तेलुगु हनुमान जयंती 2026: आज बजरंगबली को प्रसन्न करने का महासंयोग, भूलकर भी न करें ये गलतियां,जानें विधि

आज 12 मई 2026 को दक्षिण भारत, विशेषकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ‘तेलुगु हनुमान जयंती’ का पावन पर्व मनाया जा रहा है। चैत्र पूर्णिमा के बजाय वैशाख माह के 10वें दिन मनाई जाने वाली इस जयंती का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा करने पर मंगल दोष, शनि की बाधाएं और जीवन के समस्त कष्टों का अंत हो जाता है। यदि आप भी आज पवनपुत्र का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो पूजा विधि और सावधानियों का विशेष ध्यान रखें।

हनुमान पूजा की सरल और सटीक विधि

आज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें। मंदिर या घर के पूजा स्थल पर हनुमान जी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं।

  • सिंदूर लेपन: हनुमान जी को चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर चढ़ाएं। यह उन्हें अत्यंत प्रिय है और इससे सुख-समृद्धि आती है।

  • भोग: उन्हें बेसन के लड्डू, बूंदी या केले का भोग लगाएं।

  • पाठ: आज के दिन ‘हनुमान चालीसा’, ‘बजरंग बाण’ या ‘सुंदरकांड’ का पाठ करना विशेष फलदायी होता है।

  • पुष्प अर्पण: लाल रंग के फूल, विशेषकर गेंदा या गुलाब, बजरंगबली को अर्पित करें।

पूजा के दौरान इन बातों का रखें खास ख्याल

हनुमान जी की पूजा में शुचिता और नियमों का पालन अनिवार्य है। तेलुगु हनुमान जयंती पर पूजा करते समय इन बातों का ध्यान रखें:

  1. ब्रह्मचर्य का पालन: आज के दिन शारीरिक और मानसिक रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करें।

  2. सात्विकता: घर में तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) का प्रयोग बिल्कुल न करें।

  3. सूतक काल: यदि परिवार में जन्म या मरण का सूतक लगा हो, तो मूर्ति स्पर्श न करें, केवल मानसिक जाप करें।

  4. क्रोध का त्याग: हनुमान जी शांति और बल के प्रतीक हैं, इसलिए आज किसी पर क्रोध न करें और न ही किसी का अपमान करें।

क्यों मनाई जाती है 50 दिनों बाद यह जयंती?

उत्तर भारत में जहां चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है, वहीं दक्षिण भारत में चैत्र पूर्णिमा से शुरू हुई 41 दिनों की ‘हनुमान दीक्षा’ का समापन वैशाख कृष्ण पक्ष की दशमी को होता है। इसे हनुमान जी के एक विशेष स्वरूप की आराधना से जोड़कर देखा जाता है। आज का दिन उन भक्तों के लिए बहुत खास है जो शनि की साढ़ेसाती या कुंडली में भारी मंगल दोष से परेशान हैं। आज सुंदरकांड का पाठ करने से मानसिक शांति और आत्मविश्वास में अद्भुत वृद्धि होती है।