विराट कोहली आलोचनाओं को लेकर बेहद संवेदनशील हैं, संजय मांजरेकर ने सालों पुराना टॉस का वह कड़वा किस्सा किया याद

Virat Kohli vs Sanjay Manjrekar: भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक विराट कोहली और पूर्व क्रिकेटर व कमेंटेटर संजय मांजरेकर के बीच का ‘कोल्ड वॉर’ किसी से छिपा नहीं है। हाल ही में मांजरेकर ने एक बार फिर विराट कोहली के स्वभाव को लेकर बड़ा खुलासा किया है। मांजरेकर का मानना है कि मैदान पर बेहद आक्रामक दिखने वाले विराट कोहली निजी तौर पर अपनी आलोचना को लेकर काफी संवेदनशील (Sensitive) हैं और उन्हें अपनी बुराई सुनना बिल्कुल पसंद नहीं है।

टॉस के दौरान जब विराट ने मांजरेकर को दिया ‘करारा जवाब’

एक इंटरव्यू के दौरान संजय मांजरेकर ने टॉस के समय हुई एक पुरानी घटना को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे एक बार विराट कोहली ने लाइव मैच के दौरान उनकी किसी पुरानी टिप्पणी का जिक्र करते हुए उन्हें टोक दिया था। मांजरेकर के अनुसार, विराट उन खिलाड़ियों में से हैं जो यह याद रखते हैं कि उनके बारे में मीडिया या कमेंट्री बॉक्स में क्या कहा जा रहा है। मांजरेकर ने कहा, “विराट को लगता है कि जब वह रन बना रहे होते हैं, तो उनकी हर बात की तारीफ होनी चाहिए, लेकिन आलोचना उन्हें चुभ जाती है।”

आलोचना और विराट कोहली का रिश्ता

यह पहली बार नहीं है जब विराट और मांजरेकर के बीच तनाव की खबरें आई हों। इससे पहले भी मांजरेकर ने विराट की बल्लेबाजी तकनीक और उनके कप्तानी के फैसलों पर सवाल उठाए थे। वहीं, विराट कोहली ने कई मौकों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के जरिए यह संकेत दिया है कि बाहरी शोर (Outside Noise) उनके लिए मायने नहीं रखता, लेकिन मांजरेकर का दावा इसके उलट है। उनका कहना है कि विराट बाहरी बातों पर काफी ध्यान देते हैं और अक्सर उन्हें निजी तौर पर ले लेते हैं।

क्या आलोचना से बढ़ती है विराट की परफॉरमेंस?

विशेषज्ञों का मानना है कि विराट कोहली की सबसे बड़ी ताकत ही उनकी ‘रिएक्टिव’ प्रकृति है। जब भी उन पर सवाल उठाए जाते हैं या उन्हें ‘फिनिश्ड’ कहा जाता है, तो वह बल्ले से और भी खतरनाक होकर वापसी करते हैं। मांजरेकर ने भले ही इसे संवेदनशीलता का नाम दिया हो, लेकिन कोहली के प्रशंसकों के लिए यह उनकी ‘फायर’ है जो उन्हें मैदान पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती है। 2024 के टी20 वर्ल्ड कप और आईपीएल के दौरान स्ट्राइक रेट को लेकर हुई बहस इसका ताजा उदाहरण है।