Wednesday , August 5 2026

Surya Grahan 2026: 12 अगस्त को लगेगा साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण, जानें भारत में दिखेगा या नहीं; सूतक काल का समय, नियम और राशियों पर प्रभाव

नई दिल्ली: खगोल विज्ञान प्रेमी और ज्योतिष में रुचि रखने वाले लोगों के लिए वर्ष 2026 एक से बढ़कर एक अद्भुत खगोलीय घटनाओं का साक्षी बन रहा है। साल का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी माह में रिंग ऑफ फायर के रूप में देखा गया था और अब संपूर्ण विश्व 12 अगस्त 2026 को लगने वाले वर्ष के दूसरे और अंतिम सूर्य ग्रहण की ओर देख रहा है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह एक अत्यंत दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होगा, जिसमें चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच इस प्रकार आ जाएगा कि सूर्य का प्रकाश पूरी तरह से ढक जाएगा और दिन में ही अंधेरा छा जाएगा। वैदिक पंचांग और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह ग्रहण सावन माह की अमावस्या तिथि को घटित होने जा रहा है।

इस महा-खगोलीय घटना को लेकर आम जनता के मन में कई प्रकार के प्रश्न उठ रहे हैं—जैसे कि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा या नहीं? इसका सूतक काल कब से शुरू होगा? मंदिर के कपाट बंद रहेंगे या खुले? और इसका विभिन्न 12 राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा? आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक सूर्य ग्रहण से जुड़ी हर एक छोटी-बड़ी और महत्वपूर्ण जानकारी।

सूर्य ग्रहण 2026 की सटीक तारीख और भारतीय समयानुसार टाइमिंग

अंतरराष्ट्रीय खगोलीय गणना और भारतीय पंचांग के अनुसार साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण बुधवार, 12 अगस्त 2026 को लगेगा। भारतीय मानक समय (IST) के मुताबिक यह ग्रहण रात के समय शुरू होगा।

  • सूर्य ग्रहण का प्रारंभ: 12 अगस्त 2026 की रात 9:04 मिनट पर।

  • सूर्य ग्रहण का परमग्रास (पीक टाइम): 12 अगस्त 2026 की रात 11:17 मिनट के आसपास।

  • सूर्य ग्रहण का समापन: 13 अगस्त 2026 की तड़के 1:30 बजे से लेकर 4:25 बजे तक (स्थान के आधार पर)।

  • पूर्णता की अवधि (Totality Duration): मध्य मार्ग में सूर्य लगभग 2 मिनट 18 सेकंड के लिए पूरी तरह चंद्रमा की ओट में छिपा रहेगा।

चूँकि यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात के समय घटित हो रहा है, इसलिए उस समय भारतीय क्षेत्र में सूर्य अस्त हो चुका होगा।

क्या भारत में दिखाई देगा 12 अगस्त का यह सूर्य ग्रहण?

भारतीय खगोलविदों और ज्योतिषियों ने स्पष्ट कर दिया है कि 12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। जब यह घटना घटेगी, उस समय भारतीय उपमहाद्वीप में रात का समय होगा और सूर्य क्षितिज से नीचे जा चुका होगा। इसलिए भारत के किसी भी शहर (जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, पटना या जयपुर) में इसे प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा।

हालांकि, दुनिया के अन्य हिस्सों में इसका अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल के उत्तरी हिस्से और रूस के ध्रुवीय क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। स्पेन के प्रसिद्ध शहरों जैसे बिलबाओ, ज़रागोज़ा और वालेंसिया में शाम के सूर्य अस्त होने से ठीक पहले यह नजारा बेहद मनोरम होगा। यूरोप के अधिकांश देशों, उत्तरी अमेरिका, कनाडा और उत्तर-पश्चिम अफ्रीका में इसे आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse) के रूप में देखा जा सकेगा।

सूतक काल का समय और धार्मिक मान्यताओं का सच

हिन्दू सनातन परंपरा में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल का विशेष महत्व माना जाता है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 12 घंटे पहले लागू हो जाता है। सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ, मांगलिक कार्य, भोजन पकाना और खाना, तथा मंदिरों में स्पर्श पूरी तरह से वर्जित रहता है।

लेकिन धर्मशास्त्रों का अकाट्य नियम है कि “यस्मिन देशे न दृश्यते, तस्मिन देशे न सूतकम्” अर्थात जिस भू-भाग पर कोई ग्रहण नग्न आंखों से दिखाई नहीं देता है, वहां उसका सूतक काल और धार्मिक प्रतिबंध लागू नहीं होते हैं।

चूंकि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में अदृश्य रहेगा, इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि:

  • भारत में मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे और दैनिक पूजा-अर्चना सामान्य रूप से जारी रहेगी।

  • भोजन बनाने, खाने, जल पीने या यात्रा करने पर कोई पाबंदी नहीं होगी।

  • गर्भवती महिलाओं, वृद्धों और बच्चों के लिए भी अलग से कठिन नियम पालने की कोई आवश्यकता नहीं है।

  • दैनिक दिनचर्या, कार्यालयीन कार्य और शुभ कार्य बिना किसी भय के किए जा सकते हैं।

सावन अमावस्या, 6 ग्रहों की युति और पर्सिड्स उल्कापिंडों का महा-संगम

12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण केवल एक साधारण ग्रहण नहीं है, बल्कि यह तीन अति-दुर्लभ खगोलीय घटनाओं का एक अनोखा संगम होने जा रहा है।

पहला, यह ग्रहण सावन माह की अमावस्या तिथि पर पड़ रहा है, जिसे तंत्र साधना, पितृ तर्पण और मंत्र सिद्धि के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।

दूसरा, इसी दिन तड़के सुबह आसमान में 6 प्रमुख ग्रह (बुध, गुरु, मंगल, यूरेनस, शनि और नेप्च्यून) एक सीधी कतार में दिखाई देंगे, जिसे ‘प्लैनेट परेड’ (Planet Parade) कहा जाता है।

तीसरा, 12 और 13 अगस्त की रात को ही दुनिया की सबसे प्रसिद्ध उल्कापिंडों की बारिश ‘पर्सिड्स मिटिओर शॉवर’ (Perseid Meteor Shower) अपने उच्चतम शिखर (Peak) पर होगी। एक ही दिन सूर्य ग्रहण, 6 ग्रहों की परेड और टूटते तारों की आतिशबाजी का यह अद्भुत योग खगोल विज्ञान के इतिहास में दर्ज होने वाला है।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण: 12 राशियों पर कैसा रहेगा सूर्य ग्रहण का प्रभाव?

हालांकि भारत में भौतिक रूप से ग्रहण दिखाई नहीं देगा, फिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य का यह परिवर्तन और राहु-केतु का प्रभाव सौरमंडल की ऊर्जा को प्रभावित करता है। इस समय सूर्य कर्क राशि को छोड़कर सिंह राशि में प्रवेश की तैयारी में होगा। आइए जानें सभी 12 राशियों पर इसका संभावित प्रभाव:

  • मेष (Aries): कार्यक्षेत्र में धैर्य बनाए रखें। जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें, आध्यात्मिक कार्यों से मन शांत रहेगा।

  • वृषभ (Taurus): वित्तीय मामलों में सावधानी बरतें। गैर-जरूरी खर्चों पर नियंत्रण रखें।

  • मिथुन (Gemini): नए अवसर प्राप्त होंगे, संवाद कौशल मजबूत होगा।

  • कर्क (Cancer): मानसिक तनाव से बचें, परिजनों के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

  • सिंह (Leo): नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी, अहंकार से दूर रहकर निर्णय लें।

  • कन्या (Virgo): कार्यों की समीक्षा करें, सोच-समझकर निवेश करना फायदेमंद रहेगा।

  • तुला (Libra): साझेदारी के कामों में संतुलन बनाएं, मान-सम्मान में वृद्धि होगी।

  • वृश्चिक (Scorpio): आत्म-चिंतन का समय है, आर्थिक अनुशासन लाभ देगा।

  • धनु (Sagittarius): शिक्षा और यात्रा से जुड़े योग बनेंगे, सकारात्मक सोच बनाए रखें।

  • मकर (Capricorn): कार्यस्थल पर जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, सेहत पर ध्यान दें।

  • कुंभ (Aquarius): रचनात्मक विचारों से सफलता मिलेगी, संबंधों में मधुरता रखें।

  • मीन (Pisces): धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी, वाद-विवाद से दूर रहें।

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें: विशेष उपाय

भले ही भारत में सूतक काल मान्य न हो, लेकिन जो लोग आध्यात्मिक कल्याण और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति चाहते हैं, वे इस दिन कुछ आसान शास्त्रीय उपाय अपना सकते हैं:

  • मंत्र जाप: ग्रहण की अवधि के दौरान गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या ‘ॐ सूर्याय नमः’ का मानसिक जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

  • दान-पुण्य: अमावस्या और ग्रहण के संयोग पर जरूरतमंदों को हरी मूंग, अनाज, वस्त्र या तिल का दान करना शुभ माना गया है।

  • तुलसी पत्ता: भोजन और जल की सात्विकता बनाए रखने के लिए उसमें तुलसी का पत्ता या कुशा घास डालने की प्राचीन परंपरा है।

  • वैज्ञानिक सावधानी: जो लोग विदेश में (स्पेन, आइसलैंड आदि) इस ग्रहण को देखने वाले हैं, वे कभी भी नग्न आंखों से सूर्य को न देखें। ग्रहण देखने के लिए केवल ISO 12312-2 प्रमाणित सोलर फिल्टर चश्मों का ही प्रयोग करें।

भारत में रहने वाले खगोल प्रेमी इस दुर्लभ सूर्य ग्रहण का सीधा लाइव प्रसारण नासा (NASA) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के आधिकारिक यूट्यूब चैनलों और वेब पोर्टलों पर ऑनलाइन देख सकेंगे। 12 अगस्त 2026 की यह रात विज्ञान और अध्यात्म दोनों के प्रेमियों के लिए बेहद यादगार साबित होने वाली है।