यूरोप में कुदरत का खौफनाक रूप वसंत में ही पिघलने लगा ब्रिटेन, 24 घंटे में टूटा सदी पुराना रिकॉर्ड

पश्चिमी यूरोप इन दिनों एक ऐसी प्राकृतिक विभीषिका का सामना कर रहा है, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी। ठंडे मौसम के लिए मशहूर ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों में वसंत ऋतु (Spring Season) के दौरान ही जून-जुलाई जैसी जानलेवा और भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि मंगलवार को ब्रिटेन ने महज 24 घंटे के अंदर दूसरी बार अपना सदी पुराना ऑल-टाइम हाई तापमान का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस जानलेवा हीटवेव को देखते हुए कई देशों की सरकारों ने आपातकालीन चेतावनी जारी की है। वहीं, गर्मी से बेहाल होकर राहत पाने की कोशिश में ब्रिटेन और फ्रांस के समुद्र, झीलों और पूल्स में डूबने से कई लोगों की दर्दनाक मौत की खबर है।

ब्रिटेन और फ्रांस में ध्वस्त हुए ऐतिहासिक रिकॉर्ड, दर्ज की गई दुर्लभ “ट्रॉपिकल नाइट”

ब्रिटेन के मौसम विभाग (Met Office) के मुताबिक, लंदन के मशहूर क्यू गार्डन्स में पारा 35.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि ठीक एक दिन पहले यहीं पर बना 34.8 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड भी टूट गया। इन शुरुआती और हैरान करने वाले आंकड़ों ने साल 1922 में बने और 1944 में दोहराए गए 32.8 डिग्री सेल्सियस के दशकों पुराने रिकॉर्ड को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया है।

इसके साथ ही लंदन में एक बेहद दुर्लभ “ट्रॉपिकल नाइट” (उष्णकटिबंधीय रात) भी दर्ज की गई है, जिसका सीधा मतलब यह है कि रात के समय भी यहां का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिरा।

उधर फ्रांस में भी सूर्य देवता आग उगल रहे हैं। सोमवार को दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस का तापमान रिकॉर्ड तोड़ते हुए 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और यहां भी रात का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा। फ्रांस के राष्ट्रीय मौसम विभाग ‘मेटियो-फ्रांस’ ने इस विनाशकारी मौसम का कारण बताते हुए कहा कि एक शक्तिशाली हाई-प्रेशर सिस्टम की वजह से पूरे इलाके में ‘हीट डोम’ (Heat Dome) जैसी खतरनाक स्थिति बन गई है। इस वजह से तापमान इस सीजन के सामान्य औसत तापमान से 10 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा ऊपर चला गया है।

क्लाइमेट चेंज का सबसे बड़ा अलार्म: वैज्ञानिक बोले- हैरान करने वाली आपदा

धरती के लगातार बढ़ते तापमान के साथ अब ग्लोबल वार्मिंग और मौसम का मिजाज तेजी से अप्रत्याशित और हिंसक हो रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का साफ कहना है कि बेमौसम और गैर-पारंपरिक ठंडी जगहों पर आ रही ये जानलेवा आपदाएं इंसानी वजूद को भारी खतरे में डाल रही हैं।

आयरलैंड की मेनुथ यूनिवर्सिटी में ICARUS क्लाइमेट रिसर्च सेंटर के निदेशक पीटर थॉर्न ने इस संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “अब इस बात में कोई शक या दोराय नहीं बची है कि ग्रीनहाउस गैसों के अंधाधुंध उत्सर्जन से हो रहे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण ऐसी घातक हीटवेव की घटनाएं न सिर्फ बढ़ रही हैं, बल्कि बेहद आक्रामक और गंभीर रूप लेती जा रही हैं।” उन्होंने आगे कहा कि ब्रिटेन और फ्रांस जैसे ठंडे देशों में जिस रफ्तार से रिकॉर्ड टूट रहे हैं, वह बेहद डरावना और हैरान करने वाला है।

बिना AC के तड़प रहे हैं लोग, मेट्रो ठप और पहाड़ों पर भड़की आग

आमतौर पर सुहावने और ठंडे मौसम वाले देश ब्रिटेन के घर, स्कूल, दफ्तर और सार्वजनिक परिवहन एयर कंडीशनिंग (AC) सिस्टम के हिसाब से नहीं बने हैं। ऐसे में बिना एसी वाले लंदन सबवे (मेट्रो) में सफर करने वाले लाखों यात्री पसीने से तर-बतर और बेहाल नजर आए। भीषण गर्मी के कारण पटरियों पर धुआं उठने की खबर के बाद लंदन के सबसे व्यस्त वाटरलू स्टेशन से आने-जाने वाली ट्रेनों की आवाजाही को पूरी तरह रोकना पड़ा।

उधर स्कॉटलैंड में भी हालात बदतर हो गए, जहां एडिनबर्ग के ऊपर मौजूद ऐतिहासिक पहाड़ी ‘आर्थर्स सीट’ की सूखी घास में भीषण आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए दमकलकर्मियों को रात भर कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इसी भयावह स्थिति को देखते हुए यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी ने देश के बड़े हिस्से के लिए गुरुवार तक ‘एम्बर हेल्थ अलर्ट’ (Amber Health Alert) जारी किया है और दिन के समय बुजुर्गों व बच्चों को घरों के अंदर रहने की सख्त सलाह दी है।

गर्मी से राहत पाने के चक्कर में गई कई जानें, समुद्र तटों पर बिछी लाशें

इस बेमौसम गर्मी और अचानक आई हीटवेव के कारण यूरोप में जानमाल का भी भारी नुकसान हुआ है। चूंकि गर्मी तय समय से बहुत पहले आ गई है, इसलिए समुद्र तटों पर लाइफगार्ड्स की नियमित तैनाती भी नहीं हो सकी थी, जो इस त्रासदी में सबसे बड़ा कारण बनी।

  • ब्रिटेन का हाल: प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, गर्मी से तुरंत निजात पाने के लिए झीलों, तालाबों और खतरनाक जलाशयों में उतरे कम से कम चार किशोरों की डूबने से मौत हो गई। वहीं, दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड में समुद्र की तेज लहरों में डूबने से एक 60 वर्षीय बुजुर्ग ने अपनी जान गंवा दी।

  • फ्रांस में हाहाकार: फ्रांसीसी सरकार की प्रवक्ता मौड ब्रेगेन ने आधिकारिक बयान में बताया कि भीषण गर्मी और हीटवेव से जुड़ी कम से कम सात मौतों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से पांच लोग समुद्र और स्विमिंग पूल में डूबने से मरे हैं, जबकि दो खिलाड़ियों की मौत खेल प्रतियोगिताओं के दौरान हीट स्ट्रोक की वजह से हुई। फ्रांस के गिरोंदे इलाके के लोकप्रिय रिसॉर्ट्स में भी रविवार को समुद्र में डूबने से दो पर्यटकों की मौत हो गई।

स्पेन और इटली का भी हुआ बुरा हाल, मई में ही ‘मिड-समर’ जैसी तड़प

इस बेमौसम और खौफनाक गर्मी का दायरा अब स्पेन और इटली तक फैल गया है। स्पेनिश मौसम विभाग के प्रवक्ता रूबेन डेल कैम्पो ने डराने वाला बयान देते हुए कहा, “मई के महीने में हमें ऐसा तापमान देखने को मिल रहा है, जो आमतौर पर जुलाई-अगस्त की भीषण गर्मियों (मिड-समर) के बीच में होता है।”

वीकेंड पर स्पेन के सेविले शहर का तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था, जिसने इबेरियन प्रायद्वीप के बड़े हिस्से में सामान्य से 5 से 10 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान दर्ज किया। इसके अलावा, मंगलवार को इटली की ऐतिहासिक राजधानी रोम में भी पारा 32 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया, जिससे पूरा यूरोप इस वक्त भीषण गर्मी से बुरी तरह कराह रहा है।