
दुनिया अभी पिछले कुछ सालों की महामारियों के खौफ से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि एक और खतरनाक वायरस ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। भारत में इबोला संक्रमण (Ebola Infection) का एक संदिग्ध मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, युगांडा से भारत आई एक महिला में इबोला वायरस के हल्के लक्षण पाए जाने के बाद उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टर उसकी सेहत पर लगातार नजर रख रहे हैं।
भारत के अलावा इस समय यूरोप और अफ्रीका के कई देशों में भी इबोला के मामलों में तेजी देखी जा रही है। इटली के मिलान शहर में भी इबोला संक्रमण के 2 नए मामले दर्ज किए गए हैं। इस उभरते संकट पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पूर्व चीफ साइंटिस्ट डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने गहरा दुख और चिंता जताई है। उन्होंने इस स्थिति को ‘इंटरनेशनल ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी’ करार दिया है।
सबसे बड़ी चुनौती: टेस्ट, इलाज और वैक्सीन का न होना
ज़ी न्यूज़ (Zee News) की रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने बताया कि इस समय फैल रहा वायरस इबोला का एक बेहद दुर्लभ स्ट्रेन है। सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि दुनिया के पास फिलहाल इस विशेष स्ट्रेन के लिए न तो कोई सटीक डायग्नोस्टिक टेस्ट (जांच) उपलब्ध है, न ही इलाज के पुख्ता विकल्प और न ही इससे बचाव के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन मौजूद है।
क्यों हफ्तों तक छुपा रहा यह वायरस?
डॉ. स्वामीनाथन ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि जब शुरुआती मरीजों की सामान्य इबोला टेस्ट से जांच की गई, तो उनकी रिपोर्ट ‘निगेटिव’ आई थी। जांच में पकड़ न आने के कारण यह वायरस कई हफ्तों तक चुपचाप लोगों के बीच फैलता रहा। हालांकि, अब वैज्ञानिकों ने इसकी स्ट्रेन सीक्वेंसिंग (जीनोम जांच) पूरी कर ली है और यह साफ हो चुका है कि यह इबोला का “बुंडीबुग्यो स्ट्रेन” (Bundibugyo strain) है।
क्या भारत पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा?
भारत में इस संदिग्ध मामले के आने के बाद आम जनता के बीच डर का माहौल न बने, इसके लिए डॉ. स्वामीनाथन ने स्थिति को स्पष्ट किया है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य मंत्रालय और सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी की जा रही सटीक जानकारियों पर लोगों को भरोसा करना चाहिए।
फिलहाल देश में पैनिक या घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है। हंटा वायरस या इबोला को लेकर भारत पर कोई तत्काल बड़ा खतरा नहीं मंडरा रहा है। लेकिन, ग्लोबलाइजेशन (वैश्वीकरण) और हवाई यात्राओं के इस आधुनिक दौर में कोई भी देश खुद को दुनिया से पूरी तरह अलग थलग नहीं रख सकता। इसलिए भारत के नागरिकों को डरने के बजाय अधिक सावधान, जागरूक और चिकित्सा स्तर पर तैयार रहने की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में नए और पुराने वायरस बार-बार उभरकर सामने आते रहेंगे, जिसके लिए हमारे हेल्थ सिस्टम को हमेशा अपग्रेड रहना होगा।
इबोला के शुरुआती लक्षण: सामान्य वायरल जैसे संकेत
इबोला वायरस के लक्षण शुरुआत में किसी आम फ्लू या मौसमी वायरल जैसे ही दिखाई देते हैं, जिससे लोग इसे पहचानने में गलती कर बैठते हैं। नीचे दी गई तालिका से आप इसके लक्षणों को आसानी से समझ सकते हैं:
| श्रेणी | इबोला के प्रमुख शुरुआती लक्षण |
| शारीरिक समस्याएं | तेज बुखार आना, अचानक सिरदर्द होना और कमजोरी महसूस होना। |
| पाचन संबंधी | लगातार जी मिचलाना (मतली) और उल्टी की शिकायत होना। |
| त्वचा पर असर | शरीर और पीठ पर लाल रंग के छोटे-छोटे चकत्ते (Rashes) उभर आना। |
नोट: इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर खुद से दवा लेने (Self-Medication) के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना और ट्रेवल हिस्ट्री बताना बेहद जरूरी है।
भारत बनेगा संकटमोचक: सीरम इंस्टीट्यूट और ऑक्सफोर्ड मिलकर बना रहे हैं वैक्सीन
इस गंभीर संकट के बीच एक बहुत बड़ी और उम्मीद जगाने वाली खबर भी सामने आई है। डॉ. सौम्या स्वामीनाथन के मुताबिक, इबोला से निपटने में भारत की मेडिकल और रिसर्च क्षमताएं दुनिया के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती हैं। भारत अपने ‘इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ (ICMR) के माध्यम से मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज के तेजी से विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है, जिससे इबोला का इलाज करना बेहद आसान हो जाएगा।
इसके साथ ही, दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने हाथ मिला लिया है। दोनों संस्थान मिलकर इबोला के इस विशेष ‘बुंडीबुग्यो स्ट्रेन’ के खिलाफ एक नई और प्रभावी वैक्सीन तैयार करने पर दिन-रात काम कर रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि बहुत जल्द यह वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल पूरे कर बाजार में आ जाएगी, जिसके बाद इबोला के इस नए खतरे को पूरी तरह खत्म किया जा सकेगा।
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