Uttarakhand Weather : अगले 48 घंटे भारी बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी का अलर्ट

देहरादून। उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। अगले कुछ दिन प्रदेशवासियों और चारधाम यात्रियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने 13 और 14 मई को लेकर विशेष चेतावनी जारी की है, जिसमें पहाड़ से लेकर मैदान तक तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। हालांकि, 15 मई के बाद से मैदानी इलाकों में चिलचिलाती धूप और गर्मी का दौर शुरू होने की संभावना है।

13 और 14 मई को ‘येलो अलर्ट’: 60 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार और गुरुवार को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे ऊंचाई वाले जिलों में मौसम का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। इन जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ ही तेज गर्जना और बिजली चमकने की संभावना है। इस दौरान मैदानों में 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में ओलावृष्टि और बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है।

चारधाम यात्रियों के लिए एडवाइजरी: भूस्खलन का खतरा

मौसम में आए इस बदलाव को देखते हुए चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। संवेदनशील इलाकों में हल्की बारिश की वजह से भूस्खलन (Landslide) और चट्टानें गिरने की आशंका है, जिससे यात्रा मार्ग बाधित हो सकते हैं। यात्रियों से अपील की गई है कि वे मौसम का अपडेट लेकर ही अपनी आगे की यात्रा तय करें।

15 मई से बदलेगा मिजाज, मैदानों में बढ़ेगा पारा

मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 मई के बाद से प्रदेश में बारिश का दौर थमने लगेगा। 16 और 17 मई को केवल उत्तरकाशी और चमोली जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है, जबकि राज्य के अन्य हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा। 18 मई तक पूरे प्रदेश में मौसम साफ हो जाएगा। इस बदलाव के साथ ही अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी, जिससे मैदानी क्षेत्रों में गर्मी का अहसास तेज होगा।

आपदा प्रभावितों का दर्द: वादे पूरे होने का इंतजार

एक तरफ मौसम विभाग मानसून की आहट दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ पिछले साल 29 अगस्त को रुद्रप्रयाग के बसुकेदार और छेनागाड़ में आई आपदा के जख्म अब भी ताजा हैं। नौ लोगों की जान लेने वाली उस तबाही के बाद सरकार ने प्रभावितों को बड़ी राहत का वादा किया था। हालांकि, मृतकों के परिजनों को मुआवजा मिल चुका है, लेकिन 16 भवन स्वामी और 22 दुकानदार आज भी सरकारी फाइलों और दफ्तरों के बीच फंसे हुए हैं। व्यापारियों का कहना है कि 2013 की आपदा की तर्ज पर मुआवजा देने का वादा अभी तक कागजों तक ही सीमित है।