
उत्तर प्रदेश की संगम नगरी प्रयागराज एक बार फिर प्रतियोगी छात्रों के बड़े आंदोलन का केंद्र बन गई है। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (Aided) माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) और प्रवक्ता (PGT) भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। पत्थर गिरजाघर पर हफ्तों से चल रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद सैकड़ों छात्र पैदल मार्च करते हुए प्रयागराज स्थित शिक्षा निदेशालय जा पहुंचे और पूरे परिसर का घेराव कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे शिक्षा निदेशालय को भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती के साथ पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया है।
शिक्षा निदेशालय परिसर में आंदोलन का दृश्य बेहद मार्मिक और तनावपूर्ण बना हुआ है। 5 सितंबर से आमरण अनशन पर बैठे चार अभ्यर्थी रामनामी और कफन ओढ़कर जमीन पर लेट गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने खुद को शासन की संवेदनहीनता के सामने ‘जीवित मृत’ मान लिया है और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे। आंदोलन के दौरान ही भूख हड़ताल पर बैठी अभ्यर्थी मीणा सरोज की हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
इस आंदोलन में आक्रोश तब और बढ़ गया जब लंबे समय से भर्ती की तैयारी कर रहे जौनपुर निवासी अभ्यर्थी विजय बहादुर की कथित तौर पर मानसिक तनाव और ब्रेन स्ट्रोक से दुखद मौत हो गई। अभ्यर्थी हाथों में विजय की तस्वीर और कफन लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि नियमों में अचानक बदलाव के चलते वर्षों से तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के सामने उम्र और पात्रता का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
प्रतियोगी छात्रों का विरोध मुख्य रूप से नए शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा लागू किए गए नए नियमों और अर्हताओं को लेकर है। छात्रों का कहना है कि अचानक थोपे गए नए प्रावधानों से प्रदेश के लगभग 7 से 8 लाख अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया से सीधे बाहर होने की कगार पर पहुंच गए हैं:
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स्नातक में 50% अंकों की बाध्यता: नई नियमावली में ग्रेजुएशन में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य कर दिए गए हैं। अभ्यर्थियों का तर्क है कि 10-15 साल पहले स्नातक करने वाले अधिकांश ग्रामीण और सामान्य पृष्ठभूमि के छात्रों के 50% से कम अंक होते थे, जिससे वे अब हमेशा के लिए अयोग्य हो जाएंगे।
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नेगेटिव मार्किंग और टीईटी का पेंच: भर्ती परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग और अतिरिक्त पात्रता शर्तों के जुड़ने से पुराना परीक्षा पैटर्न पूरी तरह बदल गया है।
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विषय संयोजन (Subject Combination) में बदलाव: हिंदी, प्राविधिक कला, संस्कृत, गृह विज्ञान और संगीत जैसे विषयों में पात्रता के कड़े नियम लागू किए गए हैं, जिससे एकल विषय (Single Subject) से डिग्री लेने वाले लाखों छात्र अयोग्य घोषित हो रहे हैं।
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प्रवक्ता (PGT) में बीएड की अनिवार्यता: पूर्व में पीजीटी के लिए केवल संबंधित विषय में परास्नातक (PG) मान्य था, लेकिन नए मसौदे में बीएड को आवश्यक किए जाने से पुराने छात्र असमंजस में हैं।
शिक्षा निदेशालय में डटे आंदोलनकारी छात्रों ने प्रशासन और शासन के समक्ष अपनी मांगें स्पष्ट रखी हैं:
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पुरानी नियमावली के तहत अवसर: सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त लगभग 20,000 टीजीटी-पीजीटी पदों का विज्ञापन पुरानी नियमावली और पुराने परीक्षा पैटर्न पर ही जारी किया जाए।
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कम से कम दो अतिरिक्त मौके: यदि सरकार को नई नियमावली लागू करनी ही है, तो पुराने नियमों से वर्षों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को कम से कम दो विशेष अवसर दिए जाएं।
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विज्ञापन वर्ष 2022 की परीक्षा तिथि घोषित हो: वर्ष 2022 में विज्ञापित टीजीटी-पीजीटी भर्ती की लंबित परीक्षा तिथि तुरंत घोषित की जाए और उसमें सीटें बढ़ाई जाएं।
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डीएम और उच्चाधिकारियों से वार्ता: आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं ने मांग की है कि जिलाधिकारी (DM) खुद धरनास्थल पर आकर छात्रों से सीधे संवाद करें, न कि केवल पुलिस बल के दम पर आवाज दबाई जाए।
शिक्षा निदेशालय के घेराव के बाद आंदोलन को विभिन्न छात्र संगठनों जैसे आइसा (AISA), दिशा और युवा मंच का खुला समर्थन मिल चुका है। समाजवादी पार्टी के शिक्षक एमएलसी डॉ. मानसिंह यादव भी धरनास्थल पर पहुंचे और छात्रों की आवाज को शासन और विधानसभा तक मजबूती से उठाने का आश्वासन दिया। वहीं युवा मंच ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर नई नियमावली से उपजे संकट में हस्तक्षेप की मांग की है।
प्रतियोगी छात्रों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यह लड़ाई अब “आर-पार” की है। यदि शासन ने उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो प्रयागराज का यह घेराव पूरे उत्तर प्रदेश में एक विशाल छात्र आंदोलन का रूप ले लेगा। फिलहाल शिक्षा निदेशालय परिसर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और भारी पुलिस बल हर हलचल पर नजर बनाए हुए है।
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