
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक स्मृति द्वार (गेट) को लेकर सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। मामला मलिहाबाद और काकोरी क्षेत्र के बीच स्थित ‘मलिहा पासी स्मृति द्वार’ से जुड़ा है, जिसे हटाने की मांग को लेकर एक पक्ष अड़ा हुआ है, जबकि दूसरा पक्ष इसके सम्मान के लिए लामबंद हो रहा है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
क्या है पूरा विवाद?
लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में पासी समाज के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने के लिए ‘मलिहा पासी स्मृति द्वार’ का निर्माण कराया गया था। विवाद तब शुरू हुआ जब दूसरे पक्ष के लोगों ने इस गेट के नाम और स्थान पर आपत्ति जताई। विरोध करने वाले पक्ष का तर्क है कि इस गेट के कारण क्षेत्र के ऐतिहासिक और सामाजिक ताने-बाने पर असर पड़ रहा है और इसे हटाया जाना चाहिए।
भारी पुलिस बल तैनात, छावनी में तब्दील इलाका
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। काकोरी और मलिहाबाद के सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। हिंदू-मुस्लिम या जातीय रंग देने की कोशिशों को नाकाम करने के लिए खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हैं।
दो गुटों में बढ़ी तकरार
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समर्थक पक्ष: पासी समाज और कई स्थानीय संगठनों का कहना है कि यह द्वार उनके पूर्वजों और इतिहास के सम्मान का प्रतीक है। उनका आरोप है कि कुछ लोग जानबूझकर सामाजिक विद्वेष फैलाने के लिए इसे हटाने की मांग कर रहे हैं।
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विरोध पक्ष: दूसरे गुट का कहना है कि गेट का निर्माण नियमों की अनदेखी कर किया गया है और इससे एक विशेष समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है।
प्रशासन की अपील: शांति बनाए रखें
लखनऊ पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने दोनों पक्षों के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ बैठक की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और कानून के दायरे में रहकर ही कोई फैसला लिया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर रखी जा रही है ताकि कोई भ्रामक सूचना या अफवाह न फैलाई जा सके।
फिलहाल इलाके में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनाव को देखते हुए पीएसी (PAC) की टुकड़ियों को भी मुस्तैद रखा गया है।
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