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Stent Placement Heart Attack Risk: क्या स्टेंट डलने के बाद दोबारा नहीं आ सकता हार्ट अटैक? जानें कार्डियोलॉजिस्ट्स से क्या है इसके पीछे का कड़वा सच और बचाव के 5 जरूरी नियम

हार्ट अटैक (Heart Attack) या गंभीर कोरोनरी आर्टरी डिजीज से जूझ रहे मरीजों के लिए एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) और स्टेंटिंग (Stent Placement) एक जीवनरक्षक मेडिकल प्रक्रिया है। जब दिल की धमनियों (Arteries) में फैट और कोलेस्ट्रॉल (Plaque) जमा होने से खून का बहाव रुक जाता है, तो डॉक्टर धमनियों को खोलने के लिए उसमें एक छोटी जालीदार ट्यूब यानी स्टेंट डाल देते हैं। लेकिन, समाज में और कई मरीजों के मन में यह एक बहुत बड़ा भ्रम (Myth) बना हुआ है कि “एक बार स्टेंट लग गया, तो अब जिंदगी में कभी दोबारा हार्ट अटैक नहीं आ सकता।”

वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट्स (हृदय रोग विशेषज्ञ) इस बात को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि स्टेंट लगने के बाद भी दोबारा हार्ट अटैक आ सकता है। स्टेंटिंग हृदय रोग का कोई स्थायी ‘इलाज’ (Permanent Cure) नहीं है, बल्कि यह केवल बंद पड़ी धमनी को खोलने की एक ‘इलाज प्रक्रिया’ (Procedure) है। यदि मरीज अपनी जीवनशैली और दवाओं में लापरवाही बरतता है, तो स्टेंट के अंदर या दिल की किसी दूसरी धमनी में दोबारा ब्लॉकेज होकर जानलेवा अटैक आ सकता है। आइए जानते हैं डॉक्टर्स से कि स्टेंट लगने के बाद दोबारा हार्ट अटैक आने के क्या कारण हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।

स्टेंट लगने के बाद भी क्यों आ सकता है दोबारा हार्ट अटैक? 3 मुख्य कारण

कार्डियोलॉजिस्ट्स के अनुसार, एंजियोप्लास्टी के बाद दोबारा अटैक आने के पीछे मुख्य रूप से तीन स्थितियां जिम्मेदार होती हैं:

1. स्टेंट थ्रोम्बोसिस (Stent Thrombosis – स्टेंट में खून का थक्का जमना)

स्टेंट डलने के बाद शुरुआती कुछ महीनों या सालों में स्टेंट की जाली के अंदर अचानक खून का थक्का (Blood Clot) जम सकता है। इसे ‘स्टेंट थ्रोम्बोसिस’ कहा जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी होती है। यदि मरीज डॉक्टर द्वारा दी गई खून पतला करने वाली दवाइयां (Blood Thinners जैसे एस्पिरिन या क्लोपिडोग्रेल) एक दिन भी छोड़ देता है, तो स्टेंट में थक्का जम जाता है और मरीज को तुरंत दोबारा गंभीर हार्ट अटैक आ जाता है।

2. इन-स्टेंट री-स्टेनोसिस (In-Stent Restenosis – स्टेंट के अंदर दोबारा ब्लॉकेज बनना)

समय के साथ शरीर की प्राकृतिक रिकवरी प्रक्रिया के कारण स्टेंट लगाए गए स्थान पर नई ऊतकों (Tissues) की परत जमने लगती है या फिर से कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है। हालांकि, आधुनिक ‘ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट्स’ (DES – जिन पर दवा की परत चढ़ी होती है) में री-स्टेनोसिस का खतरा काफी कम (5% से भी कम) होता है, लेकिन यदि डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल अनियंत्रित रहे, तो स्टेंट का रास्ता फिर से धीरे-धीरे संकरा (Blocked) हो जाता है।

3. दिल की दूसरी धमनियों में नई ब्लॉकेज (New Blockage in Other Arteries)

स्टेंट केवल उसी विशेष धमनी या हिस्से में लगाया जाता है जो उस समय 70% या उससे ज्यादा ब्लॉक होती है। लेकिन इंसान के दिल में कई अन्य छोटी-बड़ी धमनियां होती हैं। यदि मरीज स्टेंट लगने के बाद भी स्मोकिंग करता है, अनहेल्दी डाइट खाता है और एक्सरसाइज नहीं करता, तो दिल की अन्य धमनियों में नया प्लेक (Plaque) जमना शुरू हो जाता है और 1 या 2 साल बाद किसी दूसरी जगह ब्लॉकेज फटने से हार्ट अटैक आ जाता है।

स्टेंट डलने के बाद दोबारा हार्ट अटैक से बचने के 5 सुनहरे नियम

यदि आपकी या आपके किसी प्रियजन की एंजियोप्लास्टी हुई है, तो डॉक्टर्स द्वारा बताए गए इन 5 नियमों का कड़ाई से पालन करके दोबारा आने वाले हार्ट अटैक के खतरे को शून्य के करीब लाया जा सकता है:

  • 1. ब्लड थिनर दवाइयां कभी न छोड़ें: डॉक्टर द्वारा दी गई खून पतला करने वाली दवाएं (Antiplatelet Drugs) और स्टैटिन (Statin) दवाइयां बिल्कुल नियमित समय पर लें। डॉक्टर की लिखित अनुमति के बिना एक भी खुराक मिस न करें और न ही अपने मन से दवा बंद करें।

  • 2. धूम्रपान और तंबाकू को तुरंत कहें ना: स्मोकिंग और तंबाकू का सेवन स्टेंट के अंदर खून का थक्का जमने की रफ्तार को 10 गुना बढ़ा देता है। स्टेंटिंग के बाद धूम्रपान पूरी तरह वर्जित होना चाहिए।

  • 3. डायबिटीज, बीपी और कोलेस्ट्रॉल का सख्त नियंत्रण: अपने ब्लड प्रेशर (BP को 120/80 के करीब रखें), शुगर (HbA1c को 7 से नीचे रखें) और बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL को 55 mg/dL से नीचे) को सख्त डाइट और दवाओं से नियंत्रित रखें।

  • 4. हृदय-अनुकूल जीवनशैली (Heart-Healthy Lifestyle): भोजन में सैचुरेटेड फैट, जंक फूड, रिफाइंड तेल और अत्यधिक नमक से परहेज करें। अपनी डाइट में ताजे फल, हरी सब्जियां, ओट्स और मेवे शामिल करें। डॉक्टर की सलाह अनुसार रोजाना 30 मिनट हल्की वॉक या व्यायाम जरूर करें।

  • 5. नियमित फॉलो-अप और स्ट्रेस मैनेजमेंट: हर 3 से 6 महीने में अपने कार्डियोलॉजिस्ट से नियमित चेकअप कराएं और समय-समय पर ईसीजी (ECG) या इको (ECHO) टेस्ट करवाएं। अत्यधिक तनाव (Stress) से बचें, क्योंकि तनाव से धमनियों में खिंचाव आता है।

इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

यदि स्टेंट डलने के बाद आपको सीने में भारीपन, दबाव, बाईं बांह या जबड़े में दर्द, अचानक बहुत ज्यादा पसीना आना या सांस फूलने जैसी समस्या महसूस होती है, तो यह स्टेंट बंद होने या दोबारा हार्ट अटैक का शुरुआती लक्षण हो सकता है। ऐसी स्थिति में एक मिनट की भी देरी किए बिना तुरंत नजदीकी कार्डियक अस्पताल पहुंचे।