
तेहरान/दुबई। वैश्विक ऊर्जा व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। क्षेत्रीय तनाव और अमेरिका के साथ जारी टकराव के बीच, ईरान ने समुद्र में अपने संप्रभु अधिकारों का हवाला देते हुए एक ‘नया गवर्नेंस सिस्टम’ लागू कर दिया है। अब इस रास्ते से गुजरने वाले किसी भी अंतरराष्ट्रीय जहाज को ईरान से पहले इजाजत (Transit Permit) लेनी होगी।
क्या है ईरान का नया ‘समुद्री कानून’?
ईरान के सरकारी मीडिया और ‘प्रेस टीवी’ की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ (PGSA) नाम की एक नई एजेंसी बनाई है। अब इस रास्ते का इस्तेमाल करने वाली सभी शिपिंग कंपनियों के लिए नए प्रोटोकॉल तय किए गए हैं:
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ईमेल द्वारा अनुमति: किसी भी जहाज को स्ट्रेट में प्रवेश करने से पहले ईरानी अधिकारियों द्वारा निर्धारित ईमेल एड्रेस पर अपनी जानकारी भेजनी होगी और वहां से हरी झंडी मिलने के बाद ही आगे बढ़ना होगा।
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Vessel Information Declaration: जहाजों को एक विस्तृत फॉर्म भरना होगा, जिसमें जहाज की पहचान, मालिकाना हक, चालक दल (Crew) की राष्ट्रीयता और उसमें लदे कार्गो (Cargo) की पूरी जानकारी देनी होगी।
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निर्धारित कॉरिडोर: ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने चेतावनी दी है कि जहाजों को केवल ईरान द्वारा तय किए गए ‘मैरीटाइम कॉरिडोर’ से ही गुजरना होगा। तय रास्ते से भटकने पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
क्यों अहम है यह फैसला?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री रास्ता है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत (पांचवां हिस्सा) गुजरता है।
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वर्चस्व की लड़ाई: 28 फरवरी 2026 से जारी सैन्य तनाव के बाद ईरान अब इस रास्ते पर केवल सैन्य नियंत्रण ही नहीं, बल्कि ‘प्रशासनिक नियंत्रण’ (Sovereign Governance) भी चाहता है।
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टोल टैक्स की संभावना: रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान कुछ गैर-मित्र देशों के जहाजों से इस रास्ते के इस्तेमाल के बदले ‘टोल’ या ‘ट्रांजिट फीस’ वसूलने पर भी विचार कर रहा है, जो लाखों डॉलर तक हो सकती है।
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प्रतिबंधों का जवाब: अमेरिका के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ (Project Freedom) और आर्थिक प्रतिबंधों के जवाब में ईरान ने इस रणनीतिक चोकपॉइंट को अपनी ‘ढाल’ बना लिया है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और विवाद
ईरान के इस कदम को अमेरिका और उसके सहयोगियों ने अंतरराष्ट्रीय कानून (UNCLOS) का उल्लंघन बताया है। समुद्री नियमों के अनुसार, होर्मुज एक ‘इंटरनेशनल स्ट्रेट’ है जहां सभी देशों के जहाजों को ‘ट्रांजिट पैसेज’ (बिना रोक-टोक आने-जाने) का अधिकार है। हालांकि, ईरान का कहना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए ब्लॉकएड और युद्ध जैसी स्थिति के कारण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह नियम जरूरी हैं।
ग्लोबल इकोनॉमी पर असर
ईरान द्वारा इस रास्ते को नियंत्रित करने की कोशिशों से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और शिपिंग इंश्योरेंस के दामों में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे देश अपनी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पहले ही ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं।
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