
उत्तर प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है और पूरा राज्य काले बादलों की घनी चादर से ढक गया है। आसमान में छाई बादलों की घनघोर घटाओं और लगातार चल रही ठंडी हवाओं ने उमस भरी गर्मी से तो राहत दे दी है, लेकिन साथ ही मौसम विभाग की चेतावनियों ने आम जनजीवन और प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के लगभग 24 जिलों में मूसलाधार बारिश का हाई अलर्ट जारी किया गया है, जबकि राज्य के 61 से अधिक जिलों में बादलों की गड़गड़ाहट के साथ आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी अंचल और तराई के इलाकों तक मानसून पूरी तरह आक्रामक मुद्रा में नजर आ रहा है। ऐसे में यदि आप घर से बाहर निकलने की सोच रहे हैं, तो मौसम के इस बदले हुए मिजाज से जुड़ी हर एक महत्वपूर्ण जानकारी पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
24 जिलों में भारी बारिश का कड़ा पहरा: किन इलाकों पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा संकट?
मौसम विभाग के लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कम से कम 24 जिलों में अगले कुछ दिनों के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इस मानसूनी एक्टिविटी का सबसे ज्यादा असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और तराई बेल्ट के जिलों पर देखने को मिल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के मुताबिक, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर, और संभल जैसे जिलों में बादलों का डेरा सबसे घना है और यहाँ मूसलाधार बारिश के लिए विशेष चेतावनी (रेड और ऑरेंज अलर्ट) दी गई है। इसके अलावा राजधानी लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा और आसपास के तमाम इलाकों में भी रुक-रुक कर तेज बौछारें पड़ने का सिलसिला शुरू हो चुका है। लगातार हो रही इस बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने लगी है, जिससे दफ्तर जाने वाले लोगों और राहगीरों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आकाशीय बिजली (वज्रपात) का जानलेवा खतरा: 61 जिलों में बरती जा रही है विशेष सावधानी
भारी बारिश के साथ-साथ इस बार मौसम विभाग ने सबसे बड़ी चेतावनी आकाशीय बिजली यानी वज्रपात को लेकर जारी की है। आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के करीब 61 जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका बेहद अधिक है। पिछले कुछ दिनों के दौरान प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आकाशीय बिजली की चपेट में आने से कई अनहोनी घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिसके बाद प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जब आसमान में काले घने बादल छाए हों और हवा की गति तेज हो, उस दौरान बादलों के बीच होने वाले घर्षण से अत्यधिक वोल्टेज की बिजली धरती की तरफ आकर्षित होती है। ऐसे में खेतों में काम कर रहे किसानों, खुले मैदानों में मवेशी चरा रहे गोपालकों और सड़क पर यात्रा कर रहे आम नागरिकों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। सरकार और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से लगातार यह अपील की जा रही है कि खराब मौसम के दौरान लोग किसी भी सूरत में बड़े पेड़ों के नीचे या कच्चे टीशर्ट और बिजली के खंभों के पास शरण न लें।
पूर्वी से लेकर पश्चिमी यूपी तक मानसूनी तंत्र सक्रिय: कृषि और जनजीवन पर व्यापक असर
उत्तर प्रदेश में इस समय मानसून के दोबारा सक्रिय होने के पीछे बंगाल की खाड़ी और पश्चिमी राजस्थान के ऊपर बने कम दबाव के चक्रवाती क्षेत्रों को मुख्य वजह माना जा रहा है। मानसून ट्रफ लाइन (Monsoon Trough) इस वक्त उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों से होकर गुजर रही है, जिसके चलते बादलों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। कृषि दृष्टिकोण से देखा जाए तो धान की फसल के लिए इस समय की बारिश बहुत फायदेमंद मानी जा रही है, क्योंकि खेतों में नमी बनी रहने से पौधों की ग्रोथ अच्छी होती है। हालांकि, जिन इलाकों में अत्यधिक जलभराव हो गया है, वहाँ किसानों को अपनी फसलों को बचाने के लिए अतिरिक्त पानी की निकासी के उपाय करने पड़ रहे हैं। इसके साथ ही, लगातार बादलों की घनी परत छाए रहने के कारण अधिकतम तापमान में सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे उमस भरी गर्मी से तो निजात मिली है, लेकिन नमी बढ़ने के कारण वातावरण में सिलन और बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
मौसम विभाग की एडवाइजरी: किन बातों का रखें खास ख्याल और क्या है प्रशासन की तैयारी?
प्रशासन और मौसम विभाग ने आम जनता के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है, जिसके तहत लोगों को पूरी तरह सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बच्चों और बुजुर्गों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने को कहा गया है, खासकर तब जब गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश हो रही हो। जिन जिलों में भारी बारिश का रेड या ऑरेंज अलर्ट है, वहाँ स्थानीय जिला प्रशासन द्वारा स्कूलों के समय में बदलाव या कक्षाओं के संचालन को लेकर आवश्यक स्थानीय निर्णय भी लिए जा रहे हैं। जलभराव वाले मार्गों पर ट्रैफिक पुलिस को मुस्तैद किया गया है ताकि किसी भी तरह का ट्रैफिक जाम न लगे। नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे यात्रा करने से पहले मौसम की ताजा स्थिति की जानकारी अवश्य ले लें और किसी भी आपात स्थिति में जिला नियंत्रण कक्ष (Control Room) या आपदा हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें ताकि समय रहते सहायता पहुंचाई जा सके।
girls globe