
भारतीय शेयर बाजार में आज का कारोबारी सत्र निवेशकों और ट्रेडर्स दोनों के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 (Nifty 50) की मंथली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के चलते बाजार में भारी उतार-चढ़ाव (volatility) देखने को मिल सकता है। सुबह के शुरुआती संकेतों में गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) और एशियाई बाजारों की कमजोरी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इंडेक्स पर ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली का दबाव बना रह सकता है। एक्सपायरी के दिन ट्रेडर्स अपनी पुरानी पोजीशंस को रोलओवर करने या काटने की होड़ में रहते हैं, जिससे बाजार की दिशा अचानक तेजी से बदल सकती है। तकनीकी चार्ट्स पर 22,800 के स्तर पर मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है, जबकि निचला सपोर्ट टूटने पर बिकवाली और तेज होने की आशंका बनी हुई है।
घरेलू और वैश्विक मोर्चे पर ऐसे कई कारक सक्रिय हैं जो आज बाजार में मंदी के रुख को बढ़ावा दे रहे हैं।
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विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली: पिछले कई सत्रों से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से लगातार शुद्ध बिकवाल (Net Sellers) बने हुए हैं, जिससे लार्जकैप शेयरों में खरीदारी का दम कमजोर पड़ा है।
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अमेरिकी बाजारों में सुस्ती: डाउ जोंस और नैस्डैक में आई गिरावट के चलते वैश्विक स्तर पर ‘रिस्क-ऑफ’ सेंटिमेंट बना हुआ है, जिससे एशियाई बाजारों पर सीधा असर पड़ रहा है।
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कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें भारत जैसे आयातक देश के लिए व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति की चिंता बढ़ाती हैं।
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तिमाही नतीजों (Q2 Results) में मिला-जुला रुझान: दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट अर्निंग्स में कुछ चुनिंदा कंपनियों को छोड़कर व्यापक स्तर पर आय वृद्धि सीमित रही है, जिससे निवेशकों का सतर्क रुख बरकरार है।
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मंथली कॉन्ट्रैक्ट्स का रोलओवर दबाव: मंथली एक्सपायरी होने के कारण शॉर्ट पोजीशंस का दबाव हावी दिख रहा है और डेरिवेटिव्स में अनवाइंडिंग देखने को मिल रही है।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी 50 फिलहाल एक सीमित दायरे और कंसोलिडेशन जोन में कारोबार कर रहा है।
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अहम रेजिस्टेंस (Resistance): इंडेक्स के लिए पहला बड़ा रेजिस्टेंस 22,750 से 22,800 के दायरे में है। जब तक निफ्टी 22,800 के ऊपर टिककर बंद नहीं होता, तब तक हर उछाल पर बिकवाली (Sell on Rise) की रणनीति प्रभावी रहने की संभावना है। यदि यह स्तर पार होता है तो अगला लक्ष्य 22,950-23,000 हो सकता है।
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क्रिटिकल सपोर्ट (Support): नीचे की ओर 22,550-22,500 का स्तर पहला तात्कालिक बेस है। अगर एक्सपायरी के दबाव में निफ्टी 22,500 के नीचे फिसलता है, तो स्टॉप-लॉस ट्रिगर होने से यह गिरावट 22,400 और 22,350 के स्तर तक खिंच सकती है।
बैंकिंग इंडेक्स बैंक निफ्टी (Bank Nifty) पर भी एक्सपायरी के दिन विशेष नजर रहेगी, क्योंकि वित्तीय सेक्टर का निफ्टी के कुल भारांक (weightage) में सबसे बड़ा हिस्सा है। निजी और सरकारी बैंकों में हालिया गिरावट के बाद बैंक निफ्टी का चार्ट 54,000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास मंडरा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि बैंक निफ्टी के लिए 54,500 का स्तर एक कड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है। यदि बैंकिंग शेयर 54,000 के नीचे ब्रेकडाउन देते हैं, तो यह पूरे बाजार को नीचे खींचने का काम करेगा। एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक बैंक जैसे दिग्गज शेयरों के शुरुआती 1 घंटे के मूवमेंट से ही आज के ट्रेंड की दिशा तय होगी।
मंथली एक्सपायरी के दिन प्रीमियम डीके (Time Decay) बहुत तेजी से होता है, जिसके चलते आउट-ऑफ-द-मनी (OTM) ऑप्शंस के शून्य होने का जोखिम सबसे अधिक रहता है। ऐसे में बाजार विशेषज्ञों ने रिटेल ट्रेडर्स को सख्त जोखिम प्रबंधन की सलाह दी है:
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सख्त स्टॉप-लॉस: बिना स्टॉप-लॉस के कोई भी इंट्राडे ट्रेड न लें, क्योंकि 1 बजे के बाद अचानक आने वाली रोलओवर वोलैटिलिटी से भारी नुकसान हो सकता है।
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हीरो-जीरो ट्रेड्स से सतर्कता: आखिरी घंटों में कम प्रीमियम वाले ऑप्शंस खरीदने के लालच से बचें।
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दीर्घकालिक निवेशकों के लिए नजरिया: लंबी अवधि के वेल्थ क्रिएटर्स के लिए ऐसे गिरावट वाले सत्र पैनिक सेलिंग करने के नहीं, बल्कि मजबूत फंडामेंटल वाले ब्लूचिप और लार्जकैप शेयरों में सिस्टमैटिक तरीके से डिप्स पर खरीदारी (Buy on Dips) करने का मौका साबित होते हैं।
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