
भारत की प्रमुख फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स कंपनी स्विगी (Swiggy) ने एक बड़ा कॉर्पोरेट मील का पत्थर हासिल कर लिया है। कंपनी की 13वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों ने स्विगी को ‘इंडियन-ओन्ड एंड कंट्रोल्ड कंपनी’ (IOCC) में बदलने के विशेष प्रस्ताव को भारी बहुमत (99.99% से अधिक वोट) के साथ मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव के तहत कंपनी में कुल विदेशी हिस्सेदारी (FDI/FPI आदि) की अधिकतम सीमा 49.5% पर सीमित (Cap) कर दी गई है। इससे पहले मई में ऐसा ही प्रस्ताव आवश्यक समर्थन न मिलने के कारण अटक गया था, लेकिन इस बार शेयरधारकों ने कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) में बदलाव को भी हरी झंडी दे दी है।
भारतीय प्रमोटर्स के हाथ में रहेगी कमान और बोर्ड नियंत्रण
नए बदलावों के तहत स्विगी के सह-संस्थापक श्रीहर्ष मजेटी और फणी किशन अडेपल्ली के पास कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में बहुमत और महत्वपूर्ण फैसले लेने का पूर्ण अधिकार बना रहेगा। फेमा (FEMA) और भारत सरकार के विदेशी निवेश नियमों के अनुसार, किसी कंपनी को ‘भारतीय स्वामित्व और नियंत्रण’ (IOCC) वाली कंपनी तभी माना जाता है, जब 50% से अधिक मालिकाना हक भारतीय नागरिकों या घरेलू संस्थाओं के पास हो और कंपनी के बोर्ड का नियंत्रण भी भारतीय निवासियों के हाथों में हो। वर्तमान में घरेलू संस्थागत निवेशकों (जैसे SBI MF, HDFC MF, ICICI Prudential) और भारतीय निवेशकों की हिस्सेदारी 50% से अधिक हो चुकी है।
क्विक कॉमर्स और Instamart के लिए क्यों गेमचेंजर है यह फैसला
स्विगी के भारतीय कंपनी बनने का सबसे बड़ा फायदा उसके क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट (Instamart) को मिलेगा। भारतीय नियमों के मुताबिक, जिन ई-कॉमर्स कंपनियों में विदेशी निवेश 50% से ज्यादा होता है, वे सीधे सामान खरीदकर बेचने (Inventory-led Model) के बजाय केवल एक ‘मार्केटप्लेस’ की तरह काम कर सकती हैं।
अब IOCC का दर्जा मिलने के बाद स्विगी इन्वेंट्री-लेड मॉडल पर पूरी आजादी से काम कर सकेगी। इसका मतलब है कि कंपनी खुद सामान खरीदकर अपने डार्क स्टोर्स में स्टोर कर सकेगी और सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकेगी। इससे स्विगी की सप्लाई चेन मजबूत होगी, डिलीवरी का समय और सुधरेगा तथा कमीशन पर निर्भर रहने के बजाय कंपनी का प्रॉफिट मार्जिन और रेवेन्यू कई गुना बढ़ सकेगा। प्रतिद्वंद्वी ब्लिंकिट (Blinkit) भी इसी इन्वेंट्री मॉडल पर तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है।
ग्राहकों और निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?
आम उपभोक्ताओं के लिए इस बदलाव का मतलब है कि उन्हें इंस्टामार्ट पर प्रोडक्ट की बेहतर उपलब्धता, तेज डिलीवरी और प्रतिस्पर्धी कीमतें देखने को मिल सकती हैं। वहीं शेयर बाजार और निवेशकों के नजरिए से देखें तो रेगुलेटरी अनुपालन आसान होने से कंपनी की बैलेंस शीट और ऑपरेशनल क्षमता और मजबूत होगी। स्विगी विदेशी कंपनियों के कड़े ई-कॉमर्स नियमों के दायरे से बाहर आकर घरेलू कंपनी की तरह तेजी से नए प्रोडक्ट्स और श्रेणियों में विस्तार कर सकेगी।
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