
विविधताओं और गहरी आध्यात्मिक परंपराओं के देश भारत में ज्योतिष शास्त्र का एक बेहद खास स्थान है। हिंदू सनातन धर्म में नवग्रहों यानी 9 ग्रहों को मानव जीवन का असली नियंता माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इंसान के जन्म के समय आकाश में ग्रहों की जो स्थिति होती है, वही उसके पूरे जीवन की रूपरेखा, सफलता, दुख-सुख और सेहत को तय करती है। अक्सर हम सुनते हैं कि किसी की कुंडली में कोई ग्रह बेहद कमजोर है तो कोई बहुत मजबूत स्थिति में बैठा है। लेकिन वास्तव में कौन सा ग्रह हमारी जिंदगी के किस हिस्से को नियंत्रित करता है और हम कैसे उन्हें अपने पक्ष में कर सकते हैं, इस गुप्त रहस्य से बहुत कम लोग वाकिफ हैं। आइए जानते हैं नवग्रहों का यह पूरा विज्ञान और किस्मत को चमकाने वाले उनके बेहद प्रभावशाली बीज मंत्र।
सूर्य और चंद्रमा: यश, सफलता और मानसिक शांति के असली स्वामी
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सूर्य देव (किंग ऑफ प्लैनेट्स): सूर्य को सभी ग्रहों का राजा और हमारी आत्मा व आत्मविश्वास का कारक माना गया है। अगर आप नौकरी-बिजनेस में अपार सफलता, समाज में ऊंचा पद, यश-कीर्ति और भरपूर शारीरिक ऊर्जा चाहते हैं, तो आपकी कुंडली में सूर्य का मजबूत होना बेहद जरूरी है।
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अचूक बीज मंत्र: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः ॐ सूर्यायः।
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चंद्र देव (मन के राजा): चंद्रमा का सीधा संबंध हमारी भावनाओं, सोच और मानसिक स्थिति से होता है। आज के इस तनावभरे दौर में अगर आप मानसिक सुकून, एकाग्रता, मान-सम्मान और अटके हुए धन की प्राप्ति चाहते हैं, तो चंद्रमा देव की शरण में जाना सबसे उत्तम है।
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अचूक बीज मंत्र: ॐ श्रां श्रीं स्रौं सः सोमाय नमः।
मंगल और बुध: पराक्रम, तेज बुद्धि और करियर में दिलाते हैं शानदार ग्रोथ
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मंगल देव (ऊर्जा के प्रतीक): मंगल ग्रह को साहस, पराक्रम, भूमि और शारीरिक शक्ति का स्वामी माना जाता है। जीवन में आने वाली हर मुसीबत से लड़ने का हौसला, बेहतरीन सेहत और जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में तरक्की पाने के लिए मंगल देव की आराधना सबसे फलदायी मानी गई है।
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अचूक बीज मंत्र: ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:।
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बुध देव (वाणी और बुद्धि के कारक): बुध ग्रह हमारी तार्किक क्षमता, व्यापार, कुशल संवाद शैली और तेज बुद्धि का प्रतिनिधित्व करता है। जो लोग शिक्षा के क्षेत्र में हैं या अपने करियर व व्यापार में एक नई और ऊंची उड़ान भरना चाहते हैं, उन्हें रोजाना बुध देव के मंत्र का जाप करना चाहिए।
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अचूक बीज मंत्र: ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः।
देवगुरु बृहस्पति और शुक्र: सुख-समृद्धि, लंबी उम्र और लग्जरी लाइफ के विधाता
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गुरु बृहस्पति (सबसे शुभ ग्रह): ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को सबसे ज्यादा शुभ और सकारात्मक फल देने वाला ग्रह माना जाता है। उच्च शिक्षा, ज्ञान, धन-दौलत, सुख-समृद्धि, लंबी आयु और संतान सुख की प्राप्ति सिर्फ गुरु की कृपा से ही संभव होती है।
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अचूक बीज मंत्र: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।
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शुक्र देव (वैभव और प्रेम के देवता): शुक्र ग्रह हमारी सुख-सुविधाओं, ऐश्वर्य, ग्लैमर, रोमांस और प्रेम संबंधों को नियंत्रित करता है। अगर आप भी एक लग्जरी लाइफस्टाइल, मनचाहा जीवनसाथी और दांपत्य जीवन में अगाध प्रेम चाहते हैं, तो शुक्र देव को प्रसन्न करना सबसे जरूरी है।
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अचूक बीज मंत्र: ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः।
शनि, राहु और केतु: कर्मों का हिसाब-किताब और अचानक भाग्य बदलने वाले ग्रह
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शनि देव (न्याय के देवता): नवग्रहों में शनि देव को कर्मफल दाता कहा जाता है। वे क्रूर नहीं बल्कि एक निष्पक्ष शिक्षक हैं जो व्यक्ति को उसके अच्छे-बुरे कर्मों का बिल्कुल सटीक फल देते हैं। शनि देव की शुभ दृष्टि हो तो रंक भी राजा बन जाता है और व्यक्ति को गहरी मानसिक शांति, लंबी उम्र और बेशुमार तरक्की हासिल होती है।
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अचूक बीज मंत्र: ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिचराय नम:।
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राहु देव (रहस्यमयी शक्ति): आमतौर पर राहु को एक पापी और क्रूर छाया ग्रह माना जाता है, लेकिन ज्योतिष का नियम है कि अगर राहु कुंडली में शुभ हो जाए, तो व्यक्ति को रातों-रात समाज में अपार मान-सम्मान, बड़ी राजनीतिक शक्ति और देश-दुनिया में नाम-शहरीत दिला देता है।
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अचूक बीज मंत्र: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहुवे नमः।
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केतु देव (अध्यात्म और मोक्ष के दाता): राहु की तरह केतु को भी लोग अक्सर अशुभ मान लेते हैं, जो कि पूरी तरह गलत है। कुंडली में केतु के मजबूत होने से व्यक्ति का भाग्य तेजी से चमकता है, बीमारियां दूर रहती हैं और व्यक्ति का झुकाव अध्यात्म व मोक्ष की ओर बढ़ता है।
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