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SME Growth Fund: छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए मोदी कैबिनेट ने मंजूर किया ₹10,000 करोड़ का फंड, जानें किन MSMEs को मिलेगा सीधा फायदा

देश के आर्थिक विकास की रीढ़ माने जाने वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को बड़ा संबल देते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹10,000 करोड़ के ‘एसएमई ग्रोथ फंड’ (SME Growth Fund) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। अब तक सरकारी योजनाओं का अधिकांश ध्यान शुरुआती दौर के सूक्ष्म उद्यमों को ऋण (Debt) उपलब्ध कराने पर केंद्रित रहता था, जिससे मध्यम स्तर पर पहुंच चुकी कंपनियों के सामने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए दीर्घकालिक विकास पूंजी (Growth Equity) का भारी अभाव बना रहता था। इस संरचनात्मक कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने इस वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) की रूपरेखा तैयार की है। इसका सीधा उद्देश्य भारतीय छोटे व मध्यम उद्यमों को केवल घरेलू स्तर तक सीमित न रखकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Value Chains) का प्रमुख हिस्सा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।

पारंपरिक बैंक कर्जों की तुलना में एसएमई ग्रोथ फंड का मॉडल पूरी तरह अलग और आधुनिक है:

  • इक्विटी आधारित भागीदारी: इस फंड के तहत पात्र इकाइयों को कर्ज के बजाय ‘इक्विटी कैपिटल’ (हिस्सेदारी के रूप में पूंजी) दी जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कारोबारी पर हर महीने भारी-भरकम ईएमआई और ब्याज चुकाने का तात्कालिक दबाव नहीं रहेगा।

  • धैर्यवान पूंजी (Patient Capital): सरकार और फंड मैनेजर लंबी अवधि के दृष्टिकोण के साथ निवेश करेंगे, जिससे कंपनियां 5 से 7 साल तक बिना वित्तीय तनाव के अपने शोध, उत्पाद गुणवत्ता और प्लांट आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।

  • कोलेटरल की बाध्यता नहीं: बैंक लोन की तरह इसमें अपनी निजी या अचल संपत्ति गिरवी (Collateral) रखने की मजबूरी नहीं होगी, जिससे युवा और नवोन्मेषी उद्यमियों को अपनी व्यापारिक क्षमता साबित करने का खुला अवसर मिलेगा।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, इस ₹10,000 करोड़ के फंड का आधा से अधिक हिस्सा विनिर्माण (Manufacturing) आधारित उद्यमों के लिए आरक्षित किया गया है:

  • मैन्युफैक्चरिंग एमएसएमई को प्राथमिकता: ऑटो कंपोनेंट्स, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और केमिकल सेक्टर की उत्पादन इकाइयों को प्राथमिकता दी जाएगी।

  • मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का लाभ: भारत द्वारा हाल ही में यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अन्य देशों के साथ किए गए ट्रेड एग्रीमेंट्स के तहत जो निर्यात अवसर बने हैं, उन्हें भुनाने वाली निर्यातोन्मुखी कंपनियों को वैश्विक बाजार में उतरने के लिए सीधे फंड से सहारा दिया जाएगा।

  • टियर-2 और टियर-3 शहरों के क्लस्टर्स पर फोकस: केवल दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों तक पूंजी सीमित न रहे, इसके लिए लखनऊ, कानपुर, कोयंबटूर, इंदौर, राजकोट, सूरत और जालंधर जैसे औद्योगिक क्लस्टर्स में काम करने वाले उद्योगों को विशेष आवंटन दिया जाएगा। इससे संतुलित क्षेत्रीय विकास होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित होंगे।

पारंपरिक बैंक लोन बनाम नया ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड

पैरामीटर पारंपरिक MSME बैंक लोन ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड
पूंजी का स्वरूप उधारी / ऋण (Debt) इक्विटी पूंजी (Growth Equity)
पुनर्भुगतान की शर्त लोन मिलते ही मासिक EMI शुरू कोई EMI नहीं; रिटर्न कंपनी की ग्रोथ से जुड़ा
जमानत (Collateral) जमीन, मकान या मशीनरी बंधक रखना अनिवार्य किसी कोलेटरल या अचल संपत्ति की शर्त नहीं
उपयोग का दायरा कार्यशील पूंजी या छोटी मशीन खरीद प्लांट विस्तार, ग्लोबल एक्सपोर्ट, विलय व अधिग्रहण
जोखिम की प्रकृति पूरा जोखिम केवल उद्यमी का निवेशक और कंपनी के बीच साझा जोखिम

फंड के साथ-साथ सरकार ने टियर-2 और टियर-3 शहरों के छोटे कारोबारियों को पेशेवर मदद देने के लिए ‘कॉरपोरेट मित्र’ (Corporate Mitras) व्यवस्था को भी धरातल पर उतारने की घोषणा की है:

  1. कंप्लायंस और वित्तीय ऑडिट: छोटे उद्यमी अक्सर जटिल कानूनी प्रक्रियाओं, टैक्स नियमों और वित्तीय रिपोर्टिंग के अभाव में विदेशी निवेश या संस्थागत पूंजी हासिल नहीं कर पाते। सर्टिफाइड कॉरपोरेट मित्र इन इकाइयों के बहीखातों को इन्वेस्टर-रेडी बनाने में मदद करेंगे।

  2. टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन: पारंपरिक रूप से चल रही फैक्ट्रियों में ऑटोमेशन, एआई टूल्स और आईओटी (IoT) आधारित मशीनरी लगाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मार्गदर्शन प्रदान करेगी।

  3. टीआरईडीएस (TReDS) से नकदी संकट हल: एमएसएमई के फंसे हुए बकायों को समय पर दिलाने के लिए इनवॉइस डिस्काउंटिंग प्लेटफॉर्म को और मजबूत किया जा रहा है ताकि कंपनियों को नकदी की कमी न झेलनी पड़े।

जो एसएमई इस ₹10,000 करोड़ के ग्रोथ फंड से इक्विटी पूंजी प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें निम्नलिखित बुनियादी शर्तों को पूरा करना होगा:

  • उद्यम व डीपीआईआईटी रजिस्ट्रेशन: आवेदक इकाई के पास वैध ‘उद्यम रजिस्ट्रेशन’ (Udyam Certificate) और उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) की मान्यता होनी चाहिए।

  • वित्तीय ट्रैक रिकॉर्ड: कंपनी का पिछले 2 से 3 वर्षों का वित्तीय रिकॉर्ड स्थिर होना चाहिए और बैलेंस शीट में सकारात्मक परिचालन लाभ (Positive EBITDA) दर्ज होना जरूरी है।

  • स्केलेबल बिजनेस मॉडल: इकाई के पास स्पष्ट विस्तार योजना (Capacity Expansion Plan) होनी चाहिए, जिसमें यह दर्शाया गया हो कि पूंजी मिलने के बाद उत्पादन, निर्यात या तकनीकी क्षमता में कितनी वृद्धि होगी।

  • आवेदन का माध्यम: पात्र कंपनियां सिडबी (SIDBI) के वेंचर कैपिटल प्लेटफॉर्म और ‘जन समर्थ’ (Jan Samarth) पोर्टल के माध्यम से अपना विस्तृत बिजनेस प्रपोजल और पिच डेक जमा कर सकेंगी। तकनीकी मूल्यांकन और वित्तीय ड्यू-डिलिजेंस के बाद फंड मैनेजर इक्विटी वैल्यूएशन तय कर पूंजी का आवंटन करेंगे।