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UP CM Awas Yojana: बेघरों को पक्की छत देने के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, अब इन वंचित वर्गों को भी मिलेगा योजना का लाभ

उत्तर प्रदेश के हर बेघर और गरीब नागरिक को सुरक्षित छत मुहैया कराने के संकल्प के साथ योगी आदित्यनाथ सरकार ने मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के नियमों में बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अक्सर देखा गया है कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की तकनीकी शर्तों या सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) की पुरानी सूचियों में नाम न होने के चलते कई अत्यंत जरूरतमंद परिवार पक्के मकान के लाभ से वंचित रह जाते थे। इस समस्या को जड़ से समाप्त करने और समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी मदद पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने राज्य-वित्तपोषित मुख्यमंत्री आवास योजना के पात्रता मानदंडों को और अधिक समावेशी व व्यापक बना दिया है।

शासन स्तर से जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, योजना की प्राथमिकता सूची में कई ऐसे वर्गों को औपचारिक रूप से जोड़ा गया है जो लंबे समय से सामाजिक व आर्थिक असुरक्षा का सामना कर रहे थे:

  • ‘जीरो पॉवर्टी’ अभियान के तहत चिन्हित अति-गरीब परिवार: प्रदेश को अत्यंत गरीबी से मुक्त करने के लिए चलाए जा रहे जीरो पॉवर्टी कैंपेन के सर्वे में चिन्हित सबसे निर्धन परिवारों को अब प्राथमिकता के आधार पर आवास आवंटित किया जाएगा।

  • निराश्रित और युवा विधवा महिलाएं: 18 से 40 वर्ष तक की ऐसी पात्र विधवा महिलाएं, जिनके पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है और कोई स्थाई आय स्रोत नहीं है, उन्हें विशेष श्रेणी के तहत शामिल किया गया है।

  • दिव्यांगजन और गंभीर बीमारी पीड़ित परिवार: परिवार का मुखिया या सदस्य दिव्यांग होने की स्थिति में अथवा कुष्ठ रोग, कालाजार और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से प्रभावित आश्रयहीन परिवारों को प्राथमिकता दी जा रही है।

  • प्राकृतिक आपदा, अग्निपीड़ित और बेसहारा परिवार: बाढ़, भूस्खलन, अग्निकांड या अन्य अप्रत्याशित हादसों में अपने आशियाने को गंवा चुके पीड़ित परिवार।

  • वनटांगिया, मुसहर, कोल, थारू और सहरिया समुदाय: मुख्यधारा से कटे जनजातीय व वंचित ग्रामीण समुदायों को शत-प्रतिशत कवर करने का निर्देश जारी है।

मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत चयनित ग्रामीण लाभार्थियों को पक्का मकान बनाने के लिए ₹1,20,000 (एक लाख बीस हजार रुपये) की आर्थिक सहायता डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से तीन अलग-अलग किस्तों में सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। इसके अतिरिक्त, मकान निर्माण के दौरान लाभार्थी को मनरेगा के अंतर्गत 90 दिनों की अकुशल मजदूरी भी दी जाती है, जिससे अतिरिक्त वित्तीय संबल मिलता है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के समन्वय से मकान के साथ पक्का शौचालय निर्माण कराने के लिए ₹12,000 की अलग राशि भी प्रदान की जाती है।

योजना में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने और बिचौलियों के दखल को समाप्त करने के लिए सरकार ने त्रिस्तरीय सत्यापन व्यवस्था लागू की है। पात्र आवेदकों के फॉर्म ग्राम विकास अधिकारी (VDO), ग्राम पंचायत अधिकारी (VPO) और ब्लॉक स्तर पर सेक्टर प्रभारी द्वारा सत्यापित किए जाते हैं। आवेदकों को एक शपथ-पत्र भी देना होता है कि उन्होंने पूर्व में केंद्र अथवा राज्य सरकार की किसी अन्य सरकारी आवासीय योजना का लाभ नहीं लिया है। यदि कोई व्यक्ति गलत दस्तावेज या तथ्य छुपाकर अपात्र होते हुए लाभ लेता पाया जाता है, तो उससे पूरी राशि की रिकवरी के कड़े नियम तय किए गए हैं।

लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, बरेली, मेरठ समेत प्रदेश के सभी 75 जिलों में विकास खंड अधिकारियों (BDO) और जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (DRDA) को नए पात्र लाभार्थियों की सूची ग्राम सभाओं के माध्यम से संकलित करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इस कदम से प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लाखों बेसहारा परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार हो सकेगा।