सम्राट चौधरी कैबिनेट के उन मंत्रियों की कहानी जिन्होंने जमीन से शुरू किया सफर

पटना: बिहार की राजनीति में अक्सर बड़े चेहरों और रसूखदार परिवारों की चर्चा होती है, लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार में कुछ ऐसे भी नाम हैं जिन्होंने लोकतंत्र की सबसे निचली सीढ़ी से अपना सफर शुरू किया। ‘लाइव हिंदुस्तान’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कैबिनेट में कई ऐसे मंत्री शामिल हैं जो कभी मुखिया या वार्ड पार्षद के रूप में जनता की सेवा करते थे और आज राज्य की नीतियों का निर्धारण कर रहे हैं।

केदार गुप्ता: मुखिया से कैबिनेट मंत्री तक का सफर

मुजफ्फरपुर की कुढ़नी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक और वर्तमान मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता का राजनीतिक ग्राफ बेहद प्रेरणादायक है।

  • शुरुआत: उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एक पंचायत प्रतिनिधि के रूप में की थी। वे सबसे पहले अपने गांव के मुखिया चुने गए थे।

  • सफलता: जमीन पर पकड़ और संगठन के प्रति निष्ठा के कारण भाजपा ने उन्हें मौका दिया। 2015 और फिर उपचुनाव में जीत दर्ज कर उन्होंने साबित किया कि एक जमीनी कार्यकर्ता भी शिखर तक पहुंच सकता है।

रामनारायण निषाद: वार्ड पार्षद से मंत्री की कुर्सी तक

सम्राट चौधरी कैबिनेट के एक और अहम सदस्य रामनारायण निषाद (जिन्हें कुछ लोग रामा निषाद के नाम से भी जानते हैं) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

  • शुरुआत: उन्होंने राजनीति का ककहरा नगर निकाय चुनावों से सीखा। वे सबसे पहले वार्ड पार्षद के रूप में निर्वाचित हुए थे।

  • पहचान: निकाय स्तर पर लोगों की समस्याओं को सुलझाने के उनके अनुभव ने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुँचाया है।

निचले स्तर के प्रतिनिधित्व का महत्व

इन मंत्रियों का चयन नीतीश-सम्राट सरकार की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहाँ ‘ग्रासरूट’ स्तर के कार्यकर्ताओं को तवज्जो दी जा रही है।

  • जमीनी समझ: जो नेता मुखिया या पार्षद रहे हैं, उन्हें सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों की बेहतर समझ होती है।

  • कार्यकर्ताओं के लिए संदेश: यह बदलाव बिहार भाजपा के आम कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा संदेश है कि पार्टी में मेहनत और समर्पण को ही सबसे बड़ा पैमाना माना जाता है।

सम्राट चौधरी कैबिनेट की नई तस्वीर

बिहार की इस नई कैबिनेट में अनुभवी दिग्गजों के साथ-साथ इन जमीनी नेताओं का मिश्रण सरकार को एक संतुलित चेहरा देता है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद भी एक समय युवा नेता के रूप में संघर्ष कर इस पद तक पहुंचे हैं, ऐसे में उनका इन ‘जमीनी योद्धाओं’ पर भरोसा करना राज्य के विकास कार्यों में नई गति ला सकता है।