई याददाश्त को पूरी तरह वापस लाया जा सकता है। इसके अलावा, अचानक से चक्कर आना भी इसका एक प्रमुख संकेत हो सकता है, जिसे लोग अक्सर मामूली कमजोरी समझकर टाल देते हैं।
इन इशारों से पहचानें कि शरीर में हो चुकी है विटामिन बी12 की कमी
जब शरीर के भीतर इस विटामिन का स्तर गिरने लगता है, तो हमारा शरीर कई तरह के शुरुआती संकेत देना शुरू कर देता है। इन लक्षणों को कभी भी सामान्य समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।
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याददाश्त कमजोर होना और चीजें रखकर भूल जाना
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हाथ और पैरों की उंगलियों में अजीब सी झनझनाहट या सूई चुभने जैसा महसूस होना
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न्यूरोलॉजिकल यानी तंत्रिका तंत्र से जुड़ी तरह-तरह की दिक्कतें आना
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भूख में अचानक कमी आ जाना और कुछ भी खाने की इच्छा न होना
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पर्याप्त आराम करने के बाद भी लगातार शरीर में भारी थकान बने रहना
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मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना और बिना ज्यादा मेहनत किए थक जाना
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मुंह के भीतर बार-बार छालों का निकलना
इन चीजों को थाली में जगह देकर पूरी करें विटामिन बी12 की कमी
विटामिन बी12 मुख्य रूप से पशु आधारित खाद्य पदार्थों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। जो लोग मांसाहारी हैं, उनके लिए अंडा और मीट इसका सबसे बेहतरीन और सीधा स्रोत हैं। लेकिन शाकाहारी लोगों को भी निराश होने की जरूरत नहीं है।
शाकाहारी लोग अपनी डाइट में दूध, फ्रेश दही, पनीर और फर्मेंटेड यानी खमीर उठी हुई चीजें (जैसे इडली, डोसा) शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा मशरूम, बादाम, साबुत अनाज, सोया मिल्क और फोर्टिफाइड फूड्स भी विटामिन बी12 के बहुत अच्छे विकल्प हैं। साथ ही अपनी रोज की डाइट में घर की बनी चटनियां और मौसम के अनुसार आने वाले ताजे फलों को जरूर शामिल करें।
अगर आपको अपने शरीर में ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी संकेत दिखाई देता है, तो बिना देर किए डॉक्टर की सलाह लें। इसका इलाज बेहद आसान और सीधा है। आपको सिर्फ एक साधारण ब्लड टेस्ट करवाना होता है जिससे शरीर में विटामिन का सही स्तर पता चल जाता है। याद रखें कि इस शुरुआती कमी को नजरअंदाज करना भविष्य में किसी बड़ी और गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी को न्योता देने जैसा साबित हो सकता है।
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