
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के प्रमुख थोक और खुदरा बाजारों—चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, कनाट प्लेस और लाजपत नगर—में डिजिटल लेनदेन को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कभी कैशलेस इकोनॉमी और डिजिटल इंडिया के सबसे बड़े समर्थक रहे कारोबारी अब यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म्स की कार्यप्रणाली से बेहद नाराज हैं। व्यापारियों की शीर्ष संस्था चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) और अन्य प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने इस नाराजगी को जाहिर करने के लिए 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के अवसर पर दिल्ली के बाजारों में ‘कैश डे’ (Cash Day) मनाने का आह्वान किया है। व्यापारियों ने इस दिन आम ग्राहकों से अपील की है कि वे ऑनलाइन क्यूआर कोड स्कैन करने के बजाय केवल नकद नोटों में भुगतान करें।
व्यापारियों का कहना है कि यह कदम डिजिटल क्रांति के विरोध में नहीं, बल्कि फिनटेक कंपनियों, बैंकों और सरकार का ध्यान उन गंभीर तकनीकी और वित्तीय खामियों की तरफ खींचने के लिए एक सांकेतिक विरोध प्रदर्शन है, जिनकी वजह से रोजमर्रा के व्यापार में दुकानदारों को भारी आर्थिक चपत लग रही है।
व्यापारियों के अनुसार, जमीनी स्तर पर यूपीआई से लेन-देन करना अब सहूलियत के बजाय आर्थिक जोखिम और मानसिक परेशानी का कारण बनता जा रहा है। नाराजगी के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
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फर्जी स्क्रीनशॉट और ‘फेक पेमेंट’ का बढ़ता जाल: कई शातिर ग्राहक दुकान से सामान लेने के बाद मोबाइल पर एडिट किया हुआ फर्जी पेमेंट स्क्रीनशॉट या फेक पेमेंट ऐप का इस्तेमाल करके भुगतान का मैसेज दिखा देते हैं। भीड़भाड़ के समय दुकानदार बिना खाते में बैलेंस चेक किए सामान दे देते हैं, जिससे उन्हें सीधा नुकसान उठाना पड़ता है।
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बैंक खातों का अचानक फ्रीज होना (Cyber Crime Freeze): व्यापारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि किसी साइबर ठग या संदिग्ध व्यक्ति ने दुकान के क्यूआर कोड पर मात्र ₹100 या ₹500 का भुगतान कर दिया, तो पुलिस और साइबर सेल उस पूरे लेन-देन की चेन को ट्रैक करते हुए निर्दोष दुकानदार का पूरा चालू खाता (Current Account) ही सील या फ्रीज कर देती है। खाता बंद होने से दुकानदारों का लाखों रुपये का नियमित व्यापार और चेक भुगतान अटक जाता है।
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बैंकों द्वारा करंट अकाउंट पर अतिरिक्त चार्ज: अधिकांश बैंकों ने चालू खातों में एक निश्चित सीमा से अधिक यूपीआई ट्रांजैक्शन होने पर हिडन चार्ज और प्रोसेसिंग फीस लगाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा बैंक सर्वर डाउन रहने के कारण लेन-देन बीच में अटक जाते हैं (Transaction Pending) और पैसा 24 से 48 घंटे तक होल्ड पर चला जाता है।
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साउंडबॉक्स का भारी मासिक रेंटल: डिजिटल पेमेंट कंपनियों द्वारा पेमेंट अलर्ट के लिए दिए जाने वाले साउंडबॉक्स (Soundbox) के नाम पर ₹125 से ₹150 प्रति माह का शुल्क वसूला जा रहा है, जो छोटे दुकानदारों के लिए अनावश्यक बोझ बन चुका है।
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अध्यक्ष बृजेश गोयल और दिल्ली के विभिन्न मार्केट एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने साझा बैठक कर 2 अक्टूबर को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं:
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‘कैश डे’ के रूप में मनाएं दिन: 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर सभी व्यापारी अपनी दुकानों पर प्रतीकात्मक रूप से केवल नकद भुगतान स्वीकार करेंगे और ग्राहकों से भी नकद लेन-देन में सहयोग की अपील करेंगे।
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दुकानों पर लगाए जाएंगे पोस्टर: दिल्ली के बाजारों में जागरूकता के लिए पोस्टर लगाए जाएंगे जिन पर लिखा होगा—“डिजिटल ठगी और बैंक चार्ज से मुक्ति के लिए आज कैश में भुगतान करें।”
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गांधीवादी सांकेतिक विरोध: व्यापारी नेताओं का कहना है कि जिस तरह गांधी जी ने स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया था, उसी तर्ज पर व्यापारी अपनी सुरक्षा और अधिकारों के लिए यह एक दिन का अहिंसक व सांकेतिक सत्याग्रह करेंगे। इसका उद्देश्य ग्राहकों को परेशान करना नहीं, बल्कि नियामक संस्थाओं की आंखें खोलना है।
व्यापारी संगठनों ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), वित्त मंत्रालय और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) को ज्ञापन भेजकर तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है:
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खाता फ्रीज करने के नियमों में ढिलाई: किसी संदिग्ध लेन-देन के मामले में केवल विवादित राशि (Disputed Amount) को ही होल्ड किया जाए, न कि व्यापारी के पूरे चालू खाते को बिना नोटिस सील किया जाए।
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कड़े साइबर सुरक्षा मानक और त्वरित समाधान: फेक पेमेंट ऐप्स और स्क्रीनशॉट फ्रॉड को रोकने के लिए रियल-टाइम वॉयस ऑथेंटिकेशन और सुरक्षा फीचर्स को मजबूत किया जाए।
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करंट अकाउंट पर यूपीआई चार्ज की समाप्ति: छोटे और मध्यम व्यापारियों के चालू खातों पर बैंकों द्वारा लगाए जाने वाले सभी प्रकार के हिडन चार्जेस को तुरंत वापस लिया जाए।
दिल्ली के बाजारों में 2 अक्टूबर को आयोजित होने वाला यह ‘कैश डे’ अभियान डिजिटल इंडिया के बुनियादी ढांचे में सुधार और व्यापारियों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बनता दिख रहा है।
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